Tuesday , January 20 2026

उत्तरायणी कौथिग : वृत्तचित्र, लोकनाट्य ‘रामी बौराणी’, झोड़ा-छपेली व लोकगायन ने बांधा समां

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तरायणी कौथिग का षष्ठम् दिवस “समाज एवं संस्कृति सेवा के शानदार पच्चीस साल—बेमिसाल” पर आधारित वृत्तचित्र के मंचीय प्रसारण के साथ प्रारम्भ हुआ। वृत्तचित्र में पर्वतीय महापरिषद की स्थापना के उद्देश्य, सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान तथा विगत 25 वर्षों में किए गए राहत एवं सेवा कार्यों की सजीव झलक प्रस्तुत की गई।

वृत्तचित्र में आपदा के समय तत्पर राहत कार्य, निर्बल परिवारों के सहयोग हेतु प्रेरणादायी पहल, सामाजिक संगठनों को एक सूत्र में जोड़ने के प्रयास तथा कोरोना काल में ऑक्सीजन सिलेंडर, एम्बुलेंस, औषधि एवं खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने जैसे सराहनीय कार्यों को दर्शाया गया, जिसे देखकर दर्शक दीर्घा भावुक व अभिभूत हुई।


पर्वतीय महापरिषद के उपाध्यक्ष के. एन. पाण्डेय ने बताया कि इस वृत्तचित्र का संकलन भारतीय रंगमंच में निर्देशन के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित रंगकर्मी ललित सिंह पोखरिया द्वारा, छायाकार दयाल सिंह रावत एवं भुवन पाण्डेय के सहयोग से किया गया।

इसके उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला क्षेत्रीय शाखाओं की नृत्य प्रस्तुतियों से आरम्भ होकर झोड़ा प्रतियोगिता तक निरंतर चली। चित्रा काण्डपाल (गोमती नगर), नन्दा रावत (जोहार-मुनस्यार), देवकी बोरा (विकास नगर), हेमा तिवारी (उत्तराखण्ड जनकल्याण समिति), रजनी सिंह (मानस योग केन्द्र, शक्तिनगर) तथा हेमा देवी वाणगी (देवभूमि जन सरोकार सांस्कृतिक समिति) के दलों ने झोड़ा नृत्य में सहभागिता की। इसके बाद “पहाड़ी धुनों पर देशी ठुमका” प्रतियोगिता आयोजित हुई।

सायंकालीन सभा का मुख्य आकर्षण आनन्द कपकोटी के निर्देशन में लोकगाथा पर आधारित नृत्य-नाटिका “रामी बौराणी” का प्रभावशाली मंचन रहा, जिसे गोमती नगर लखनऊ शाखा ने प्रस्तुत किया। गायन प्रतियोगिता “पहाड़ की आवाज” तथा छपेली प्रतियोगिता “झुमिगो – सीजन 4” की प्रस्तुतियों ने मंच की निरन्तरता बनाए रखी।

बतौर मुख्य अतिथि मौजूद निदेशक खेल विभाग, उत्तर प्रदेश आरपी सिंह का स्वागत मुख्य संयोजक टी.एस. मनराल, संयोजक के.एन. चंदोला, अध्यक्ष गणेश चन्द्र जोशी एवं महासचिव महेन्द्र सिंह रावत ने पुष्पगुच्छ, शाल, उत्तराखण्डी टोपी एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर किया।

उत्तराखण्ड से आए लोकगायक रमेश बाबू गोस्वामी और रंजीत डफौटी ने अपने लोकप्रिय लोकगीतों—“गोपुली चाय खाना बंग्यार लेरो”, “ओ भगवती त्यर नामे की जतारा लगूंला”, “हाई तेरी रूमाला गुलाबी मुखड़ी”, “मेरी बाना हौसिया” तथा “तिलगा तेरी लम्बी लटि”—से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में देवेन्द्र मिश्रा, के. एस. रावत, एम. एस. मेहता, मीडिया सलाहकार हरिश काण्डपाल सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कलाकार व गणमान्यजन उपस्थित रहे।