लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके अच्छे कर्मों, ईमानदारी और समाज में बनाए गए संबंधों से होती है। इसी संदेश के साथ लोक संस्कृति शोध संस्थान की मासिक श्रृंखला “दादी नानी की कहानी जीतेश की ज़ुबानी” के 81वें आयोजन में बच्चों को प्रेरणादायक सीख दी गई। कार्यक्रम शनिवार को सेक्टर -” सीतापुर रोड योजना कालोनी में स्थित एमएलएम इंटर कॉलेज में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में स्टोरीमैन जीतेश श्रीवास्तव ने बच्चों को एक प्रेरक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि हमें हर कार्य पूरी मेहनत, लगन और निष्ठा के साथ करना चाहिए, क्योंकि धन से अधिक मूल्यवान हमारे संस्कार और अच्छे संबंध होते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षाप्रद और मनोरंजक खेलों से हुई, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

कहानी के माध्यम से रवि नामक युवक के जीवन का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। रवि अपने पिता अय्यर की कमाई से असंतुष्ट रहता है। अय्यर पेशे से अध्यापक थे। समय बीतने पर रवि एक बड़ी कंपनी में उच्च पद पर कार्य करने लगता है। एक दिन उसे पता चलता है कि कंपनी के मालिक उसके पिता के ही शिष्य हैं। यह जानकर वह भावुक हो जाता है और उसे एहसास होता है कि उसके पिता की असली कमाई धन नहीं, बल्कि उनके सफल और संस्कारित शिष्य थे।
इस अवसर पर लोक चौपाल प्रभारी अर्चना गुप्ता ने बच्चों को वीर रस से ओत-प्रोत गीत का सस्वर अभ्यास कराया। वहीं एस.पी. श्रीवास्तव ने अपनी मनमोहक रचना प्रस्तुत कर वातावरण को साहित्यिक रंग दिया।
कार्यक्रम में एमएलएम इंटर कॉलेज के संस्थापक जवाहर लाल गुप्ता, प्रधानाचार्य जया पुरवार एवं उप प्रधानाचार्य संगीता गुप्ता ने कथा प्रस्तोता समूह का स्वागत किया। इस दौरान लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी, लोक कथा प्रभारी शम्भू शरण वर्मा, संरक्षक राज नारायण वर्मा, चित्रकार भूपेन्द्र अस्थाना, विनय गुप्ता, डॉ. एस.के. गोपाल, भारत विकास परिषद से मदन लाल सहित विद्यालय की अध्यापिकाएं रिचा मेहरोत्रा, ज्योति खुराना, डॉ. सारिका श्रीवास्तव, अंकिता श्रीवास्तव, सुनीता श्रीवास्तव एवं डॉ. अनुपमा सिंह उपस्थित रहीं।
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