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एंटरप्रेन्योरशिप और इनोवेशन पर जोर देती है राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तीन वर्ष पूरा होने पर बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), आईआईएम लखनऊ, केन्द्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय के द्वारा एक साझा प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। पत्रकारों को संबोधित करते हुये बीबीएयू के कुलपति प्रो. संजय सिंह ने कहाकि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्‍य बहु अनुशासनात्मक पाठ्यक्रम,भारत की विभिन्न बढ़ती हुई विकासात्मक अनिवार्यताओं से निपटना और एक समग्र शिक्षण माहौल का सृजन करने पर जोर देना है। एनईपी-2020 के तहत, छात्रों को अध्ययन के लिए विषयों का चयन और अधिक आसान कर किया गया है, जिससे 21वीं सदी के कुशल और सर्वांगीण व्यक्तित्‍व का सृजन होता है। उन्होंने कहाकि एनईपी-2020 21वीं सदी की शिक्षा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के अनुरूप एक नई प्रणाली का निर्माण करेगी जो  प्रत्येक व्यक्ति की रचनात्मक क्षमता के विकास पर विशेष रूप से जोर देगी। बीबीएयू के कुलपति ने कहा कि स्नातक आनर्स एवं स्नातक आनर्स (रिसर्च) के चार  वर्षीय स्नातक कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए विश्वविद्यालय ने “मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट” और “च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम” (सीबीसीएस) के प्रावधान के साथ विश्वविद्यालय के यूजी पाठ्यक्रमों के साथ ही परास्नातक (पीजी) स्तर पर पाठ्यक्रमों में बदलाव लाते हुए विश्वविद्यालय के 40 विभागों और 88 कार्यक्रमों में एनईपी 2020 के अनुसार संशोधित एवं संवर्धित पाठ्यक्रम लागू किया है।

प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए बीबीएयू के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहाकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त एनईपी के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विश्वविद्यालय निरन्तर प्रयास कर रहा है। विश्वविद्यालय के सभी विभागों में एनईपी से संवर्धित पाठ्यक्रम को 2020 से लागू कर दिया गया है। विश्वविद्यालय ने “मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट” और च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के प्रावधान को लागू किया गया है। प्रत्येक विभाग ने मूल्य संवर्धन, कौशल विकास, क्षमता वृद्धि, भारतीय पारंपरिक ज्ञान, सामुदायिक जुड़ाव, इंटर्नशिप प्रोजेक्ट/अप्रेंटिसशिप और क्रेडिट आवश्यकताओं के साथ प्रायोगिक और अनुभवात्मक शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम डिजाइन किए हैं। सभी कार्यक्रमों में स्वयं और MOOCs पाठ्यक्रमों की अनुमति दी गई है। विश्वविद्यालय ने आने वाले सत्रों में अधिक इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की पहल की है। सभी कार्यक्रमों के लिए लर्निंग आउटकम करिकुलम फ्रेमवर्क (एलओसीएफ) तैयार किया गया है और विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। विश्वविद्यालय ने डिजिटल रूप में अद्वितीय/व्यक्तिगत अकादमिक बैंक खाते खोलकर छात्रों के पंजीकरण के साथ अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट नीति लागू की। राष्ट्रीय सीमाओं की बाधाओं को पार कर अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने की दृष्टि से विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय छात्र केंद्र की स्थापना की गई है। इसके अलावा विश्वविद्यालय एनईपी 2020 के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रत्येक स्तर पर निरंतर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है।

पत्रकारों को संबोधित करते हुये आईआईएम लखनऊ की निदेशक अर्चना शुक्ला ने कहा कि आईआईएम लखनऊ ने एंटरप्रेन्योरशिप और इनोवेशन में पहला एमबीए प्रोग्राम डिजाइन किया है। आईआईएम लखनऊ द्वारा तैयार किया गया यह प्रोग्राम देशभर के किसी भी आईआईएम द्वारा ऑफर किए जाने वाले प्रोग्रामों में अपनी तरह का पहला प्रोग्राम है। इस एमबीए प्रोग्राम का उद्देश्य छात्रों को सफल उद्यमी बनने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना है। प्रो. अर्चना शुक्ला ने कहा, आईआईएम लखनऊ ने हमारे दो सफल इन्क्यूबेटरों के साथ एक उद्यमशील पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। यह कार्यक्रम अद्वितीय है क्योंकि यह कौशल विकास पर आधारित है और इसका उद्देश्य उद्यमशीलता की भावना को उजागर करना है। पाठ्यक्रम में एमबीए उद्यमशीलता ज्ञान और कौशल (50 प्रतिशत) और उद्योग इनपुट, विसर्जन और सलाह (50 प्रतिशत) के दर्शन और शिक्षाशास्त्र पर आधारित है। बहु-अनुशासनात्मक पाठ्यक्रम स्टार्ट-अप उद्यमों के लिए प्रासंगिक सामग्री और सामग्रियों के साथ प्रबंधन और संबद्ध क्षेत्रों के सभी क्षेत्रों को कवर करेगा।

मुख्य अतिथि डीके‌ द्विवेदी‌ ने एनईपी ने‌ चर्चा के दौरान कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से उच्च शिक्षा में समग्रता के नये अवसर देखने को मिलते हैं। साथ ही प्रत्येक छात्र की अद्वितीय क्षमता को सामने लाया जा रहा है  एवं वैधानिक सोच को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। 

नवोदय विद्यालय के डिप्टी कमिश्नर एसके माहेश्वरी ने चर्चा के दौरान कहा, कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से प्रारंभिक स्तर की शिक्षा में भी आवश्यक बदलाव किये गए हैं जो कि एक सकारात्मक प्रयास है। आज के समय में लगाये गये इन बीजों का फल भविष्य में देखने मिलेगी। बीबीएयू में एनईपी 2020 क्रियान्वयन समिति की चेयरपर्सन प्रो. संगीता सक्सेना ने विश्वविद्यालय द्वारा एनईपी के संदर्भ में किये गए कार्यों एवं विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त उपलब्धियों के बारे में चर्चा की एवं भविष्य में निर्धारित लक्ष्यों को सभी को बताया। रजिस्टार डाॅ. अश्विनी कुमार सिंह ने सभी मीडिया मित्रों को धन्यवाद दिया।