- राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के उपलक्ष्य में इसरो के सहयोग से विश्वविद्यालय में आयोजित की गयी अंतरिक्ष प्रदर्शनी, चंद्रयान-3, लैंडर, रोवर, जीएसएलवी-3 क्रयु मॉड्यूलर सहित अन्य यानों के मॉडल्स ने किया प्रभावित
- इसरो के विंग इस्ट्रैक के निदेशक बीएन रामकृष्ण एवं कुलपति प्रो. जेपी पाण्डेय ने किया प्रदर्शनी का उद्घाटन
लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के उपलक्ष्य में गुरूवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र यानि इसरो के सहयोग से डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में अंतरिक्ष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन सैटेलाइट को संचालित एवं नियंत्रित करने वाली इसरो की विंग इस्ट्रैक के निदेशक एवं चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग में सहयोग करने वाले वैज्ञानिक बीएन रामकृष्ण एवं कुलपति प्रो. जेपी पाण्डेय ने किया।

प्रदर्शनी को देखने के लिए विभिन्न स्कूलों के करीब एक हजार बच्चों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान प्रदर्शनी में इसरो की ओर से चंद्रयान-3 लैंडर, इंडियन डीप स्पेश एंटीना, क्रियु मॉड्युल, रिसोर्स सैटेलाइट, क्रियु इंजन, मार्स आर्बिटर मिशन स्केल, जी सैटेलाइट, एस्ट्रो सैटेलाइट, जीएसएलवी, पीएसएलवी, आर्यभट्ट सैटेलाइट एवं नक्षत्रशाला के मॉडल्स लगाये गये थे। जिन्हें देख बच्चे रोमांचित हो गये। बच्चों ने इसरो वैज्ञानिकों से बात कर अंतरिक्ष और उनके मिशनों की जानकारी ली। बहुत से बच्चों ने अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनने के सपने भी संजोये।

इस मौके पर इस्ट्रैक के निदेशक एवं चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग में सहयोग करने वाले वैज्ञानिक बीएन रामकृष्ण ने कहा कि चंद्रमा पर भारत की सफल लैंडिंग को पूरा देश अंतरिक्ष दिवस के रूप में मना रहा है। अंतरिक्ष में इस सफलता दुनिया को भारत के अंतरिक्ष शक्ति और क्षमता से परिचित कराया। यह हमारे देश के लिए गर्व की बात है। पिछले साल 23 अगस्त को जब चंद्रयान-3 चंद्रमा पर उतरने वाला था तब सारे देश की धड़कनें बढ़ गयी थीं। आखिर में हमने सफलतापूर्वक चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करायी। उन्होंने कहा कि यह सफलता चंद्रयान-2 की असफलता के बाद आयी। चंद्रयान-2 99 प्रतिशत सफल रहा। लेकिन आखिर वक्त में सॉफ्ट लैंडिंग नहीं हो सकी। इस मिशन के पूरा नहीं होने के बाद भी हम रूके नहीं और लगातार प्रयास किया।

उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 की सॉफ्ट लैंडिंग में कहां कमी रह गयी। इस पर गहन अध्ययन किया गया। हर एक प्रक्रिया का वैज्ञानिकों की टीम ने विश्लेषण किया। जहां कमी रह गयी थी उसे दूर करने पर पूरा जोर लगा दिया गया। पूरी तैयारी के बाद चंद्रयान-3 को लांच किया गया और सफलता मिली। उन्होंने बच्चों से कहा कि हमें इससे सीख लेने की जरूरत है। असफलता हमें सफलता के लिए प्रेरित करती है। जब हम बिना रूके अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करते हैं और अपनी कमियों को दूर करते हैं तब सफलता अवश्य मिलती है।
बच्चों का आगे बढ़ने की दी सीख
मंच पर मौजूद देश के वरिष्ठतम अंतरिक्ष वैज्ञानिकों में से एक बीएन रामाकृष्ण ने कार्यक्रम के दौरान बच्चों से शिक्षक की भूमिका में बात की। उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के सूत्र भी दिये। उन्होंने कहा कि यदि आपको देश के विकास में अपना योगदान देना और सफलता हासिल करनी है तो जिज्ञासु बनना होगा। सवाल करने की आदत डालनी होगी। विज्ञान, गणित, पर्यावरण और अपने आस-पास के बारे में जानिये। शिक्षकों से तब तक सवाल करते रहिये जब तक कि आप संतुष्ट नहीं हो जाते। आप जिस भी कक्षा में हैं अपने विषय को बहुत ध्यान से पढ़िये। अपने पढ़े को एक शिक्षक की तरह दोस्तों को पढ़ाइये। इससे आपकी क्षमता तेजी से विकसित होगी।

