तेल अवीव : युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है। कुछ दिनों तक अपना विरोध दर्ज कराने या दुश्मन की मनमानी के खिलाफ हथियार का प्रयोग करना तो समझ में आता है लेकिन एक दूसरे से सतत युद्ध एक दूसरे के नरसंहार ही कहा जाएगा। मानव जीवन का नष्ट करना ही माना जाएगा। यही वजह है लंबी अवधि के जंग के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब अपने देश में घिरते दिख रहे हैं। इजरायल में विपक्ष ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू ने बिना किसी रणनीति के सेना को युद्ध में झोंक दिया है। विपक्षी नेता यायर लापिड ने चेतावनी दी है कि इजरायली डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) पतन की कगार पर हैं।यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब इजरायल डिफेंस फोर्सेज के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने कहा था कि युद्ध के बढ़ते दबाव और सैनिकों की गंभीर कमी की वजह से इजरायली सेना ‘अंदर से कमजोर होकर टूट सकती’ है।सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में आईडीएफ चीफ ने कहा कि भर्ती कानून, रिजर्व ड्यूटी कानून और अनिवार्य सैनिक सेवा बढ़ाने वाला कानून जल्द से जल्द बना देने चाहिए। ये कदम नहीं उठाए गए तो सेना जल्द ही सामान्य कामकाज भी नहीं कर पाएगी और रिजर्व सिस्टम भी टूट जाएगा। मुख्य विपक्षी दल यश अतिद के प्रमुख यायर लैपिड ने कहा, मैं इजराइल के नागरिकों को चेतावनी देना चाहता हूं- हम एक और सुरक्षा आपदा का सामना कर रहे हैं। मैं 10 रेड फ्लैग की बात कर रहा हूं।आईडीएफ पतन के कगार पर है।उन्होंने कहा कि हमारे पायलट, हमारे लड़ाके, इन दिनों इजरायल राष्ट्र के इतिहास में गौरवशाली अध्याय लिख रहे हैं। हम शेरों की एक ऐसी पीढ़ी की बात कर रहे हैं, जो असाधारण काम कर रही है; लेकिन आईडीएफ अपनी क्षमता की सीमा तक और उससे भी आगे तक खिंच चुका है। सरकार सेना को युद्ध के मैदान में घायल अवस्था में छोड़ रही है।लैपिड ने कहा कि जो कोई भी अब यह कहता है कि हमें युद्ध के समय खतरों के बारे में बात नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे हम कमजोर पड़ते हैं। वह शायद यह भूल गया है कि हमने 7 अक्टूबर को क्या सीखा था? सुरक्षा तंत्र की भूमिका आपदा आने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले चेतावनी देना है।
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