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साहित्य के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचेगी भारतीय संस्कृति की विरासत

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। साहित्य भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना, जीवन-मूल्यों और राष्ट्रीय अस्मिता का सशक्त वाहक है। भारतीय चिंतन और परंपराओं को साहित्य के माध्यम से समृद्ध करने की आवश्यकता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अवध प्रांत एवं केकेवी कॉलेज, हिंदी विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में शनिवार को परिषद स्थापना दिवस, महर्षि वाल्मीकि जयंती तथा प्रांतीय कार्यसमिति बैठक का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी ने की। राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवनपुत्र बादल मुख्य अतिथि रहे। प्रो. हरि शंकर मिश्र विशिष्ट अतिथि, प्रो. ओम प्रकाश पांडेय मुख्य वक्ता तथा प्रो. रीता तिवारी एवं पद्मनाभ पाण्डेय विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि की साहित्यिक विरासत और भारतीय जीवन-मूल्यों के निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने सांस्कृतिक चेतना के विकास तथा भारतीय चिंतन और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में साहित्य की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। परिषद के स्थापना दिवस के संदर्भ में साहित्य के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को सशक्त बनाने की आवश्यकता भी चर्चा के केंद्र में रही।

प्रांतीय कार्यसमिति बैठक में परिषद की आगामी साहित्यिक गतिविधियों एवं संगठनात्मक कार्यक्रमों पर विचार-विमर्श किया गया। आयोजन में प्रांतीय अध्यक्ष विजय त्रिपाठी, कार्यकारी अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, महामंत्री डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव, प्रांत मंत्री डॉ. प्रणव मिश्र, प्रांत उपाध्यक्ष डॉ. रश्मिशील, प्रांत कोषाध्यक्ष सर्वेश पाण्डेय, कुमार तरल, ज्योति किरन रतन, अर्चना गुप्ता, डा. एस.के. गोपाल सहित अन्य उपस्थित रहे।