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‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ में 36 युवा प्रतिभाओं ने दिखाई इनोवेशन की ताकत

दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सैमसंग इंडिया ने ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ के टॉप 20 फाइनलिस्ट की घोषणा की। यह प्रोग्राम टेक्नोलॉजी और एजुकेशन को मिलाकर युवाओं को क्रिएटिव सोच और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स के साथ भविष्य के लीडर बनने में मदद करता है।

एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ दुनिया भर के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने के लिए STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ) का इस्तेमाल करने में मदद करता है। इसमें हिस्सा लेने वाले युवा अपने आस-पास की समस्याओं की पहचान करते हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से उनके क्रिएटिव समाधान निकालते हैं।

अपने पांचवें एडिशन में, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ पूरे भारत से ऐसे युवा इनोवेटर्स को एक साथ ला रहा है जो अपने आस-पास की समस्याओं को टेक्नोलॉजी-बेस्ड समाधानों में बदल रहे हैं। टॉप 20 में शामिल आधे से ज़्यादा प्रतिभागी टियर 2 और टियर 3 शहरों से हैं और फाइनलिस्ट 12 राज्यों के 18 शहरों का प्रतिनिधित्व करते हैं – जो यह दिखाता है कि युवाओं के नेतृत्व वाला इनोवेशन भारत के पारंपरिक टेक्नोलॉजी हब से आगे बढ़ रहा है।

सैमसंग साउथ वेस्ट एशिया के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट, एसपी चुन ने कहा, “इस साल के टॉप 20 की खास बात सिर्फ़ उनके द्वारा बनाई जा रही टेक्नोलॉजी नहीं है, बल्कि वे समस्याएं भी हैं जिन्हें उन्होंने सुलझाने के लिए चुना है। पूरे भारत से युवा इनोवेटर अपने समुदायों की चुनौतियों – जैसे एक्सेसिबिलिटी और हेल्थकेयर से लेकर खेती, प्रदूषण और खेल – पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और सोच रहे हैं कि टेक्नोलॉजी कैसे बदलाव ला सकती है। ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ उन्हें स्थानीय ज़रूरत पर आधारित किसी आइडिया को ऐसे समाधान में बदलने का मौका, मेंटरशिप और संसाधन देता है जिसमें बड़े पैमाने पर असर डालने की क्षमता हो।”

इस साल के फाइनलिस्ट के बीच एक खास ट्रेंड टेक्नोलॉजी को ज़्यादा उपयोगी और सुलभ बनाने पर फोकस करना है। चार थीम – ‘AI लिविंग फॉर इंडिया’, ‘एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी’, ‘हेल्थ एंड एजुकेशन’ और ‘स्पोर्ट एंड टेक’ – के तहत युवा इनोवेटर AI, कंप्यूटर विज़न, सेंसर, वॉयस टेक्नोलॉजी और कम कीमत वाले वियरेबल्स का इस्तेमाल कम साक्षरता और दिव्यांगों के लिए एक्सेस जैसी चुनौतियों से लेकर खेती के कचरे, प्रदूषण, न्यूरोलॉजिकल हेल्थ और पैरा-स्पोर्ट्स तक की समस्याओं को हल करने के लिए कर रहे हैं।

ऐसे लोगों के लिए कई समाधान डिज़ाइन किए जा रहे हैं जिनकी टेक्नोलॉजी तक पहुंच पारंपरिक रूप से सीमित रही है। इनमें शामिल हैं: कम साक्षरता वाले लोगों के लिए जटिल डॉक्यूमेंट्स को समझाने वाला एक ऑफ़लाइन AI एप्लीकेशन, रियल-टाइम इंडियन साइन लैंग्वेज ट्रांसलेशन, दृष्टिबाधित छात्रों के लिए वॉयस-फर्स्ट लर्निंग साथी, ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों में सेंसरी मेल्टडाउन का पहले से पता लगाने वाली टेक्नोलॉजी, और दृष्टिबाधित तैराकों को ज़्यादा आज़ादी से ट्रेनिंग करने में मदद करने वाली असिस्टिव टेक्नोलॉजी। दूसरे फाइनलिस्ट ऐसे आइडियाज़ के ज़रिए पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनका मकसद खेती से बचे कचरे को साफ़ ऊर्जा और काम के कार्बन मटीरियल में बदलना, टेक्सटाइल वेस्ट और कंस्ट्रक्शन साइट पर होने वाले प्रदूषण को कम करना और इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव को कम करना है।

