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कथित महंत के खिलाफ सीएम आवास के पास महिलाओं का प्रदर्शन, प्रशासन में हड़कंप

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। वाल्मीकि आश्रम के कथित महंत भरतदास की गिरफ्तारी की मांग को लेकर गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास के बाहर अचानक हुए महिलाओं के प्रदर्शन से पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। चित्रकूट से पहुंचीं दर्जनों महिलाओं ने मुख्यमंत्री आवास के निकट जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में अखण्ड आर्यावर्त आर्य त्रिदंडी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी भी मौजूद रहे।

बताया गया कि जय बजरंग सेना की राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना उपाध्याय के नेतृत्व में महिलाएं बिना किसी पूर्व सूचना के मुख्यमंत्री आवास के पास पहुंच गईं। अचानक प्रदर्शन शुरू होने से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की।

महिलाओं की मांग पर पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास स्थित कार्यालय भेजा गया, जहां अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले में तत्काल संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

प्रदर्शनकारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कथित महंत भरतदास को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की गई। साथ ही वाल्मीकि आश्रम में प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर एक समिति गठित किए जाने की भी मांग उठाई गई, ताकि आश्रम और मंदिर का संचालन सुचारू रूप से किया जा सके।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि भरतदास के खिलाफ चित्रकूट जनपद में मारपीट, जमीन कब्जाने, महिलाओं को बदनाम करने और ब्लैकमेलिंग जैसे एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस संरक्षण के चलते अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं की गई।

जय बजरंग सेना की राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना उपाध्याय ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद भरतदास ने फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और सार्वजनिक रूप से महिलाओं का अपमान किया। इस संबंध में कर्वी कोतवाली और रैपुरा थाने में एफआईआर दर्ज होने का भी दावा किया गया।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि भरतदास ने लालपुर स्थित मां असावार माता की सिद्ध पीठ पर कब्जा कर मंदिर के गर्भगृह में बदलाव कराया है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार मां असावार क्षेत्र के 84 गांवों की कुलदेवी हैं और इस घटना से क्षेत्र में आक्रोश और भय का माहौल है।

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि संत समाज ने भी भरतदास का बहिष्कार कर उसे निष्कासित कर दिया है। साथ ही संत समाज, अधिवक्ताओं और ग्राम प्रधानों द्वारा जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के कारण भरतदास की गिरफ्तारी टाली जा रही है।