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जियोहॉटस्टार : रिश्तों के भीतर छिपे अन्याय की सच्चाई दिखाएगी ‘चिरैया’

मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। क्या शादी एक लाइसेंस है? जियोहॉटस्टार एक दमदार नई ओरिजनल सीरीज़ ‘चिरैया’ लेकर आया है। यह सीरीज़ भारतीय घरों में सबसे गहराई से जड़ें जमा चुके एक अन्याय पर सवाल उठाती है और वह है – यह खतरनाक धारणा कि शादी का मतलब आजीवन सहमति है।

शशांत शाह द्वारा निर्देशित इस सीरीज़ में शानदार कलाकारों ने अभिनय किया है, जिसमें दिव्या दत्ता मुख्य भूमिका में हैं। उनका साथ दे रहे हैं संजय मिश्रा, सिद्धार्थ शॉ, प्रसन्ना बिष्ट, फैसल राशिद, टीनू आनंद, सरिता जोशी जैसे कई मंझे हुए कलाकार।

‘चिरैया’ का टीज़र उत्सव की आवाज़ों से शुरू होता है – शादी, वादा, एक नई शुरुआत। पूजा एक युवा दुल्हन है जो आशा भरी नज़रों के साथ अपने नए घर में कदम रखती है – सबकी उम्मीदों वाली “परफेक्ट” बहू बनने के लिए। लेकिन एक तेज़ और दिल दहला देने वाले कट में हम उसे अकेले छत पर देखते हैं, चुपचाप आँसू बहाते हुए। यह कॉन्ट्रा स्टा बहुत ही परेशान करने वाला है।

इन सारी खुशियों के पीछे एक ऐसी सच्चाई छिपी है जिसे कोई नाम नहीं देना चाहता। ‘चिरैया’ समाज से एक कठिन लेकिन ज़रूरी सवाल पूछती है, अगर शादी के बाद पति अपनी पत्नी के साथ जबरदस्ती करे, तो क्या यह अपराध नहीं रह जाता सिर्फ इसलिए क्योंकि वे शादीशुदा हैं? ये सवाल है समाज से। क्योंकि शादी कोई लाइसेंस नहीं है, और चुप रहना सहमति नहीं है।

दिव्या दत्ता ने कहा, “चिरैया में इस किरदार को निभाने के दौरान मैं बार-बार एक बहुत दुख देने वाला सच से रू-ब-रू हुई कि हम कितनी बार रिश्तों को बचाने के नाम पर या घर में शांति रखने के नाम पर खुद को चुप कर लेते हैं। इस कहानी ने मुझे गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया कि शादी को लोग कितनी आसानी से बिना कोई सवाल पूछे “हाँ” कहने की जगह मान लेते हैं। और त्याग को इतना खूबसूरत और रोमांटिक बना दिया जाता है कि असली दर्द और तकलीफ दिखाई ही नहीं देती।

जब आप किसी अपने को कम होते या गलत होते देखते हैं, तो क्या आप चुप रहकर जो है उसे बचाते हैं, या सही की रक्षा के लिए सब कुछ दाँव पर लगा देते हैं? इसका कोई आसान जवाब नहीं है, और शायद यही इसे इतना गहरा और परेशान करने वाला बनाता है। मुझे उम्मीद है कि जब लोग यह कहानी देखेंगे, तो वे सिर्फ देखेंगे नहीं – उसे महसूस करेंगे। और शायद बड़ी ही शांति से उन सच्चाइयों को पहचानेंगे जिन्हें हम अक्सर नाम देने से हिचकिचाते हैं।”