भारत-अमेरिका में महाडील की उल्टी गिनती: 1 जून से दिल्ली में जुटेगा दिग्गजों का जमावड़ा, क्या टैरिफ और रक्षा समझौतों पर लगेगी फाइनल मुहर?

New Delhi : भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों के इतिहास में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। दोनों महाशक्तियों के बीच लंबे समय से लंबित पड़ी ट्रेड डील को लेकर बातचीत अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। अब केवल इस ऐतिहासिक समझौते पर आधिकारिक मुहर लगना बाकी है। इसी कड़ी में दोनों देशों के शीर्ष और वरिष्ठ अधिकारी 1 जून से देश की राजधानी नई दिल्ली में चार दिनों की मैराथन बैठक के लिए जुटने जा रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Pact) को फाइनल टच दिया जाएगा और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) की दिशा में कदम आगे बढ़ाए जाएंगे।दिल्ली में महामंथन: जानिए कौन करेगा भारत और अमेरिकी डेलिगेशन का नेतृत्ववाणिज्य मंत्रालय से आ रही खबरों के मुताबिक, इस बेहद संवेदनशील और बड़े व्यापारिक समझौते में भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करने जा रहे हैं। वहीं, सात समंदर पार से आ रहे अमेरिकी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की कमान अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के हाथों में होगी। चार दिनों तक चलने वाली इस बैठक के एजेंडे में कई कद्दावर और रणनीतिक विषय शामिल किए गए हैं। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, मुख्य रूप से इन छह मुद्दों पर दोनों देश आमने-सामने बैठकर नीति तय करेंगे:मार्केट एक्सेस (बाजार पहुंच): एक-दूसरे के बाजारों में उत्पादों को आसानी से पहुंचाना।नॉन-टैरिफ मेजर्स: गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करना ताकि व्यापार में सुगमता आए।कस्टम्स और ट्रेड फैसिलिटेशन: सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाना।इन्वेस्टमेंट इंसेंटिव: दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन नीतियां।इकोनॉमिक सिक्योरिटी: आर्थिक सुरक्षा के मोर्चे पर एक-दूसरे का सहयोग करना।सप्लाई चेन पार्टनरशिप: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाना।दोनों देशों के अधिकारी पहले चरण के अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के साथ-साथ लॉन्ग-टर्म यानी दीर्घकालिक व्यापक व्यापार समझौते के कानूनी और नीतिगत ढांचे पर भी गंभीर चर्चा करेंगे।फरवरी में बनी थी रूपरेखा, पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से टल गई थी वार्ताआपको बता दें कि भारत और अमेरिका ने इसी साल 7 फरवरी 2026 को एक संयुक्त बयान जारी कर इस अंतरिम व्यापार समझौते की मजबूत रूपरेखा तैयार कर ली थी। इसके तहत दोनों देश चरणबद्ध तरीके से व्यापारिक बाधाओं को कम करने और एक-दूसरे को टैरिफ (आयात शुल्क) में बड़ी राहत देने पर सहमत हुए थे। समझौते के मसौदे के अनुसार, अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कई प्रमुख उत्पादों पर लगाए गए भारी-भरकम 50% तक के शुल्क को घटाकर सीधे 18% करने का भरोसा दिया था। इसके अलावा, रूस से कच्चे तेल की खरीद के मुद्दे पर भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25% के अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क को भी हटाने और शेष शुल्क को 18% तक सीमित करने का प्रस्ताव था।लेकिन, तभी अमेरिकी घरेलू राजनीति और टैरिफ नीति में एक बड़ा भूचाल आ गया, जिससे वार्ताओं का पूरा समीकरण ही बदल गया। 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को चुनौती देने वाले मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया। इस फैसले के तुरंत बाद, ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से दुनिया के सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10% का एक समान शुल्क (यूनिफॉर्म टैरिफ) लागू करने का ऐलान कर दिया। इस अप्रत्याशित कदम के कारण फरवरी में होने वाली भारत-अमेरिका वार्ता अचानक टल गई थी। इसके बाद बातचीत की गाड़ी को दोबारा पटरी पर लाने के लिए अप्रैल 2026 में भारतीय डेलिगेशन ने वॉशिंगटन की यात्रा की थी, जिसका नतीजा अब 1 जून की बैठक के रूप में दिख रहा है।भारत का बड़ा दांव: 5 सालों में 500 अरब डॉलर की खरीदारी का मेगा ऑफरइस ऐतिहासिक ट्रेड डील को अमलीजामा पहनाने के लिए भारत ने अमेरिका के सामने कुछ बेहद आकर्षक और बड़े प्रस्ताव रखे हैं। भारत ने व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई प्रमुख कृषि वस्तुओं पर लगने वाले आयात शुल्क को या तो पूरी तरह समाप्त करने या काफी कम करने की पेशकश की है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (DDGs) और रेड सोरघम (पशु आहार)ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फलसोयाबीन तेल, वाइन और प्रीमियम स्पिरिट्सइसके बदले में भारत ने अमेरिका को एक मेगा ऑफर दिया है। भारत ने अगले पांच वर्षों के भीतर अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर (आधा ट्रिलियन डॉलर) मूल्य के उत्पाद खरीदने की बड़ी इच्छा जताई है। भारत अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पाद (क्रूड ऑयल और गैस), विमान और विमान के कलपुर्जे, बहुमूल्य धातुएं, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी उत्पाद (टेक प्रोडक्ट्स) और कोकिंग कोल खरीदेगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को एक नए वैश्विक मुकाम पर ले जाएगा।व्यापार का मौजूदा गणित: अमेरिका बना भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनरअगर मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें, तो वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है। इस अवधि के दौरान भारत का अमेरिका को होने वाला निर्यात बढ़कर 87.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, अमेरिका से भारत होने वाला आयात भी 15.95% की भारी उछाल के साथ 52.9 अरब डॉलर पर दर्ज किया गया। इसके चलते भारत का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) जो पिछले वित्त वर्ष में 40.89 अरब डॉलर था, वह अब थोड़ा घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है।वैश्विक बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका द्वारा सभी देशों पर समान रूप से 10% शुल्क थोपे जाने के बाद दुनिया भर के व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का माहौल पूरी तरह बदल चुका है। ऐसे नए और चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य में, भारत और अमेरिका दोनों ही देश दिल्ली में होने वाली इस महाबैठक में अपने-अपने राष्ट्रीय और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते की शर्तों में कुछ रणनीतिक बदलाव कर सकते हैं, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।