लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। अभ्यास से निपुणता आती है और निपुणता जीवन संवारती है और उससे लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। व्यष्टि से समष्टि के कल्याण की भावना के साथ ध्येय पथ पर निरंतर बढ़ रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लखनऊ उत्तर भाग के स्वयंसेवकों ने शारीरिक प्रधान कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। सरस्वती विद्या मन्दिर, सेक्टर-क्यू, अलीगंज में आयोजित कार्यक्रम में अलग-अलग नगरों के स्वयंसेवकों ने नियुद्ध, पदविन्यास, समता, दण्डयुद्ध, व्यायाम योग का सुन्दर प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर जिले के संघचालक विश्वजीत ने किया। मुख्य वक्ता पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र सम्पर्क प्रमुख मनोज ने कहा कि स्वयंसेवक जितना निपुण होगा, उसका व्यक्तिगत जीवन भी उतना ही अच्छा होगा। संगठन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि त्रेता युग में भगवान राम ने भी वानर-भालुओं का संगठन किया था, जिससे रावण को हराने में उनको सफलता मिली। द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने भी संगठन किया था और कंस को मारकर धर्म की स्थापना की थी।
आद्य सर संघचालक डाॅ. केशव बलिराम हेडगेवार की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन में अभावों को झेलते हुए भी संघकार्य को कभी धीमा नहीं पड़ने दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में घोष की शुरुआत कैसे हुई, इसका मार्मिक विवरण मनोज ने अपने उद्बोधन में बताया।

उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक स्वयंसेवक को व्यक्तिगत स्वार्थ छोड़कर राष्ट्र और समाज के लिए पूरे मनोयोग से कार्य करना ही चाहिए। एक घटना पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में नई दिल्ली में सर संघचालक मोहनराव भागवत के साथ सम्पन्न एक बैठक में करीब पचास देशों के राजनयिकों ने उनसे आग्रह किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा कोई संगठन उनके यहाँ भी बनाने में सहयोग किया जाये।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से लखनऊ के विभाग प्रचारक अनिल, सायं भाग प्रचारक आजाद, भाग कार्यवाह शुभम, सह भाग कार्यवाह अभिषेक मोहन, सह भाग कार्यवाह सतीश, शारीरिक प्रमुख देवव्रत, व्यवस्था प्रमुख दीपक, सेवा प्रमुख दीनदयाल, प्रचार प्रमुख चन्द्र भूषण, सह सेवा प्रमुख रजनीश, सह प्रचार प्रमुख सुमित, विस्तारक वीर बहादुर आदि लोग उपस्थित रहे।
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