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लखनऊ में जॉपलिंग रोड पर मुख्तार अंसारी से मुक्त कराई जमीन पर नया बखेड़ा, LDA को सिंचाई विभाग की नोटिस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके जॉपलिंग रोड पर एक बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। माफिया मुख्तार अंसारी के कब्जे से मुक्त कराई गई बेशकीमती जमीन पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) द्वारा विकसित की गई ‘सरदार वल्लभभाई पटेल आवासीय योजना’ को सिंचाई विभाग ने अवैध घोषित कर दिया है।सिंचाई विभाग के शारदा नहर खंड ने एक कड़ा नोटिस जारी करते हुए परिसर को एक सप्ताह के भीतर खाली करने का सख्त निर्देश दिया है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि कब्जा नहीं हटा गया, तो विभाग खुद बुलडोजर चलाकर निर्माण को ध्वस्त कर देगा।सिंचाई विभाग की इस अचानक कार्रवाई से आवंटियों में खलबली मच गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि कागजी तौर पर आवंटन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है या अंतिम चरण में है, पर अभी तक किसी ने भी इन फ्लैटों में गृह प्रवेश नहीं किया है। जमा पूंजी लगाने वाले लोग इस विवाद से बेहद डरे हुए हैं।स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पूरी योजना सरकारी संस्था ‘लखनऊ विकास प्राधिकरण’ (एलडीए) द्वारा विकसित की गई है। उन्हें पूरी वैधता और कानूनी प्रक्रिया का पालन कर यहां आवास उपलब्ध कराए गए थे। ऐसे में दो सरकारी विभागों की लड़ाई का असर उन पर नहीं होना चाहिए।सिंचाई विभाग का दावा है कि जॉपलिंग रोड स्थित जिस खसरा संख्या पर यह आवासीय कॉलोनी बनी है, वह भूमि असल में ‘हैदर कैनाल’ (नहर) के बहाव क्षेत्र और उसकी सुरक्षा पट्टी (डूब क्षेत्र) में आती है। नियमों के मुताबिक, नहर की सुरक्षा पट्टी या फ्लड प्लेन पर कोई भी निर्माण वर्जित है।विभाग का आरोप है कि एलडीए ने इस निर्माण के लिए न तो सिंचाई विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया और न ही जमीन का नियमानुसार हस्तांतरण किया।इस पूरे मामले में विभागीय कार्यप्रणाली और टाइमिंग पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल है कि जब इस जमीन पर माफिया मुख्तार अंसारी और उसके गुर्गों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे अवैध कब्जा कर रखा था, तब सिंचाई विभाग कई दशक तक क्यों खामोश रहा?दरअसल, सरकारी विभागों के बीच तालमेल न होने की वजह से ऐसी स्थिति बनती है। अब देखना है कि दोनों विभाग इस मुद्दे को कितनी जल्दी सुलझाते हैं, ताकि आवंटियों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।