लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सच जैसे-जैसे सामने आता है, आप आज़ाद हो सकते हैं। ऐसा ही कुछ देखने को मिला नेटफ्लिक्स के कैप्टिव रियलिटी शो, लॉक अपः सच या सज़ा में, जिसने पहले दिन से ही दर्शकों को बांधकर रखा। छः हफ्तों तक इमोशनल कॉन्फेशन, चार्जशीट, जबरदस्त टकराव, बदलती डायनामिक्स और यादगार रिडेंप्शन के बाद नेटफ्लिक्स और बालाजी टेलीफिल्म्स के रिकॉर्ड-ब्रेकिंग कैप्टिव रियलिटी शो, लॉक अपः सच या सज़ा को अपना विनर मिल गया।
सीज़न के सबसे मुश्किल टास्क, लगातार स्क्रूटनी और बदलती डायनामिक्स के सफर में आगे बढ़ते हुए श्रेया कालरा ने साबित कर दिया कि ऑथेंटिसिटी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और उन्होंने लॉक अपः सच या सज़ा की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। श्रेया ने लॉक अप में अकेले प्रवेश किया था, पर वापस वो अपनी सच्चाई के साथ गईं। उनका यह सफर पूरे देश के दर्शकों को बहुत पसंद आया और यह टाईटल उन्होंने जीत लिया।
कैप्टिव रियलिटी फॉर्मेट में शुरू हुआ यह शो भारत में सबसे ज़्यादा चर्चित शो में से एक बन गया और इसने लोगों को अपना दीवाना बना दिया। इसकी शुरुआत 27 जून को सप्ताह में पाँच दिन स्ट्रीम होने वाली सीरीज के रूप में हुई थी, लेकिन यह इतनी ज़्यादा सफल हुई कि बाद में इसे सप्ताह में छः दिन प्रसारित किया जाने लगा, यानी यह सीरीज हफ्ते के हर दिन प्रसारित हो रही थी, लेकिन फिर भी दर्शकों का मन नहीं भर रहा था। इस सीरीज ने केवल तीन हफ्तों में 50 मिलियन व्यूईंग घंटे पार कर लिए। सोशल मीडिया पर तो इस शो के बारे में हो रही चर्चा की बाढ़ आ गई और इसे आज तक 3.3 बिलियन से अधिक सोशल मीडिया व्यू और इंटरनेट पर 5 मिलियन कन्वर्सेशन प्राप्त हुए।
लॉक अपः सच या सज़ा केवल एक हिट सीरीज ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पहचान बन गई। सोलह इनमेट्स – राम कपूर, शिवांगी जोशी, धीरज धूपर, हर्षद चोपड़ा, शिल्पा शिंदे, सुनीता आहूजा, पामला सेरेना, माधुरी ग्रोवर, श्रेष्ठा अय्यर, आकांक्षा चमोला, आकांक्षा चौधरी, योगेश रावत, सूफी मोतीवाला, श्रेया कालरा, वरुण यादव और रियाज एली ने एक लक्ष्य के साथ लॉक अप में प्रवेश किया। उनके वन-लाइनर इंटरनेट कैचफ्रेज़ बन गए; उनकी आपसी प्रतिद्वंद्विता ने कभी न खत्म होने वाली बहसें छेड़ दीं, और हर चार्जशीट, कन्फेशन और इविक्शन सोशल मीडिया की टाइमलाइन पर छाए रहे।
रितेश देशमुख और फराह खान, दोनों ने ही इनमेट्स और उनके भावावेशों को बखूबी संभाला। दोस्त बनने से लेकर, ज़रूरत पड़ने पर उन्हें टोकने और हर कदम पर उनका मार्गदर्शन करने तक, दोनों जेलरों ने अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई और शो में जबरदस्त योगदान दिया।अंत में एक इनमेट ने अपनी काबिलियत साबित करते हुए विनर की ट्रॉफी को अपने नाम कर लिया।

श्रेया कालरा ने कहा, ‘‘लॉक अपः सच या सज़ा के अनुभव ने मुझे हमेशा के लिए बदल दिया। मैं यहाँ परफेक्ट बनने नहीं आई थी। मैं यहाँ पर रियल बनने आई थी। ऑथेंटिक बने रहने के कारण ही आज मुझे विनर की ट्रॉफी मिली है। यह मेरे जीवन का सबसे गौरवशाली पल है। लोगों ने मुझे लाउड, विवादों में रहने वाली और मुश्किल इंसान कहा, लेकिन मैं हमेशा रियल बनी रही। यह ट्रॉफी उन सभी के लिए है, जिन्हें अपने सच को बेबाकी से कहने के लिए जज किया गया है। मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देती हूँ, जिन्होंने मेरे ऊपर विश्वास किया। यह केवल एक शुरुआत है। मैं नेटफ्लिक्स और एकता मैम की आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे अपनी सच्चाई पूरी दुनिया के लोगों के सामने रखने के लिए यह प्लेटफॉर्म दिया।’’