उन्होंने कहा कि सुबह से लेकर शाम तक कुछ नया करिये। इस बात का आंकलन करिये कि आपने पूरे दिन में क्या सीख, क्या प्रोडक्टिव किया। समस्या को देखिये और उसके समाधान का प्रयास करिये। आप जितना अधिक अपने आपको एकाग्र करेंगे उतना आगे बढ़ेंगे। देश का भविष्य आपके ही हाथों में आने वाला है। आप से देशवासियों को ढेर सारी अपेक्षाएं हैं। अंतरिक्ष विज्ञान के साथ ही अपनी पूरी क्षमता के साथ ही बच्चों आप अन्य तरीकों से देश की सेवा कर सकते हैं।
इसरो कई क्षेत्रों में कर रहा रिसर्च
बीएन रामकृष्ण ने कहा कि इसरो चंद्रयान-3 की सफलता के साथ ही अन्य कई मिशनों पर कार्य कर रहा है। अंतरिक्ष में हमारी किसी देश से प्रतिस्पर्धा नहीं है। हम देश के विकास और हित के लिए कार्य कर रहे हैं। कहा कि आने वाले समय में कई क्षेत्रों में रिसर्च हो रही है। उन्होंने बताया कि हम सूर्य के चक्कर लगा रहे एस्ट्रॉयड पर शोध करने पर काम कर रहे हैं। एस्ट्रॉयड में यदि विशेष धातु है तो उसे देश में कम खर्च में कैसे लाया जाये। इस पर वैज्ञानिकों की टीम रिसर्च कर रही है। कहा कि अभी हमने अंतरिक्ष विज्ञान में एक प्रतिशत से भी कम जानकारी हासिल की है। आने वाले समय में यह भी संभव है कि मनुष्य लाइट की गति से यात्रा करे। इस दिशा में भी शोध किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि चंद्रयान-3 चंद्रमा पर 14 दिन के बाद शिथिल हो गया। दरअसल, लैंडर को इस तरह ही डिजाइन किया गया था। लेकिन आने वाले मिशनों में लैंडर को 14 दिन में ही बंद नहीं हो जाये इस तरह डिजाइन करने पर रिसर्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसरो अपने सेटेलाइट सिस्टम पर काफी रिसर्च कर रहा है। जिससे कि आने वाले समय में प्राकृतिक आपदाओं, कृषि आदि का बेहतर आंकलन किया जा सके। कहा कि भारत पहला देश है जिसने चंद्रमा पर पानी होने की बात कही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. जेपी पाण्डेय ने कहा कि इसरो की उपलब्धियों ने देश को गौरवान्वित किया है। 55 वर्ष की अपनी यात्रा में इसरों ने सफलता के साथ कई असफलताएं भी देखी हैं। मगर हार नहीं मानी। बिना रूके हमारे अंतरिक्ष वैज्ञनिकों ने दिन रात एक किया है। कहा कि देश के विकास में इसरो की महत्वपूर्ण भूमिका है। चंद्रयान-3 की सफलता ने पूरी दुनिया को भारत के वैज्ञानिकों की क्षमता से परिचित कराया। वैज्ञनिकों ने असफलता को सफलता में बदलने के लिए गजब की प्रतिबद्धता दिखाई।
उन्होंने कहा कि कभी दूसरे के सहारे अपने सेटेलाइट लांच करने वाला इसरो इस समय 60 देशों की सेटेलाइट लांच कर रहा है। इसरो की वित्तीय विंग ने आर्थिक रूप से भी कमाई भी कर रहा है। उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि कोई भी चीज कठिन नहीं होती। बस जरूरत है कठिन परिश्रम करने की। जिज्ञासु बनिये। इसरो के वैज्ञानिक हमारे आपके बीच से ही हैं। आप भी इसका हिस्सा बन सकते हैं। यह प्रदर्शनी खास बच्चों के लिए लगायी गयी है। ताकि वह विभिन्न मॉडल्स को देखकर प्रेरित हो सकें।

कार्यक्रम में बच्चों ने इस्ट्रैक के निदेशक से अंतरिक्ष, चंद्रयान और अन्य मिशनों से जुड़े सवाल भी पूछे। जिसका उन्होंने विस्तार से जवाब दिया। इस मौके पर एक्सपर्ट टाक का भी आयोजन किया गया। जिसमें इस्ट्रैक के डिप्टी डायरेक्टर टी सुब्रमण्यम गणेश, एस मदस्वामी, आसिफ सिद्दकी, एके शर्मा, एसके पाण्डेय सहित अन्य वैज्ञानिकों ने अपने अनुभव साझा किये। इस दौरान बच्चों के बीच स्पेस से जुड़े क्विज का भी आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों ने काफी उत्साह दिखाया। इस मौके पर डीन इनोवेशन एंड एन्टरप्रेन्योरशिप प्रो. बीएन मिश्रा, एसो0 डीन इनोवेशन डॉ. अनुज कुमार शर्मा, इनोवेशन हब के हेड महीप सिंह, वंदना शर्मा सहित विभिन्न स्कूलों के बच्चे अध्यापकों सहित हिस्सा लिया।
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