मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सोनी सब का शो यादें दर्शकों के दिलों को लगातार छू रहा है, जहाँ भावनात्मक रिश्तों, हल्के-फुल्के पलों और रोमांचक मेडिकल केसों का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलता है। जब जेबीएमएमसी अस्पताल के डॉक्टरों को लगता है कि उन्होंने सब कुछ देख लिया है। तभी हर नया मरीज एक अनोखे केस के साथ आता है, जो उनकी समझ को चुनौती देता है और उन्हें सामान्य से परे सोचने पर मजबूर करता है। जहाँ डॉ. देव (इक़बाल खान) और उनकी टीम स्क्रीन पर इन मेडिकल पहेलियों को सुलझाते हैं। वहीं लेटेस्ट ट्रैक उन्हें एक अप्रत्याशित चुनौती देता है, जो उन्हें अस्पताल से बाहर निकालकर बॉक्सिंग रिंग में ले जाती है और उनके स्कूल के दिनों की बॉक्सर वाली यादों को फिर से ताज़ा कर देती है।
दिलचस्प बात यह है कि इस सीक्वेंस ने इक़बाल खान के स्कूल के दिनों की यादें ताज़ा कर दीं, जब बॉक्सिंग सिर्फ एक शौक नहीं थी। खेल में हैवीवेट कैटेगरी में ट्रेनिंग लेने के बाद, एक अभिनेता के तौर पर रिंग में लौटना उनके लिए बिल्कुल अलग तरह की चुनौतियाँ लेकर आया। चूँकि, डॉ. देव को एक प्रशिक्षित बॉक्सर जैसा नहीं दिखना था, इसलिए इक़बाल को अपनी नैचुरल इंस्टिंक्ट्स और मूवमेंट्स को जानबूझकर रोकना पड़ा। पॉलिश्ड पंच और फुटवर्क दिखाने के बजाय, उन्हें हर मूव को अनजाना बनाना पड़ा और यही उन्हें एक बेहतरीन अभिनेता साबित करता है।
अपने अनुभव साझा करते हुए, डॉ. देव का किरदार निभा रहे इक़बाल खान ने कहा, “बॉक्सिंग मेरे स्कूल जीवन का एक बड़ा हिस्सा थी। हैवीवेट कैटेगरी में मैंने अनगिनत घंटे ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं में बिताए। इसलिए जब मैंने इस सीक्वेंस के बारे में सुना, तो मुझे लगा कि यह मेरे लिए नैचुरली आसान होगा। लेकिन, जल्दी ही मुझे एहसास हुआ कि बॉक्सिंग सीन को एक्ट करना असली बॉक्सिंग से कहीं ज़्यादा मुश्किल है। आमतौर पर आप मूव्स को और ज़्यादा कॉन्विन्सिंग बनाने की तैयारी करते हैं, लेकिन यहाँ मुझे खुद को रोकना पड़ा और ऐसे परफॉर्म करना पड़ा जैसे किसी ने कभी असली ट्रेनिंग न ली हो। इस सीन के लिए मुझे सचमुच बॉक्सिंग को ‘अनलर्न’ करना पड़ा और यह एक अलग तरह की चुनौती थी, लेकिन एक अभिनेता के तौर पर मैंने इसे बहुत एंजॉय किया।”
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