लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। कलर्स का शो ‘बरेली के बच्चन’ अपनी मज़ेदार कॉमेडी, दिल छू लेने वाले पारिवारिक रिश्तों और देसी अफरा तफरी से दर्शकों को खूब भा रहा है। दर्शकों का मनोरंजन जारी रखते हुए, शो की स्टारकास्ट प्रविष्ट मिश्रा, रमनीक कटारिया, अंश मनुजा और सचिन जीत सिंह लखनऊ पहुंचे। ताकि उन्हें मिल रहे ज़बरदस्त प्यार का जश्न मनाया जा सके। खासकर उस राज्य से, जिसकी संस्कृति और जीवनशैली ने शो की दुनिया को प्रेरित किया है।
उत्तर प्रदेश की परंपराओं, अपनापन और परिवारिक जुड़ाव से भरा यह शो आम भारतीय परिवारों की झलक दिखाता है। जहाँ हंसी मज़ाक हर घर में गूंजता है और रिश्ते ज़िंदगी की मुश्किलों पर जीत हासिल करते हैं। लखनऊ का यह दौरा शो के लिए एक भावनात्मक होमकमिंग रहा, जिसने बच्चन परिवार की आत्मा को उन दर्शकों के और करीब ला दिया जो इसकी संस्कृति, भाषा और जड़ों को तुरंत पहचान लेते हैं।

शो ‘बरेली के बच्चन’ की कहानी बच्चन परिवार की ज़िंदगी पर आधारित है, जिसका अनोखा ऑल मेल हाउसहोल्ड दोस्ती, मज़ेदार घटनाओं और जुगाड़ से चलता है। कृष्णा (प्रविष्ट) अचानक संगम (रमनीक) को परिवार की बहू बनाकर घर ले आता है, यह सोचकर कि यह सिर्फ एक अस्थायी इंतज़ाम है। उसे अंदाज़ा नहीं होता कि यह मासूम सा फैसला सबकी ज़िंदगी बदल देगा और पूरे मोहल्ले को उत्सुक कर देगा, साथ ही परिवार के लिए एक नया भावनात्मक और मनोरंजक अध्याय शुरू करेगा।
संगम के ससुर जब नवविवाहितों के लिए भव्य रिसेप्शन रखने की ज़िद करते हैं, तो कृष्णा और संगम मुश्किल में पड़ जाते हैं क्योंकि दोनों जानते हैं कि उनकी शादी सिर्फ एक दिखावा है। अब सवाल यह है कि क्या बच्चन परिवार समाज की नज़रों का सामना कर पाएगा या फिर संगम को इस नकली रिश्ते को रिसेप्शन में निभाना पड़ेगा?

लखनऊ दौरे के बारे में प्रविष्ट मिश्रा ने कहा, “मैं दर्शकों का शुक्रगुज़ार हूँ जिन्होंने ‘बरेली के बच्चन’ पर इतना प्यार बरसाया और हमारी पूरी टीम की मेहनत को सार्थक बनाया। लंबे समय तक मेरा किरदार कृष्णा अपनी अचानक हुई शादी को लेकर परेशान रहा, लेकिन अब उसे यकीन है कि सब कुछ धीरे धीरे ठीक हो जाएगा, भले ही संगम इतना आशावादी नहीं है। उसकी गलतफहमियाँ अब बेहद मज़ेदार और चुटीले अंदाज़ में टूटने वाली हैं और यही इस ट्रैक को रोमांचक बनाता है। हम भारतीय अक्सर ‘लोग क्या कहेंगे’ में उलझे रहते हैं और यह ट्रैक दिखाता है कि बच्चन परिवार इसे कैसे संभालता है। अपने होम स्टेट के शहर लखनऊ में शो की आत्मा को सेलिब्रेट करना मेरे लिए बेहद खास अनुभव है। इस राज्य के परिवारों का हमारे बच्चन परिवार से जुड़ाव देखना मेरे लिए बहुत बड़ी सौगात है।”

शो के बारे में अपने विचार साझा करते हुए, रमनीक कटारिया ने कहा, “संगम बहू बनकर बच्चन परिवार में आती है। यह सोचकर कि वह सिर्फ एक रात रुकेगी, लेकिन वहाँ बिताया हर पल उसे ऐसे अनुभव देता है जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। वह एक ऐसे परिवार को समझने की कोशिश कर रही है जो उसके लिए बिल्कुल नया है और यही इस सफर की खूबसूरती है। हंसी मज़ाक और अफरा तफरी के बीच जो चीज़ सबसे ज़्यादा सामने आती है, वह हैं रिश्ते, भावनाएँ और अपनापन, जो इस कहानी को दर्शकों के लिए रिलेटेबल बनाते हैं।”
उन्होंने कहा, “लखनऊ का दौरा यादगार रहा क्योंकि इस शहर की गर्माहट, संस्कृति और अपनापन वही एहसास दिलाते हैं जिन पर ‘बरेली के बच्चन’ की कहानी टिकी है। शो के लिए मिल रहे प्यार को ऐसे शहर में सेलिब्रेट करना बेहद मायने रखता है, जो हमारी कहानी की आत्मा और मूल्यों को दर्शाता है। मुझे उम्मीद है कि दर्शक इस परिवार की शरारतों और किस्सों से यूँ ही मनोरंजन पाते रहेंगे।”

शो के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए, अंश मनुजा ने कहा, “‘बरेली के बच्चन’ की कहानी अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुँच गई है। मेरा किरदार सतलुज बच्चन परिवार का एंग्री यंग मैन है, जो सच को बिना मीठा किए सामने रखता है, चाहे वह कितना भी चुभे। यही वजह है कि उसका रिश्ता कृष्णा के साथ देखने लायक है। कृष्णा वहाँ उम्मीद देखता है जहाँ सतलुज हकीकत देखता है, और यही दोनों के बीच का लगातार खींचतान दर्शकों के दिल को छू गया है। लखनऊ में लोगों को इस रिश्ते की झलक दिखाना और शो की सफलता का जश्न मनाना मेरे लिए शानदार अनुभव रहा। मैं कानपुर से हूँ और उत्तर प्रदेश मेरा होम स्टेट है, इसलिए ‘बरेली के बच्चन’ को अपने राज्य में लाना मेरे लिए बेहद भावुक पल था।”
पने होमटाउन जाने के बारे में बात करते हुए, सचिन जीत सिंह ने कहा, “ज़िंदगी का खूबसूरत तरीका है कि सब सर्कल पूरा हो जाता है। लखनऊ का लड़का होने के नाते अपने शहर में उस शो के साथ लौटना, जिसे इतना प्यार मिला है, मेरे लिए बेहद खास है। मेरा किरदार ‘माही’ ऐसा है जिससे जेन ज़ी दर्शक तुरंत जुड़ जाते हैं। वह एक युवा है जो सोशल मीडिया में डूबा हुआ है, अपने दरवाज़े से बाहर की दुनिया से वाकिफ है, अपनी राय रखता है और बिना झिझक अपनी बात कहता है। अपने शहर में बच्चन परिवार को मिला प्यार देखना मैं कभी नहीं भूलूँगा। मैं आभारी हूँ कि हमारी संस्कृति से जुड़ी यह कहानी इतने दिलों में जगह बना पाई।”
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