टॉप 20 में शामिल लोगों की भौगोलिक स्थिति इनोवेशन के बढ़ते दायरे को दिखाती है। फाइनलिस्ट ओडिशा के सुंदरगढ़; आंध्र प्रदेश के चित्तूर और विशाखापत्तनम; उत्तर प्रदेश के रायबरेली और वाराणसी, पंजाब के अमृतसर और एसएएस नगर; हरियाणा के सोनीपत और छत्तीसगढ़ के रायपुर के साथ-साथ बेंगलुरु, चेन्नई, कोयंबटूर, नई दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई से आए हैं।

टॉप 20 टीमें सेमी-फ़ाइनल राउंड से चुनी गईं, जिसमें 40 टीमों ने FITT-IIT दिल्ली के साथ मिलकर एक प्रैक्टिकल प्रोटोटाइपिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया। इनोवेशन बूटकैंप के ज़रिए, टीमों ने मेंटर्स के साथ मिलकर अपने समाधानों को बेहतर बनाया, जिन लोगों के लिए वे डिज़ाइन बना रही थीं उन्हें बेहतर ढंग से समझा और इनोवेशन प्रोसेस का प्रैक्टिकल अनुभव हासिल किया।

बूटकैंप के हिस्से के तौर पर, टीमों ने सैमसंग डिज़ाइन दिल्ली (SDD), सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – नोएडा (SRI-N), सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – दिल्ली (SRI-D), सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – बेंगलुरु (SRI-B) और गुरुग्राम में सैमसंग के हेड ऑफिस का दौरा भी किया, जिससे उन्हें डिज़ाइन, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के प्रति सैमसंग के नज़रिए को समझने का मौका मिला।

इस सफ़र का समापन एक नेशनल पिच इवेंट के साथ हुआ, जहाँ सैमसंग R&D और सैमसंग साउथ वेस्ट एशिया के मेंटर्स समेत 20 एक्सपर्ट्स ने टीमों का मूल्यांकन किया और चार थीम में से हर एक से पाँच फाइनलिस्ट चुने।

भारत के लिए AI लिविंग

4 Percentage – कोयंबटूर, तमिलनाडु: MicroLearning AI, एक वॉइस-फर्स्ट मल्टीलिंगुअल (कई भाषाओं वाला) प्लेटफ़ॉर्म जो हेल्थकेयर और सरकारी योजनाओं की मुश्किल जानकारी को भारतीय भाषाओं में आसान बोलचाल वाले छोटे-छोटे लेसन (माइक्रो-लेसन) में बदलता है।

itzFOD – वाराणसी, उत्तर प्रदेश: VaakSetu, एक ऑफ़लाइन मोबाइल ऐप जो AI का इस्तेमाल करके लोन के कागज़ात, ज़मीन के दस्तावेज़, FIR और हॉस्पिटल के फ़ॉर्म जैसे डॉक्यूमेंट्स को पढ़ता है और उन्हें आसान बोलचाल की भाषा में समझाता है।

JARVISS – चेन्नई, तमिलनाडु: SafePath AI, एक स्मार्टफ़ोन और IoT-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म जो AI और सेंसर डेटा का इस्तेमाल करके सड़क पर खतरों का पता लगाता है, उनकी गंभीरता को समझता है और सुरक्षित रास्ते का सुझाव देता है।

QuantHunt – रायबरेली, उत्तर प्रदेश: एक AI-बेस्ड साइबरसिक्योरिटी सॉल्यूशन जिसे एन्क्रिप्शन की कमियों का पता लगाने और ऑर्गनाइज़ेशन को उभरते हुए क्वांटम-कंप्यूटिंग खतरों के लिए अपने डिजिटल सिस्टम तैयार करने में मदद करने के लिए बनाया गया है।

SignBridge AI – कोलकाता, पश्चिम बंगाल: एक AI-पावर्ड प्लेटफ़ॉर्म जो भारतीय साइन लैंग्वेज को रियल-टाइम में टेक्स्ट और स्पीच में बदलता है, जिससे स्कूलों, अस्पतालों, वर्कप्लेस और सार्वजनिक जगहों पर बातचीत बेहतर होती है।

एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी

AeroShield – नई दिल्ली: कंस्ट्रक्शन के मलबे को रोकने वाली कम लागत वाली जाली (नेट), जिसे मौजूदा मचान (scaffolding) के साथ जोड़कर हवा में मौजूद प्रदूषकों को पकड़ने और खत्म करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

AgriVolt – अमृतसर, पंजाब: AgriVolt Carbon AI, जिसका मकसद खेती से बचे कचरे का इस्तेमाल करके बिजली बनाना और बायोचार व अन्य कार्बन-युक्त मटीरियल हासिल करना है, साथ ही उत्सर्जन (emissions) को कम करना है।

IndieJeanous – मुंबई, महाराष्ट्र: एक सर्कुलर डेनिम पहल जो बेकार डेनिम और कपड़ों के टुकड़ों को लाइफ़स्टाइल प्रोडक्ट्स में बदलती है और साथ ही महिला कारीगरों के लिए रोज़गार के मौके बनाती है।

InnoBotix – नई दिल्ली: Sentinel, एक सोलर-पावर्ड AI एज डिवाइस जो कैमरों, रडार और सिस्मिक डेटा का इस्तेमाल करके इंसानी बस्तियों के पास आने वाले जंगली जानवरों का पता लगाता है और पहले से चेतावनी देता है।

KINVA BIO – सोनीपत, हरियाणा: एक AI-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म जो बायो-रिएक्टर का इस्तेमाल करके गन्ने की खोई (bagasse) से प्रोटीन-युक्त माइकोप्रोटीन के प्रोडक्शन को बेहतर बनाने की कोशिश करता है।

हेल्थ और एजुकेशन

404NotFound – बेंगलुरु, कर्नाटक: StepSense, एक सेंसर और एज-AI सिस्टम जो जूते-चप्पल को चाल-ढाल पर नज़र रखने वाले प्लेटफ़ॉर्म में बदल देता है, ताकि गिरने के जोखिम, न्यूरोपैथी, थकान और सेहत से जुड़ी अन्य समस्याओं के संकेतों का पता लगाया जा सके।

Equinox – नई दिल्ली: SARA AI, एक वॉइस-फर्स्ट स्टडी साथी जो दृष्टिबाधित छात्रों को स्क्रीन या कीबोर्ड पर निर्भर हुए बिना टेक्स्टबुक, स्पष्टीकरण, क्विज़ और पर्सनलाइज़्ड लर्निंग सपोर्ट का इस्तेमाल करने में मदद करता है।

morphism – रायपुर, छत्तीसगढ़: एक AI सिस्टम जिसे ऑटिस्टिक लोगों की भावनाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने के लिए बनाया गया है। यह चेहरे के बारीक हाव-भाव और व्यवहार से जुड़े अन्य संकेतों का विश्लेषण करता है।

NeuroTrace – SAS नगर, पंजाब: स्ट्रोक के बाद निगरानी के लिए स्मार्टफोन-आधारित AI समाधान। यह आवाज़, चेहरे की हलचल और प्रतिक्रिया के समय में बदलाव का विश्लेषण करके संभावित न्यूरोलॉजिकल गिरावट की पहचान करता है।

VB SenseGuard – नई दिल्ली: Sense Guard, एक कम लागत वाला AI पहनने योग्य डिवाइस (वेयरेबल) है। इसे ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर वाले बच्चों में सेंसरी मेल्टडाउन (संवेदी अति-उत्तेजना) से जुड़े शारीरिक पैटर्न की पहचान करने और देखभाल करने वालों को समय पर अलर्ट देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

स्पोर्ट और टेक

Code Blooded – सुंदरगढ़, ओडिशा: ParaSync, एक AI-संचालित प्लेटफ़ॉर्म जो पैरा-एथलीटों के स्मार्टफोन वीडियो का विश्लेषण करता है। यह खेल की तकनीक का आकलन करता है, प्रगति को ट्रैक करता है और कम सुविधा वाले क्षेत्रों की प्रतिभाओं को स्काउट्स से जोड़ने में मदद करता है।

पैरा-एथलीट स्विमिंग सॉल्यूशन – विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश: एक पहनने योग्य नेविगेशन सिस्टम जो पता लगाता है कि कब दृष्टिबाधित तैराक अपनी तय दिशा से भटक रहे हैं और उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए हैप्टिक संकेत (स्पर्श-आधारित संकेत) देता है।

Rogue – चेन्नई, तमिलनाडु: NeuroStride, एक AI-संचालित पहनने योग्य डिवाइस जो पार्किंसंस के कारण होने वाली अनैच्छिक कंपकंपी (tremors) और जानबूझकर की गई मांसपेशियों की हलचल के बीच अंतर करने और लक्षित इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन प्रदान करने का प्रयास करता है।

Somatrace – हैदराबाद, तेलंगाना: एक पहनने योग्य IoT ट्रेनिंग टूल जो ट्रेनिंग के दौरान रीढ़ की हड्डी के कोण और भार को मापता है। यह सटीक खेल (precision-sport) वाले एथलीटों और कोचों को चोट के जोखिम को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।

Untethered – चित्तूर, आंध्र प्रदेश: स्मार्ट स्विमिंग गॉगल्स जो अल्ट्रासोनिक सेंसिंग और हैप्टिक फीडबैक का उपयोग करके दृष्टिबाधित तैराकों को पूल की दीवार के पास पहुंचने पर चेतावनी देते हैं।

समाधानों को अगले चरण तक ले जाना

टॉप 20 फाइनलिस्ट को अब सैमसंग के विशेषज्ञों और FITT-IIT दिल्ली से लगातार मेंटरशिप मिलेगी, क्योंकि वे 14 और 15 अक्टूबर को होने वाले ग्रैंड फिनाले की तैयारी कर रहे हैं।

ग्रैंड फिनाले में अंतिम पिच प्रेजेंटेशन होंगे, जिसके बाद सभी टॉप 20 टीमों के लिए एक इन्वेस्टर मीट होगी। यह बातचीत युवा इनोवेटर्स को स्टार्टअप और निवेश इकोसिस्टम से जुड़ने और अपने समाधानों को और विकसित करने के अगले चरणों को समझने का अवसर देगी।

इस प्रतियोगिता का समापन विजेताओं की घोषणा और पुरस्कार समारोह के साथ होगा। टॉप 20 टीमों को प्रोटोटाइप बनाने के लिए कुल मिलाकर 20 लाख रुपये की ग्रांट मिलेगी, जिसमें हर टीम को 1 लाख रुपये दिए जाएंगे। टॉप 20 में शामिल सभी 36 प्रतिभागियों को सैमसंग का लेटेस्ट गैलेक्सी Z फ्लिप स्मार्टफोन भी मिलेगा। चार विजेता टीमों को – हर थीम से एक – सैमसंग की ओर से FITT-IIT दिल्ली के ज़रिए कुल मिलाकर 2 करोड़ रुपये की इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगी। यह इनक्यूबेशन सपोर्ट विजेता टीमों को अपने सॉल्यूशन को और बेहतर बनाने और उन्हें परखने में मदद करेगा, साथ ही उन्हें मार्केट के लिए तैयार वेंचर में बदलने की संभावनाओं को भी तलाशेगा।

इस प्रोग्राम में ग्रैंड फिनाले के दौरान खास पुरस्कारों के ज़रिए प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जाएगा, जिसमें 50,000 रुपये का ‘डिजिटल इम्पैक्ट अवॉर्ड’ और 1-1 लाख रुपये के दो ‘कम्युनिटी चॉइस अवॉर्ड’ शामिल हैं।

अपने ग्लोबल CSR विज़न “टुगेदर फॉर टुमॉरो! इनेबलिंग पीपल” (आने वाले कल के लिए साथ मिलकर! लोगों को सक्षम बनाना) से प्रेरित होकर, सैमसंग इंडिया स्मार्ट एजुकेशन और युवाओं को स्किल सिखाने पर ध्यान देते हुए युवा भारतीयों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके ज़रिए वह बेहतर भविष्य बनाने के लिए ज़रूरी ज्ञान, स्किल और संसाधनों तक समान पहुँच उपलब्ध कराता है।