Tuesday , March 17 2026

वैश्विक विशेषज्ञों ने GFI 2026 में साझा किए जमीनी नवाचार के अनुभव

भुवनेश्वर (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बिरला ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं में जमीनी और लागत-कुशल नवाचार पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (जीएफआई 2026) 12 मार्च से 14 मार्च तक आयोजित किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य स्थायी विकास की चुनौतियों का सामना जमीनी नवाचार के माध्यम से करना है, और इसे शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, उद्यमियों और नवप्रवर्तकों को एक मंच पर लाने के लिए आयोजित किया गया। बिरला स्कूल ऑफ मैनेजमेंट का बी-हाइव (बिरला हब फॉर इनोवेशन, वेंचरिंग और उद्यमिता) इस सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है, जिसे एर्ल वी. स्नाइडर इनोवेशन प्रबंधन केंद्र, व्हिटमैन स्कूल ऑफ प्रबंधन, सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी अमेरिका और मिड-वेस्ट यूनिवर्सिटी, सुरखेत नेपाल के सहयोग से आयोजित किया गया।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. ध्रुब कुमार गौतम, मिड-वेस्ट यूनिवर्सिटी नेपाल के कुलपति थे। सम्मेलन में अन्य प्रमुख वक्ताओं में प्रो. आनंद कुमार जायसवाल (भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद), प्रो. एस.पी. राज (सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी) और रजत वर्धन (संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्कैनक्स्ट वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी प्रा. लि.) शामिल थे।

सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. सुवेंदु कुमार प्रतिहार (सहायक प्रोफेसर – विपणन और उद्यमिता एवं सम्मेलन अध्यक्ष) ने स्थानीय चुनौतियों के समाधान और वैश्विक प्रासंगिकता वाले टिकाऊ समाधान बनाने में जमीनी और लागत-कुशल नवाचार के महत्व को रेखांकित किया।

प्रो. कुलभूषण बलूनी (कुलपति, बिरला ग्लोबल यूनिवर्सिटी) ने नवाचार-प्रेरित अनुसंधान और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने में संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने ऐतिहासिक रूप से मजबूत जमीनी नवाचार क्षमता दिखाई है, जो स्थानीय और वैश्विक विकास मार्गों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सम्मेलन के एक महत्वपूर्ण सत्र का परिणाम बिरला ग्लोबल यूनिवर्सिटी और मिड-वेस्ट यूनिवर्सिटी नेपाल के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर था। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दोनों यूनिवर्सिटी के बीच शिक्षक और छात्र विनिमय, संयुक्त शोध परियोजनाएँ और उद्यमिता विकास पहल जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

सम्मेलन में तकनीकी सत्रों में सतत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु-स्मार्ट कृषि अर्थव्यवस्थाएँ, समावेशी विकास के लिए जमीनी नवाचार का विस्तार आदि विषयों पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, “आइडिया टू इम्पैक्ट बूटकैम्प और नवाचार प्रदर्शन” भी आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्र उद्यमिता को प्रोत्साहित करना था।