लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की उत्तर प्रदेश राज्य इकाई द्वारा सोमवार को अलीगंज में बुंदेलखंड क्रेटान की खनिज संभावनाओं, विशेषकर महत्वपूर्ण खनिजों पर केंद्रित एक दिवसीय हाइब्रिड कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देशभर के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लेकर क्षेत्र की भू-वैज्ञानिक संरचना, खनिज तंत्र एवं अन्वेषण रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। वक्ताओं ने महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए उन्नत तकनीकों और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि असित साहा (महानिदेशक, GSI) वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे। डॉ. जॉयेश बागची, एडीजी (PSS), GSI ने अतिथि-विशेष के रूप में सहभागिता की, जबकि अरुण कुमार (आईएएस, अपर सचिव, भूतत्व एवं खनन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार) भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजिंदर कुमार (एडीजी एवं विभागाध्यक्ष, GSI, उत्तरी क्षेत्र) ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं वैज्ञानिक प्रकाशनों के विमोचन के साथ हुआ। जिसमें “Compilation of Technical Abstracts (2010–2025)” का प्रकाशन भी शामिल है। जो GSI की वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण एवं ज्ञान-विस्तार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ-साथ GSI के वैज्ञानिकों ने भाग लिया तथा बुंदेलखंड क्रेटान की टेक्टोनिक विकास प्रक्रिया, भू-पर्पटी संरचना एवं खनिज तंत्र (Mineral Systems) पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। तकनीकी सत्रों में टेक्टोनिक्स, भू-काल निर्धारण, पेट्रोलॉजी, भूभौतिकी, भू-रसायन एवं मिनरल सिस्टम्स दृष्टिकोण जैसे प्रमुख विषयों को शामिल किया गया। जिसमें एकीकृत एवं डेटा-आधारित अन्वेषण पद्धतियों के महत्व पर बल दिया गया।
कार्यशाला के संयोजक वी.पी. गौर (उप महानिदेशक, राज्य इकाई, उत्तर प्रदेश) तथा समन्वयक हेमंत कुमार, (निदेशक, टेक्निकल सेल, राज्य इकाई, उत्तर प्रदेश) रहे।

बुंदेलखंड क्रेटान, भारतीय भू-ढाल का एक प्रमुख आर्कियन भू-खंड है, जहाँ GSI द्वारा विभिन्न पैमानों पर भूवैज्ञानिक मानचित्रण, गुरुत्वीय एवं चुंबकीय भूभौतिकीय सर्वेक्षण तथा क्षेत्रीय भू-रासायनिक अध्ययन किए गए हैं। इन अध्ययनों के आधार पर इस क्षेत्र में बेस मेटल्स (Pb–Cu–Zn), दुर्लभ मृदा तत्व (REE), प्लेटिनम समूह तत्व (PGE), टंगस्टन, मोलिब्डेनम, लौह एवं स्वर्ण के लिए अन्वेषण परियोजनाओं की योजना बनाई गई है। तथापि, अब तक कोई आर्थिक रूप से व्यवहार्य भंडार स्थापित नहीं हो सका है, जो इस क्षेत्र में गहन एवं एकीकृत अन्वेषण रणनीतियों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

इसी संदर्भ में, इस कार्यशाला को बुंदेलखंड क्रेटान की खनिज संभावनाओं के पुनर्मूल्यांकन तथा महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ मृदा खनिजों की खोज हेतु एक केंद्रित वैज्ञानिक मंच के रूप में आयोजित किया गया। देश की तकनीकी प्रगति, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण एवं संसाधन सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण खनिजों पर नए अन्वेषण कार्य भी प्रारंभ किए गए हैं।
उद्घाटन सत्र के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि महत्वपूर्ण खनिजों का अन्वेषण राष्ट्रीय प्राथमिकता है, जो आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण एवं राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के अनुरूप है। यह भी रेखांकित किया गया कि बुंदेलखंड जैसे क्रेटोनिक क्षेत्र देश के खनिज संसाधन आधार को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जिसके लिए उन्नत तकनीकों, गहन ड्रिलिंग एवं बहु-विषयक डेटा के एकीकरण की आवश्यकता है।

चर्चाओं के दौरान यह प्रतिपादित किया गया कि बुंदेलखंड क्रेटान में महत्वपूर्ण खनिजों, REE, लिथियम, बेस मेटल्स एवं PGE सहित लौह एवं स्वर्ण के लिए पर्याप्त संभावनाएँ विद्यमान हैं। भविष्य के अन्वेषण में आधुनिक भू-विज्ञान तकनीकों एवं उन्नत लक्ष्यीकरण रणनीतियों के माध्यम से छिपे हुए खनिज भंडारों की पहचान पर विशेष ध्यान देना होगा।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के उत्तरी क्षेत्र के एडीजी एवं विभागाध्यक्ष राजिंदर कुमार ने कहा कि बुंदेलखंड क्रेटॉन क्षेत्र में खनिज संपदा की अपार संभावनाएं हैं, विशेषकर क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में तेजी से कार्य किया जा रहा है।
राजिंदर कुमार ने बताया कि इस क्षेत्र के अध्ययन के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे, जो अब सफल हो रहे हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में फॉस्फोराइट, आयरन और ग्लूकोनाइट जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके दक्षिण में पन्ना का हीरा क्षेत्र और उत्तर में ललितपुर क्षेत्र में सोना, फॉस्फोराइट और अन्य खनिजों की संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि GSI द्वारा वर्ष 2020 से लगातार खनिज अन्वेषण का कार्य किया जा रहा है और 2024-25 में कई खनिज ब्लॉक्स तैयार कर राज्य सरकार को सौंपे गए हैं। वर्ष 2026 के बाद क्रिटिकल मिनरल्स की खोज को और तेज किया जाएगा। मंत्रालय के निर्देशानुसार इन ब्लॉक्स को राज्य सरकार को हस्तांतरित किया जाता है, जिससे उनके विकास, नीलामी और राजस्व सृजन का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इन ब्लॉक्स के विकास और नियामकीय प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई करती है। साथ ही, यूरेनियम, सोना और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स की खोज पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो भविष्य में क्षेत्र के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यह कार्यशाला वैज्ञानिक विचार-विमर्श, ज्ञान-विनिमय एवं भविष्य की अन्वेषण रणनीतियों के निर्धारण के लिए एक प्रभावी मंच सिद्ध हुई, जो राष्ट्रीय खनिज संसाधन विकास लक्ष्यों के अनुरूप है।
GSI, उत्तरी क्षेत्र द्वारा उत्तर प्रदेश में किए गए कार्यों से लौह, फॉस्फोराइट, स्वर्ण, REE एवं बॉक्साइट जैसे खनिजों की संभावनाएँ उजागर हुई हैं तथा कुछ खनिज ब्लॉकों को राज्य सरकार को हस्तांतरित भी किया गया है। महत्वपूर्ण खनिजों का उपयोग मिश्रधातु, चिकित्सा, औद्योगिक रसायन, जैव-प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है।
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