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शक्ति, शील और सौंदर्य की प्रतिमूर्ति हैं प्रभु श्रीराम – स्वामी सुधीरानन्द

लखनऊ। “खेंचत मिटे मोर संदेहू” का आदेश सुन भगवान राम ने प्रत्यंचा चढ़ाकर भगवान शिव के धनुष को पलक झपकते खंड-खंड कर दिया। सीता मैया के विवाह -मांगलिक प्रसंग का जो गायन, श्रवण करते हैं, उनके जीवन में आनंद उत्साह की प्राप्ति होती है। विवाह संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए इस विवाह प्रसंग का पाठ कराना चाहिए। उक्त वृतांत कर्तव्या फाउंडेशन द्वारा अग्रवाल सभा छावनी के विशेष सहयोग से आयोजित श्रीराम कथा में कथावाचक स्वामी सुधीरानन्द जी महाराज ने कही। पांचवे दिन शुक्रवार को स्वामी जी ने कथा में धनुष भंग के साथ सम्पन्न हुए श्रीराम और माता जानकी के शुभ विवाह का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया। पुष्पवाटिका प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि सुबह-सुबह श्रीराम और लक्ष्मण गुरु के पूजन के लिए फूल लेने पुष्प वाटिका में जाते हैं। वहां सीता जी भी अपनी सखियों के साथ पार्वती माता के मंदिर में पूजा के लिए आती हैं। श्रीराम और सीता के नेत्र मिलते हैं। दोनों एक-दूसरे को अपलक देखते हैं। इसके उपरांत सीता माता पार्वती जी के मंदिर में आकर श्रीराम को पति के रूप में प्राप्त करने की विनती करती हैं। श्रीराम और सीता का विवाह से पूर्व का यह प्रेम अत्यंत पवित्र है। ये भाव और मन के तल पर प्रेम और स्नेह की पराकाष्ठा है। सीता और राम दोनों ही मानसिक रूप से इसे स्वीकार करते हैं।  

राजा जनक द्वारा अपनी पुत्री सीता के विवाह के स्वयंवर में शिवधनुष को तोड़ने की शर्त रखी थी जिसमें सारे राजा महाराजा भाग्य आजमाने आये थे। मगर कोई शिव धनुष को तोड़ना तो दूर, उसको हिला भी न सका था। श्रीराम ने बड़ी ही सहजता सें धनुष को उठाकर उसपर प्रत्यंचा चढ़ा दी। उस धनुष को कान तक खींचा ही था कि अचानक ही वह धनुष बीच में ही टूट गया। शिव के धनुष के टूटने का अहसास पाकर ऋषि परशुराम क्रोधित होकर स्वयंवर स्थल पर पहुंचे। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम का जबरदस्त संवाद का सजीव वर्णन किये।

कर्तव्या फाउंडेशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र अग्रवाल ने बताया कि कर्तव्या फाउंडेशन समाज में कर्तव्यों की भावना करने के लिए कार्य करता है। जिससे समाज में स्नेह, समता एवं सहयोग का वतावरण बने। कथा के पंचम दिवस पर उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, कमल ज्योति पत्रिका के प्रबंध संपादक एवं कर्तव्या फाउंडेशन के संरक्षक साधक राजकुमार, महासचिव डॉ. हरनाम सिंह, आज के यजमान उषा अग्रवाल, ब्रजेश अग्रवाल, विना अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, संगीता अग्रवाल, नीरज अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल, संजय वैश्य, राजेश सिंह, रमाकांत सिंह, उमाकांत सिंह, अग्रवाल सभा के सचिव श्रीमंदर अग्रवाल, सचिन अग्रवाल, दीपक जायसवाल, सिद्धार्थ सहित सैकड़ों भक्तों ने कथा का रसपान किया।