मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सोनी सब का शो हस्तिनापुर के वीर पांडवों और कौरवों की अनकही बचपन की यात्रा को जीवंत कर रहा है, जहाँ हर सबक और हर रिश्ता उनके भविष्य को आकार देता है। गुरु द्रोणाचार्य (जितेन लालवानी) जब युवा राजकुमारों को प्रशिक्षण दे रहे हैं, तभी एक अप्रत्याशित मुलाकात उनके शिक्षक के रूप में सफर के सबसे निर्णायक क्षणों में से एक की परीक्षा लेने वाली है।
आने वाले एपिसोड्स में दर्शकों को देखने मिलेगा कि गुरु द्रोणाचार्य जब पांडवों और कौरवों को प्रशिक्षण दे रहे होते हैं, तब वे अर्जुन (उर्वा सावल्या) की असाधारण निष्ठा और धनुर्विद्या में क्षमता को पहचानते हैं। जैसे ही वे अर्जुन की यात्रा को आकार देना शुरू करते हैं, एक युवा बालक एकलव्य (अर्जुन शुक्ला) आता है और अपनी अद्भुत धनुर्विद्या कौशल से सभी को चकित कर देता है।
गुरु द्रोणाचार्य से गहराई से प्रेरित होकर एकलव्य उनसे शिष्य के रूप में स्वीकार करने का अनुरोध करता है। द्रोणाचार्य युवा धनुर्धर की प्रतिभा और दृढ़ संकल्प से प्रभावित होते हैं, लेकिन एकलव्य का अनुरोध उन्हें एक अप्रत्याशित दुविधा में डाल देता है, जिससे उन्हें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि क्या वे अर्जुन से किए गए वादे के प्रति सच्चे रह सकते हैं।
आगामी ट्रैक के बारे में जितेन लालवानी ने कहाकि, “गुरु द्रोणाचार्य के लिए शिक्षा का अर्थ है प्रतिभा को पहचानना और हर विद्यार्थी को उसका सर्वश्रेष्ठ रूप बनने में मदद करना। एकलव्य का आगमन बेहद महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि वह एक युवा बालक है, जिसमें अद्भुत निष्ठा, विनम्रता और सीखने की सच्ची इच्छा है। साथ ही, द्रोणाचार्य पहले ही अर्जुन में कुछ विशेष देख चुके हैं और उनके प्रति एक ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं। यही इस चरण को इतना रोचक बनाता है। यह केवल शिष्य चुनने की बात नहीं है, बल्कि गुरु द्रोणाचार्य का किरदार निभाने के साथ आने वाली ज़िम्मेदारियों के प्रति सच्चे रहने की भी बात है।”
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