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SRMU : दीक्षांत समारोह में 405 मेधावियों को पदक और 7,519 छात्रों को मिली डिग्री

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (एसआरएमयू) का दीक्षांत समारोह बुद्धवार को गोमती नगर स्थित स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मास ऑडिटोरियम में भव्यता के साथ आयोजित किया गया। समारोह में कुल 7,519 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 405 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए। जिनमें 232 स्वर्ण पदक, 165 रजत पदक और 8 कुलाधिपति एवं प्रति-कुलाधिपति पदक शामिल हैं। 

समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) भूषण पटवर्धन (कुलाधिपति, डेक्कन कॉलेज, डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी, पुणे एवं राष्ट्रीय अनुसंधान प्रोफेसर, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार) एवं विशिष्ट अतिथि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् के पूर्व महानिदेशक एवं पूर्व राजदूत अखिलेश मिश्रा उपस्थित थे।

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति इं. पंकज अग्रवाल, प्रति-कुलपति इं. पूजा अग्रवल, कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी एवं शैक्षणिक सलाहकार आरुषी अग्रवाल तथा  अतिथियों की उपस्थिति में प्रदान किये गए पदकों में कुलाधिपति पदक एवं प्रति-कुलाधिपति पदक सबसे महत्वपूर्ण रहा। यह स्वर्ण एवं रजत पदकों से पृथक विश्वविद्यालय के विशिष्ट संस्थागत अलंकरण हैं, जो उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि, अनुकरणीय व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता तथा समग्र उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर प्रदान किए जाते हैं।

इस वर्ष का एक विशेष और प्रेरणादायी पहलू यह रहा कि वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक के सभी आठों प्रतिष्ठित पदक छात्राओं ने अपने नाम किए। कुलाधिपति पदक से सत्र 2024-25 की आद्या शर्मा (इंटीग्रेटेड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन–बैचलर ऑफ लॉज, ऑनर्स), सत्र 2023-24 की खुशी बुद्धराज (बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी–क्लाउड कंप्यूटिंग एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), सत्र 2022-23 की क्रति जैन (बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी–बायोटेक्नोलॉजी) तथा सत्र 2021-22 की मुस्कान बुद्धराज (बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी–कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग) को सम्मानित किया गया।

जबकि प्रति-कुलाधिपति पदक से सत्र 2024-25 की प्रणीता यादव (मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी– बायोटेक्नोलॉजी), सत्र 2023-24 की सौम्या सिंह (मास्टर ऑफ साइंस-केमिस्ट्री), सत्र 2022-23 की श्रेया श्रीवास्तव (मास्टर ऑफ आर्ट्स–सोशियोलॉजी) तथा सत्र 2021-22 की राहत परवीन (मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी–बायोटेक्नोलॉजी) को सम्मानित किया गया। इन छात्राओं की उपलब्धियों ने न केवल विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि प्रतिभा, समर्पण और उत्कृष्टता के क्षेत्र में बेटियां निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।

विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की परंपरा भी निरंतर सशक्त हो रही है। सत्र 2021-22 में 52 विद्यार्थियों को गोल्ड तथा 43 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया। सत्र 2022-23 में यह संख्या बढ़कर क्रमशः 55 गोल्ड और 40 सिल्वर मेडल रही। सत्र 2023-24 में 61 विद्यार्थियों ने गोल्ड तथा 45 विद्यार्थियों ने सिल्वर मेडल अर्जित किए। वहीं, सत्र 2024-25 में 64 विद्यार्थियों को गोल्ड एवं 37 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल प्रदान किए जाएंगे। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट शिक्षण व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण अकादमिक वातावरण तथा विद्यार्थियों की निरंतर मेहनत और प्रतिभा का प्रमाण है।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) भूषण पटवर्धन ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्रदान करने का अवसर नहीं, बल्कि वर्षों के परिश्रम, अनुशासन और ज्ञान-साधना का उत्सव है। उन्होंने “रामस्वरूप” नाम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनाने, मानसिक गुलामी से मुक्ति और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एसआरएमयू के स्नातक नैतिक मूल्यों, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को मार्गदर्शक बनाकर समाज के हर वर्ग का जीवन बेहतर बनाएंगे।

रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी ने सभी का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक की चार वर्षीय विकास यात्रा का प्रगति आख्या प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस अवधि में विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक विस्तार, गुणवत्ता और संस्थागत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या 4,764 थी, जो वर्ष 2024-25 तक बढ़कर 10,444 हो गई है। वर्तमान में विश्वविद्यालय में लगभग 12 हजार विद्यार्थी विभिन्न संकायों एवं पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं। 

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की यह निरंतर बढ़ती संख्या विश्वविद्यालय के प्रति समाज के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि के साथ विश्वविद्यालय की जिम्मेदारियां भी समान रूप से बढ़ी हैं। हमारा उद्देश्य केवल प्रवेश संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रभावी मार्गदर्शन, शैक्षणिक सहयोग, समुचित परामर्श, उत्कृष्ट आधारभूत सुविधाएं तथा मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का संकल्प प्रत्येक विद्यार्थी को ऐसा शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना है, जो उसे ज्ञान, कौशल, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता से समृद्ध करते हुए गरिमापूर्ण एवं सफल जीवन की ओर अग्रसर करे।

श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति इं. पंकज अग्रवाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्रदान करने का अवसर नहीं, बल्कि ज्ञान, जिम्मेदारी और सामाजिक दायित्व के साथ जीवन की नई यात्रा प्रारंभ करने का महत्वपूर्ण क्षण है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि राष्ट्र निर्माण, समाज के उत्थान और मानवता की सेवा के लिए भी समर्पित रहें। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी एवं प्रौद्योगिकी-प्रधान युग में सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि नवाचार, नैतिकता, संवेदनशीलता और सतत सीखने की प्रवृत्ति से प्राप्त होती है। कुलाधिपति ने कहा कि श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे सक्षम, उत्तरदायी और मूल्यनिष्ठ युवा तैयार करना है, जो वैश्विक चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करते हुए भारत के विकास में सार्थक योगदान दें। 

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने सपनों को साकार करने के साथ-साथ अपने माता-पिता, शिक्षकों, विश्वविद्यालय और देश का नाम भी गौरवान्वित करें। अंत में उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य, सफल करियर और सुखद जीवन की कामना करते हुए उन्हें निरंतर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहने का संदेश दिया।

विशिष्ट अतिथि अखिलेश मिश्रा ने तैत्तिरीय उपनिषद् का उल्लेख करते हुए गुरु के शिष्यों को दिए गए संदेश को दोहराया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सत्य बोलें, धर्म (कर्तव्य एवं सदाचार) का पालन करें, निरंतर स्वाध्याय करें, समाज की उन्नति में योगदान दें, सत्य और धर्म से कभी न विचलें तथा समृद्धि और लोकमंगल के लिए सदैव प्रयत्नशील रहें। उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र केवल अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़ा है और युवाओं पर राष्ट्र के भविष्य की जिम्मेदारी है। 

उन्होंने कहा कि कहा दीक्षांत समारोह ज्ञान, संस्कार एवं उत्तरदायित्व से परिपूर्ण नई यात्रा का शुभारंभ है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विश्वविद्यालय के उपाधिप्राप्त विद्यार्थी उत्कृष्टता, नैतिकता, संवेदनशीलता एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे और विश्व पटल पर भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेंगे।

दीक्षांत समारोह में मंच संचालन परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) आकांक्षा निगम ने किया। इस मौके पर सभी संकायों के डीन, संस्थानों के डायरेक्टर, विभागों के विभागाध्याक्ष और शिक्षक उपस्थित रहे।