Saturday , March 14 2026

साइना नेहवाल ने की 21 अंक प्रणाली बरकरार रखने की वकालत, कहा-स्कोरिंग बदलाव पर सावधानी से फैसला ले बीडब्ल्यूएफ

नई दिल्ली : भारत की पूर्व बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने बैडमिंटन की मौजूदा 21 अंक प्रणाली को बनाए रखने की वकालत करते हुए कहा है कि खेल की तीव्रता और सहनशक्ति इसी प्रारूप से बनी रहती है। उन्होंने बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (बीडब्ल्यूएफ) से स्कोरिंग प्रणाली में किसी भी बदलाव पर सावधानीपूर्वक निर्णय लेने की अपील की है।दरअसल, बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन ने मौजूदा 3×21 अंक प्रणाली के स्थान पर 3×15 अंक प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर 25 अप्रैल को डेनमार्क के हॉर्सेंस में होने वाली बीडब्ल्यूएफ की वार्षिक आम बैठक में सदस्य देशों द्वारा मतदान किया जाएगा।साइना ने कहा कि बैडमिंटन की समृद्ध परंपरा रही है और ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप तथा बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट अपनी तीव्रता और सहनशक्ति के कारण खास माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्कोरिंग या प्रारूप में किसी भी बदलाव पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि मौजूदा 21 अंक प्रणाली वर्षों से सफल रही है और खिलाड़ी इसके अनुरूप ढल चुके हैं।उन्होंने कहा कि यदि कोई बदलाव किया भी जाता है तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि रैलियों की गुणवत्ता और खेल का प्रतिस्पर्धी संतुलन प्रभावित न हो। उनके अनुसार खेल की भावना और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।खिलाड़ियों के स्वास्थ्य का भी रखें ध्यानसाइना ने अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर को काफी व्यस्त बताते हुए कहा कि खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, जिससे चोट और थकान का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि बैडमिंटन शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन खेल है, जहां रैलियां लंबी होती हैं और खेल की गति भी बहुत तेज होती है।उनका मानना है कि बड़े टूर्नामेंटों के बीच खिलाड़ियों को बेहतर रिकवरी समय मिलना चाहिए और टीमों को खेल विज्ञान तथा पुनर्वास सुविधाओं का अधिक समर्थन मिलना चाहिए।लक्ष्य सेन के पास खिताब जीतने की क्षमतासाइना ने भारत के युवा खिलाड़ी लक्ष्य सेन के प्रदर्शन की भी सराहना की। लक्ष्य हाल ही में ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप के पुरुष एकल फाइनल में चीनी ताइपे के लिन चुन यी से हारकर उपविजेता रहे। इससे पहले भी वह 2022 में इस टूर्नामेंट में दूसरे स्थान पर रहे थे।साइना ने कहा कि ऑल इंग्लैंड जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के फाइनल में दो बार पहुंचना बड़ी उपलब्धि है। इससे यह साबित होता है कि लक्ष्य सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और उनके पास दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुकाबला करने की क्षमता और मानसिकता दोनों मौजूद हैं।आईआईएमयूएन से जुड़ने पर साइनासाइना ने इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) के सलाहकार बोर्ड से जुड़ने के फैसले पर कहा कि खेल अनुशासन, नेतृत्व और धैर्य जैसे मूल्यों की शिक्षा देता है। उनके अनुसार यह मंच युवाओं को वैश्विक सोच विकसित करने, नेतृत्व कौशल बढ़ाने और अपने विचार आत्मविश्वास के साथ व्यक्त करने का अवसर देता है।उन्होंने कहा कि यदि उनकी यात्रा से युवा छात्रों को अपने सपनों पर विश्वास करने और मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है तो यह उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।