लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने भारतीय वायुसेना के लिए भारत के अगली पीढ़ी के एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी आत्मनिर्भर भारत के प्रति देश की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।
इस समझौते के तहत अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और डीआरडीओ भारतीय वायुसेना के लिए छह रिवाइज एयरबस A321 विमानों पर एयरबोर्न मिशन सिस्टम का संयुक्त रूप से विकास, निर्माण और एकीकरण करेंगे। इस कार्यक्रम में 30 वर्षों तक इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) और तकनीकी सहायता भी शामिल है। AEW&C-MKII को 2032-33 तक भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने की योजना है।

यह सहयोग रक्षा अनुसंधान और मिशन सिस्टम में डीआरडीओ की विशेषज्ञता को एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, सिस्टम इंटीग्रेशन और लाइफसाइकल सपोर्ट में अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की क्षमताओं के साथ जोड़ता है। इसके माध्यम से भारत के सबसे एडवांस स्वदेशी एयरबोर्न सर्विलांस प्लेटफॉर्म में से एक का विकास होगा।
AEW&C विमानों को अक्सर “आसमान की आंखें” कहा जाता है। मॉडर्न एरियल वारफेयर में इन्हें सबसे महत्वपूर्ण सामरिक प्लेटफॉर्म में माना जाता है। ये लंबी दूरी तक निगरानी, संभावित खतरों का शुरुआती चरण में पता लगाने और रियल-टाइम कमांड एंड कंट्रोल की क्षमता प्रदान करते हैं, जिससे तेज़ और बेहतर रणनीतिक निर्णय लिए जा सकते हैं। AEW&C-MKII भारतीय वायुसेना की सिचुएशनल अवेयरनेस, फोर्स कोऑर्डिनेशन और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगा।

इस कार्यक्रम के साथ अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस भारत की पहली निजी कंपनी बन गई है, जिसे इस स्तर और जटिलता वाले एयरबोर्न मिशन प्लेटफॉर्म के विकास, एकीकरण और लाइफसाइकल सपोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वर्तमान में केवल पांच देशों – संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, इज़राइल, चीन और स्वीडन ने स्वदेशी AEW&C क्षमता विकसित की है। AEW&C-MKII के साथ भारत भी इस विशिष्ट समूह में शामिल होगा। इस प्लेटफॉर्म को भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जाएगा। जो देशभर में निगरानी, वायु रक्षा और ऑपरेशन रिसोर्स को रियल-टाइम में जोड़ने वाला कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क है। यह Integration and rapid decision-making capability, निरन्तर बैटलस्पेस कोऑर्डिनेशन और बेहतर ऑपरेशनल रिस्पॉन्स के माध्यम से भारत की वायु रक्षा को और सशक्त बनाएगा।
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