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उर्वरक, बीज और मानसून की स्थिति की कृषि मंत्रालय ने की समीक्षा, संवेदनशील जिलों पर रहेगी विशेष नजर

नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को कृषि मंत्रालय की साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में खरीफ फसलों की बुवाई की प्रगति, मानसून की स्थिति, संभावित अल नीनो प्रभाव, उर्वरक और बीजों की उपलब्धता तथा जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक में अधिकारियों को वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने और राज्यों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए और वितरण व्यवस्था में किसी भी तरह की कमी को तत्काल दूर किया जाए।बैठक के बाद एक बयान में कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि राज्यों के साथ नियमित समन्वय के माध्यम से आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। कृषि मंत्री ने कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य सरकारों से जमीनी स्तर की जानकारी लेकर किसानों तक योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाने को कहा।चौहान ने दलहन, तिलहन और कपास मिशनों को राज्यों के साथ नियमित साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित करने तथा फील्ड स्तर से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।मंत्रालय के अनुसार, 17 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई का कुल क्षेत्रफल 658.19 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में बुवाई क्षेत्र में कमी आई है, लेकिन कई राज्यों में धान, दलहन और अन्य फसलों की बुवाई में अच्छी प्रगति देखी गई है।बैठक में बताया गया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के शेष हिस्सों को कवर करते हुए 9 जुलाई 2026 तक पूरे देश में अपना विस्तार पूरा कर लिया है। सामान्य स्थिति में मानसून 8 जुलाई तक देशभर में पहुंचता है, ऐसे में इस वर्ष इसका विस्तार सामान्य तिथि से केवल एक दिन बाद पूरा हुआ।मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक जून से 15 जुलाई 2026 के बीच देश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में जहां सामान्य वर्षा 294.2 मिमी होनी चाहिए थी, वहीं वास्तविक वर्षा 227 मिमी रही। पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सबसे अधिक 36 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई।कृषि मंत्रालय ने बताया कि वर्षा की स्थिति, फसल स्वास्थ्य और बुवाई की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके लिए देश के 270 संवेदनशील जिलों की स्थिति की समीक्षा की गई है। अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर राज्यों के साथ मिलकर कृषि प्रबंधन और आकस्मिक योजनाएं लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।बैठक में खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों और बीजों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई।