उज्जैन : प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता मिलिंद सोमन ने हाल ही में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। उनकी यह आध्यात्मिक यात्रा उनके महादेव के प्रति व्यक्तिगत आस्था भाव को दर्शाने के साथ ही उनके प्रशंसकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।उल्लेखनीय है कि उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। यह आरती तड़के ब्रह्म मुहूर्त में होती है, जिसमें भगवान शिव को चिता की भस्म से अलंकृत किया जाता है। इस अनूठी परंपरा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। मिलिंद सोमन भी इसी दिव्य अनुभव का हिस्सा बनने के लिए सोमवार को उज्जैन पहुंचेको और मंगलवार की भस्मआरती में शामिल हुए ।मिलिंद सोमन, जो अपनी फिटनेस और अनुशासित जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं, ने मंदिर परिसर में पहुंचकर पूरी श्रद्धा और विनम्रता के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए। पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए मिलिंद ने धार्मिक विधि-विधान के अनुसार भस्म आरती में भाग लिया। इस दौरान उनका शांत और ध्यानमग्न स्वरूप देखने लायक था, जो उनके आध्यात्मिक जुड़ाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।ज्ञात हो कि भस्म आरती का दृश्य अत्यंत अलौकिक होता है। मंदिर के गर्भगृह में दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार की गूंज और धूप-दीप की सुगंध के बीच जब भगवान महाकाल का अभिषेक और श्रृंगार होता है, तो वातावरण भक्तिमय हो उठता है। मिलिंद सोमन ने भी इस दिव्यता को करीब से महसूस किया और बाद में अपने अनुभव को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा अनुभव है जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता।मिलिंद सोमन की इस यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। उनके प्रशंसक और अनुयायी इस आध्यात्मिक पहल की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे यह संदेश देने वाला कदम बताया कि व्यस्त और ग्लैमरस जीवन के बीच भी व्यक्ति को अपनी आस्था और आध्यात्मिकता से जुड़े रहना चाहिए।यह पहली बार नहीं है जब किसी प्रसिद्ध हस्ती ने महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए हों, लेकिन मिलिंद सोमन का यहां आना इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि वे फिटनेस और आधुनिक जीवनशैली के प्रतीक माने जाते हैं। ऐसे में उनका धार्मिक और आध्यात्मिक पक्ष सामने आना उनके व्यक्तित्व को और अधिक प्रेरणादायक बनाता है।महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने भी उनके आगमन की पुष्टि की और बताया कि उन्होंने सामान्य श्रद्धालु की तरह ही दर्शन किए। मंदिर में किसी प्रकार की विशेष व्यवस्था नहीं कराई गई, जिससे यह संदेश जाता है कि भगवान के दरबार में सभी समान हैं। मिलिंद ने भी इस व्यवस्था की सराहना की और कहा कि उन्हें आम भक्त की तरह पूजा करने का अवसर मिला, जो उनके लिए बेहद संतोषजनक रहा।
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