लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे परिवारों के बीच दीर्घकालिक वित्तीय योजना और भविष्य के लिए व्यवस्थित निवेश की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हेलिओस म्यूचुअल फंड ने लखनऊ विश्वविद्यालय में “रिफ्रेमिंग जेनेरेशनल वेल्थ –# परंपरा वही सोच नई” विषय पर एक निवेशक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों के लिए आयोजित इस विशेष सत्र का उद्देश्य उनके समाज निर्माण में योगदान का सम्मान करते हुए उन्हें ऐसी वित्तीय विरासत तैयार करने के प्रति जागरूक करना था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मूल्य सृजित करती रहे।
इस अवसर पर हेलिओस इंडिया के जोनल हेड (उत्तर) अमन चड्ढा ने कहा, “लंबे समय तक परिवारों ने अपनी विरासत को सोना, जमीन और अन्य भौतिक संपत्तियों तक सीमित करके देखा है। इन परिसंपत्तियों का अपना महत्व हमेशा रहेगा, लेकिन आज के समय में ऐसी वित्तीय विरासत की आवश्यकता है जो समय के साथ बढ़ने की क्षमता रखे, महंगाई को मात देने वाले संभावित रिटर्न दे, जीवन के अलग-अलग चरणों की जरूरतों के अनुरूप हो और अगली पीढ़ी तक आसानी से पहुंचाई जा सके। इस पहल के माध्यम से हमारा प्रयास शिक्षकों को वित्तीय योजना पर समय रहते संवाद शुरू करने और सोच-समझकर निवेश संबंधी निर्णय लेने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य भी सुरक्षित हो सके।”
कार्यक्रम के दौरान चर्चा का केंद्र एक महत्वपूर्ण प्रश्न रहा—क्या आज के समय में केवल संपत्ति को सुरक्षित रखना ही पर्याप्त है? प्रतिभागियों ने इस बात पर विचार साझा किया कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, औसत आयु में वृद्धि तथा बदलती पारिवारिक संरचना ने वित्तीय योजना के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। उदाहरणों के माध्यम से बताया गया कि पिछले एक दशक में स्कूलों की फीस लगभग तीन गुना, उच्च शिक्षा की लागत तीन से चार गुना और अस्पतालों में भर्ती का खर्च लगभग पांच गुना तक बढ़ चुका है। ऐसे परिदृश्य में केवल बचत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।
चर्चा के अगले चरण में ‘विरासत’ की बदलती अवधारणा पर विस्तार से विचार किया गया। प्रतिभागियों ने माना कि संपत्ति, सोना और पैतृक धरोहर आज भी भावनात्मक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। लेकिन आधुनिक दौर में विरासत का अर्थ केवल स्वामित्व तक सीमित नहीं रह गया है। वास्तविक विरासत वह है, जिसमें समय के साथ बढ़ने की क्षमता हो, आवश्यकता पड़ने पर जिसे आसानी से नकदी में बदला जा सके और जिसे अगली पीढ़ी तक सरलता से हस्तांतरित किया जा सके। इस संवाद ने प्रतिभागियों को संपत्ति को केवल सुरक्षित रखने के बजाय उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए निरंतर मूल्य सृजित करने वाले माध्यम के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया।
देशभर में वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने की अपनी पहल के तहत आयोजित इस निवेशक जागरूकता कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि म्यूचुअल फंड जीवन के विभिन्न चरणों में इस नई सोच वाली विरासत के निर्माण में किस प्रकार सहायक हो सकते हैं। प्रतिभागियों ने शुरुआती उम्र से नियमित निवेश की आदत विकसित करने, बच्चों की शिक्षा और सेवानिवृत्ति जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए निवेश की योजना बनाने तथा सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) के माध्यम से नियमित आय प्राप्त करने जैसे विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
साथ ही, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और चक्रवृद्धि (Compounding) की शक्ति के माध्यम से लंबे समय में संपत्ति निर्माण की संभावनाओं को भी विस्तार से समझाया गया। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि एक मजबूत और स्थायी वित्तीय विरासत का निर्माण जल्दी शुरुआत करने, नियमित निवेश बनाए रखने और निवेश को पर्याप्त समय देने से ही संभव है।
Telescope Today | टेलीस्कोप टुडे Latest News & Information Portal