भूखंड आवंटन से निवेश तक तेज़ी, मंत्री नन्दी ने दिए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश
लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने प्रयासों को और गति देते हुए गुरुवार को इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य मंत्री औद्योगिक विकास जसवंत सिंह सैनी, अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार, इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में राज्य में औद्योगिक विकास और निवेश की प्रगति की समीक्षा करते हुए श्री नन्दी ने निवेशकों के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में सर्वे के बाद निरस्त किए गए औद्योगिक भूखंडों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही राज्य के औद्योगिक भूमि बैंक के विस्तार, सिंगल विंडो सिस्टम अधिनियम को शीघ्र स्वीकृति दिलाने तथा बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) को राज्य के पहले निर्माण क्षेत्र के रूप में तेजी से विकसित करने की प्रगति की भी समीक्षा की। मंत्री ने आगामी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के लिए चिन्हित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर धरातल पर उतारने के निर्देश भी दिए।

बैठक में विनिर्माण, भूमि अधिग्रहण, निर्यात और निवेश सुविधा से जुड़े प्रमुख संकेतकों की विस्तृत समीक्षा की गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान फैक्ट्री अधिनियम के तहत 4,860 नई इकाइयों का पंजीकरण हुआ, जिससे 3 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए। यह पिछले वर्ष की तुलना में 33 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करता है।
औद्योगिक विकास प्राधिकरणों ने इस अवधि में 15,610 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया, जो पिछले तीन वर्षों में 133 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। इसमें से 2,671 एकड़ भूमि का आवंटन औद्योगिक उपयोग के लिए किया जा चुका है। वहीं, राज्य का कुल निर्यात ₹2.01 लाख करोड़ के स्तर पर पहुँच गया, जो उत्तर प्रदेश की निरंतर मजबूत होती औद्योगिक प्रगति को रेखांकित करता है।
बैठक के दौरान वन ट्रिलियन डॉलर (OTD) इकोनॉमी सेल और इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से निवेश प्रस्तावों और विभिन्न क्षेत्रों में हुए समझौता ज्ञापनों की प्रगति प्रस्तुत की। साथ ही आगामी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए तैयार परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा भी की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने कहा कि निवेश परियोजनाओं की त्रैमासिक समीक्षा सुनिश्चित की जाए तथा समयबद्ध क्रियान्वयन और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए उनकी तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने ओटीडी सेल और इन्वेस्ट यूपी को ₹500 करोड़ से अधिक के बड़े निवेश प्रस्तावों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) और वित्तीय सेवा क्षेत्र को भी सशक्त बनाने पर जोर दिया, ताकि युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले और बेहतर वेतन वाले रोजगार सृजित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है और 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसे और गति देने की आवश्यकता है।

इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री आनंद ने राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए किए गए हालिया सुधारों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ‘निवेश मित्र 3.0’ के शुभारंभ के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वीकृतियों और भवन उपविधि के अनुमोदनों में निजी एजेंसियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। इस पहल से प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सरल हुई हैं, समय सीमा में उल्लेखनीय कमी आएगी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति मिली है।
श्री आनंद ने बताया कि इन्वेस्ट यूपी द्वारा जल्द ही टेक्सटाइल, लेदर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित ‘शेत्र-विशिष्ट निवेश सम्मेलन’ आयोजित करने की योजना है। इन सम्मेलनों के माध्यम से राज्य में बड़े पैमाने पर नया निवेश आकर्षित होगा, जिससे उत्तर प्रदेश देश के सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा।
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