नेटफ्लिक्स इंडिया की वाईस-प्रेसिडेंट, मोनिका शेरगिल ने कहा, ‘‘लॉक अपः सच या सज़ा लगातार छः हफ्तों तक भारत में सबसे चर्चित शो बना रहा। इस शो और इसके इनमेट्स ने बहुत से फैन बना लिए। यह लाखों दर्शकों की दैनिक चर्चा का हिस्सा बन गया। सोशल मीडिया फीड से लेकर डिनर टेबल की बातचीत और ऑफिसों में वॉटर कूलर के पास हो रही चर्चा तक दर्शकों ने हर दोस्ती, हर टकराव और हर ट्विस्ट में इसे शामिल कर लिया है, जिससे प्रमाणित होता है कि वो लॉक अप के अंदर का ड्रामा और ज़्यादा महसूस करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, “इस सोशल एक्सपेरिमेंट के केंद्र में अपनी सच्चाई को स्वीकार करने और अपनी पहचान पर डटकर खड़े रहने का मूल विचार था। इसमें एक ऐसी ऑथेंटिसिटी देखने को मिली, जिसे दर्शकों ने बहुत पसंद किया। उन्होंने इस लॉक अप में सबसे कठिन और सबसे यादगार परिस्थितियों में आगे बढ़ते रहने के लिए इन सभी इनमेट्स का उत्साह बढ़ाया। मैं श्रेया कालरा को पहला सीज़न जीतने के लिए बधाई देती हूँ। उन्होंने इस शो में हर परिस्थिति में अपनी सच्चाई को स्वीकार करने की हिम्मत दिखाई और उनकी यह हिम्मत दर्शकों को बहुत पसंद आई। हमारे पार्टनर, बालाजी टेलीफिल्म्स लिमिटेड के साथ हमें गर्व है कि हमने एक होमग्रोन रियलिटी फॉर्मेट को आगे बढ़ाया है, जो पिछले 6 हफ्ते तक भारत का जुनून बना रहा। इसने दर्शकों को बहुत आकर्षित किया और यह शो हर दिन उनकी चर्चाओं में बना रहा।’’
क्रिएटर एकता कपूर ने कहा, ‘‘लॉक अप जैसे फॉर्मेट में सरवाईव करना आसान नहीं है। इसमें हर दिन आपके धैर्य, आपके साहस और अपने लिए सच्चा बने रहने की आपकी क्षमता की परीक्षा होती है, जिसे पूरी दुनिया देख रही होती है। दर्शकों ने इसके हर उतार, चढ़ाव और विकास के हर पल को करीब से देखा। इसलिए ऐसा लगता है कि श्रेया को यह जीत मिली नहीं है, बल्कि उसने इसे हासिल किया है। श्रेया लॉक अप में अकेले आई थी। लेकिन जब वह वापस गई, तब उसकी सच्चाई उसके साथ थी। यह शो हमेशा से इसी बारे में था। यह परफेक्शन के बारे में नहीं, बल्कि ईमानदारी के बारे में था। मैं श्रेया, सभी फाईनलिस्ट्स और सभी इनमेट्स को बधाई देती हूँ, जिन्होंने इस सीज़न को यादगार बनाया।’’
इस चैप्टर का अंत हो गया है। पर यह लॉक अपः सच या सज़ा की विरासत की केवल एक शुरुआत है। इस सीरीज ने दिखा दिया है कि रियलिटी एंटरटेनमेंट कैसा हो सकता है – बिल्कुल वास्तविक, दिलचस्प और पूरी तरह से ऑथेंटिक, जिसने हफ्तों तक दर्शकों को बांधकर रखा और लॉक अप की दीवारों से बाहर चर्चा छेड़ दी।
इसके साथ, नेटफ्लिक्स इंडिया भारत और दुनिया भर के दर्शकों के लिए ऐसी नई और दमदार कहानियां लाने के अपने वादे पर कायम है, जो मनोरंजन के साथ-साथ लोगों को सोचने और बातचीत करने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
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