New Delhi : ऑनलाइन फूड डिलीवरी की दिग्गज कंपनी जोमैटो (Zomato) ने अपने करोड़ों ग्राहकों को तगड़ा झटका दिया है। कंपनी ने चुपके से अपनी प्लेटफॉर्म फीस (Platform Fee) में भारी बढ़ोतरी कर दी है। शुक्रवार से लागू हुई नई दरों के अनुसार, अब ग्राहकों को प्रति ऑर्डर ₹12.50 की जगह ₹14.90 चुकाने होंगे। यह सीधे तौर पर करीब 19.2% की वृद्धि है, जिससे अब बाहर से खाना मंगाना और भी महंगा हो जाएगा।क्यों बढ़ाई गई फीस? रेस्टोरेंट्स और डिलीवरी लागत का दिया हवालाजोमैटो की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब एलपीजी सिलेंडर और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। इन बढ़ती कीमतों के कारण रेस्टोरेंट्स के संचालन और डिलीवरी पार्टनर्स की लागत में इजाफा हुआ है। कंपनी का कहना है कि बढ़ते ऑपरेशनल खर्च (Operational Costs) को संतुलित करने और अपने मार्जिन में सुधार लाने के लिए यह फैसला जरूरी था। बता दें कि प्लेटफॉर्म फीस वह शुल्क है जो कंपनी रेस्टोरेंट और डिलीवरी चार्ज के अलावा अपने ऐप के रखरखाव और सेवाओं के लिए वसूलती है।₹2 से शुरू हुआ सफर अब ₹15 के करीब, स्विगी से भी है होड़जोमैटो ने पहली बार अगस्त 2023 में महज ₹2 की प्लेटफॉर्म फीस लागू की थी। इसके बाद से इसमें लगातार बढ़ोतरी की गई है:फरवरी 2025: फेस्टिव सीजन के दौरान इसे ₹6 से बढ़ाकर ₹10 किया गया था।सितंबर 2025: एक बार फिर फीस में संशोधन हुआ।ताजा अपडेट: अब प्री-जीएसटी आधार पर यह ₹14.90 हो गई है।दिलचस्प बात यह है कि जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी (Swiggy) भी फिलहाल टैक्स सहित ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। दोनों कंपनियां अपने यूनिट इकोनॉमिक्स को बेहतर बनाने के लिए एक-दूसरे के नक्शेकदम पर चल रही हैं।मुनाफा तो बढ़ा, पर खर्चों ने भी पकड़ी रफ्तारजोमैटो (अब इटरनल लिमिटेड) के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी ने दिसंबर तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा (Consolidated Net Profit) 72.88% बढ़कर ₹102 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹59 करोड़ था। वहीं, ऑपरेशंस से मिलने वाला राजस्व तीन गुना से अधिक बढ़कर ₹16,315 करोड़ तक पहुंच गया है। हालांकि, मुनाफे के साथ-साथ कंपनी के खर्चों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसकी भरपाई अब ग्राहकों की जेब से की जा रही है।शेयर बाजार में जोमैटो का हालशेयर बाजार में जोमैटो (इटरनल) का शेयर शुक्रवार को ₹233 पर बंद हुआ। पिछले एक सप्ताह में इसमें करीब 7.5% की बढ़त देखी गई है, लेकिन महीने भर के आंकड़ों पर गौर करें तो इसमें लगभग 13% की गिरावट दर्ज की गई है। मार्च 2025 में खुद को इटरनल लिमिटेड के रूप में रीब्रांड करने के बाद कंपनी लगातार नए प्रयोग और विस्तार कर रही है, लेकिन प्लेटफॉर्म फीस में बार-बार बढ़ोतरी ग्राहकों के बीच असंतोष का कारण बन सकती है।
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