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ओम्नीवोर और EAAA आल्टरनेटिव्स ने अर्बोरियल में किया 230 करोड़ का निवेश

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। स्पेशलिटी फूड और न्यूट्रास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स टेक्नोलॉजी कंपनी, अर्बोरियल बायोइनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड ने अपने 230 करोड़ रुपये के सीरीज़ ए फंडिंग राउंड को सफलतापूर्वक पूरा करने की घोषणा की। एडलवाइस की आल्टरनेटिव्स शाखा ईएएएए और ओम्नीवोर ने इस फंडिंग राउंड का साथ मिलकर नेतृत्व किया, जिसमें मौजूदा निवेशक रेनमैटर बाय ज़ेरोधा का लगातार समर्थन बना रहा। 

यह ट्रांजैक्शन भारत के स्पेशलिटी फूड इंग्रेडिएंट्स सेक्टर में सबसे बड़े सीरीज़ ए फंडरेज़ में से एक है। अर्बोरियल इस पूंजी का उपयोग अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने, अपनी अनुसंधान और विकास क्षमताओं को मजबूत करने और अगली पीढ़ी के फंक्शनल इंग्रेडिएंट्स के व्यावसायिक उपयोग को तेज करने के लिए करेगी।  

अर्बोरियल ने भारतीय उपभोक्ताओं और ब्रांडों की विशिष्ट पोषण संबंधी, कार्यात्मक, संवेदी और व्यावसायिक आवश्यकताओं के लिए इंग्रेडिएंट सॉल्यूशन विकसित करने पर केंद्रित एक अलग “कॉन्टेक्स्टुअल इनोवेशन” मॉडल बनाया है। इस दृष्टिकोण से सैकड़ों उभरते और नए ब्रांड्स श्रेणी-परिभाषित उत्पाद लॉन्च करने और खाद्य, पेय एवं न्यूट्रास्युटिकल बाजारों में तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम हो सके हैं। 

कंपनी का एकीकृत इंग्रेडिएंट टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म इंग्रेडिएंट इंजीनियरिंग, प्रोसेस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, फॉर्मूलेशन साइंस और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग को एक साथ लाता है। अर्बोरियल ने अगली पीढ़ी के प्रोटीन्स, कोको-आधारित इंग्रेडिएंट्स, प्राकृतिक ज़ीरो-कैलोरी स्वीटनर्स और फंक्शनल फाइबर्स में प्रॉपरायटरी इंग्रेडिएंट्स विकसित कर उन्हें व्यावसायिक रूप से पेश किया है, जबकि कई अन्य इंग्रेडिएंट प्लेटफॉर्म वर्तमान में विकास के चरण में हैं। 

सालाना आधार पर अपनी वृद्धि को दोगुने से अधिक करते हुए, अर्बोरियल के “बेटर-फॉर-यू” इंग्रेडिएंट्स के पोर्टफोलियो और इसके “इंग्रेडिएंट-फर्स्ट इनोवेशन” मॉडल ने पिछले 18 महीनों के दौरान 1,100 से अधिक कंज्यूमर ब्रांड्स और न्यूट्रास्युटिकल निर्माताओं के बीच 300 से अधिक उत्पाद लॉन्च करने में मदद की है। 

इस उपलब्धि के बारे में अर्बोरियल बायोइनोवेशंस की सह-संस्थापक और सीईओ स्वाति पांडे ने कहा, “यह फंडिंग साबित करती है कि हम सही रास्ते पर चल रहे हैं। इससे हमें ऐसे साफ-सुथरे और विज्ञान द्वारा समर्थित समाधान तैयार करने में मदद मिलेगी, जो दुनिया में खाने-पीने और पोषण से जुड़ी बड़ी समस्याओं को दूर कर सकें। ये नए-नए समाधान बन तो भारत में रहे हैं, लेकिन इनका फायदा पूरी दुनिया के लोगों को मिल रहा है।” 

अर्बोरियल बायोइनोवेशंस के सह-संस्थापक और सीओओ मनीष चौहान ने कहा, “यह फंडिंग अर्बोरियल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। हमारी शुरुआत आईपी वाली इंग्रेडिएंट्स तकनीकें बनाने से हुई थी और आज हम विभिन्न श्रेणियों में इंग्रेडिएंट्स में नई-नई खोजें करके बड़े बदलाव ला रहे हैं। ईएएएए, ओम्नीवोर और रेनमैटर का हम पर भरोसा जताना यह दिखाता है कि हमारी कंपनी मजबूत है और हमारे सामने आगे बढ़ने के बेहतरीन मौके हैं। इस पैसे से हम साइंस, मैन्युफैक्चरिंग, सही टैलेंट और नए आविष्कारों पर और ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। साथ ही, हम दुनिया के बड़े फूड और न्यूट्रास्युटिकल ब्रांड्स के लिए खास इंग्रेडिएंट्स तैयार कर सकेंगे। हम भारत से अर्बोरियल को एक ऐसी कंपनी बनाने के लिए बेहद उत्साहित हैं, जिसे पूरी दुनिया में सम्मान मिले।” 

ईएएएए (EAAA)आल्टरनेटिव्स के प्राइवेट इक्विटी मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष अग्रवाल ने कहा, “अर्बोरियल में यह निवेश हमारे फंड की रणनीति के मूल दर्शन को दर्शाता है। ऐसे व्यवसायों का समर्थन करना जिनमें श्रेणी में अग्रणी बनने की क्षमता हो। हमारे ‘डिस्कवरी फंड II’ से पहले निवेश के रूप में, हम अर्बोरियल के अगली पीढ़ी के यीस्ट प्रोटीन उत्पादों की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को लेकर विशेष रूप से उत्साहित हैं। हम स्वाति और मनीष के साथ काम करने के लिए तत्पर हैं, क्योंकि उन्होंने आरएंडडी आधारित न्यूट्रास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स में श्रेणी का नेतृत्व करना जारी रखा है।” 

ओम्नीवोर के मैनेजिंग पार्टनर जिनेश शाह ने कहा, “क्लीन-लेबल और फंक्शनल फूड्स को अपनाने के लिए ऐसे विशेष रूप से तैयार किए गए इंग्रेडिएंट्स की आवश्यकता होती है, जो स्वाद या मार्जिन से समझौता किए बिना बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हों। अर्बोरियल स्थानीय स्तर पर विकसित फॉर्मूलों के साथ बाजार की इस बड़ी कमी को पूरा करता है। स्वीटनर के विकल्पों से लेकर नए यीस्ट प्रोटीन्स और कोलाजन तक, अर्बोरियल का आरएंडडी स्टैक उन्हें स्वास्थ्य और वेलनेस ब्रांड्स की अगली लहर को सशक्त बनाने के लिए तैयार करता है।” 

रेनमैटर के इंवेस्टमेंट्स हेड दिनेश पई ने कहा, “हम अक्सर यह शिकायत करते हैं कि भारत में शोध एवं अनुसंधान के लिए सही पैसा नहीं मिलता। दूसरे कारणों के अलावा, हम स्वाति और मनीष का साथ इसलिए देना चाहते थे ताकि भारत में ही खाने-पीने की चीज़ों पर रिसर्च करने वाली एक विश्वस्तरीय टीम बन सके। हमें पूरा भरोसा है कि उनके पास इस चुनौती से निपटने का मजबूत हौसला है। रेनमैटर का काम ही ऐसे बड़े और साहसी कदमों का साथ देना है, और यह भी इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है।”