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गेहूं प्रसंस्करण पर मंडी शुल्क हटाने की मांग, फ्लोर मिल उद्योग को गति देने पर सहमति

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। यूपी रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन द्वारा बुधवार को आयोजित संवाद से विकास कार्यशाला में रोलर फ्लोर मिल उद्योग की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, संचालन क्षमता में सुधार और मंडी शुल्क से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला का मुख्य फोकस गेहूं प्रसंस्करण पर लगने वाले मंडी शुल्क में छूट की आवश्यकता पर रहा।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश में सभी रोलर फ्लोर मिलें पूरी क्षमता से संचालित हों और नए उद्योग भी स्थापित हों, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ें और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तर प्रदेश को शीघ्र उत्पादक राज्य का दर्जा दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे विकास की रफ्तार और तेज होगी।

विशिष्ट अतिथि दिनेश प्रताप सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े उद्यमी न केवल राज्य के वित्तीय कोष को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि रोजगार सृजन और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही समाज को आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराकर वे सामाजिक दायित्वों का निर्वहन भी कर रहे हैं।

कार्यक्रम संयोजक मनोज कुमार सिंह (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य परिवर्तन आयोग) ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीति और नियत स्पष्ट है—प्रदेश में उद्योगों का विकास और विस्तार। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में मजबूत सड़क नेटवर्क, एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डों की बढ़ती संख्या और बेहतर कानून व्यवस्था उद्योग स्थापना और संचालन के लिए अनुकूल माहौल प्रदान कर रही है।

यूपी रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक कुमार बजाज ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में गेहूं उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, जहां लगभग 360 लाख टन गेहूं का उत्पादन होता है। इसके बावजूद प्रदेश की लगभग 350 से अधिक फ्लोर मिलें अपनी कुल प्रसंस्करण क्षमता का मात्र 35–40 प्रतिशत ही उपयोग कर पा रही हैं। इसका प्रमुख कारण गेहूं प्रसंस्करण पर लगाया जाने वाला मंडी शुल्क है, जबकि कई अन्य राज्यों में इसे समाप्त किया जा चुका है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि फ्लोर मिलों को गेहूं की खरीद (चाहे वह किसानों से हो या व्यापारियों के माध्यम से) पर बिना शर्त मंडी शुल्क से छूट दी जाए। इससे गेहूं प्रसंस्करण में वृद्धि होगी, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

कार्यक्रम के अंत में यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया कि यदि गेहूं उत्तर प्रदेश की शक्ति है, तो उसका प्रसंस्करण राज्य की पहचान बनेगा। गेहूं प्रसंस्करण हेतु मंडी शुल्क में छूट कोई रियायत नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, किसानों की आय वृद्धि और प्रदेश के औद्योगिक विकास में दीर्घकालिक निवेश है।

कार्यक्रम में इंद्र विक्रम सिंह (सचिव, मंडी परिषद), धर्मेन्द्र जैन, चंदन सावरिया, प्रमोद वैश्य, मदन लाल जिंदल, अर्जुन अग्रवाल, विजय गुप्ता, अंकित केडिया, श्याम सुंदर बजाज, श्रीकिशन अग्रवाल, मंजीत सिंह, रामचंद्र सिंघल, आकाश जालान, सुरेश सिंघल, प्रमोद राव, शीतल अग्रवाल सहित प्रदेशभर के अनेक उद्यमी उपस्थित रहे।