लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। कई कक्षाओं में ऐसा बच्चा होता है, जो किसी मशीन के काम करने का तरीका अच्छी तरह समझा सकता है, दिलचस्प कहानियां बना सकता है या ऐसी पहेलियां सुलझा सकता है जो दूसरों के लिए मुश्किल हों। लेकिन जब उसे सबके सामने पढ़ने के लिए कहा जाता है, तो वह हिचकिचाने लगता है। उसे बार-बार कहा जाता है कि और मेहनत करो, ज्यादा अभ्यास करो और अपना ध्यान केंद्रित रखो। धीरे-धीरे बच्चा यह मानने लगता है कि समस्या उसी में है।
डिस्लेक्सिया से प्रभावित कई बच्चों के लिए असली चुनौती यहीं से शुरू होती है। मुश्किल केवल सीखने के तरीके में नहीं होती, बल्कि तब बढ़ती है जब इस स्थिति को समय पर पहचाना नहीं जाता और बच्चे का आत्मविश्वास कम होने लगता है। इस कमी को दूर करने के लिए, जे.के. सीमेंट लिमिटेड की परोपकारी शाखा, जेकेसी फाउंडेशन ने ‘ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक’ पहल की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य डिस्लेक्सिया को लेकर जागरूकता और समझ बढ़ाना है, साथ ही ऐसा समावेशी वातावरण तैयार करना है, जहां लोग अपनी खूबियों को पहचान सकें और अपनी क्षमता को पूरी तरह विकसित कर सकें।
डॉ. राघवपत सिंघानिया और सोनम सिंघानिया द्वारा शुरू की गई ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक पहल, डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोगों को उनकी हर पड़ाव पर सहयोग देने वाला एक मजबूत तंत्र विकसित करने की सोच को आगे बढ़ाती है। इस पहल को विकसित करने और आगे बढ़ाने के लिए जेकेसी फाउंडेशन, ऑर्किड्स फाउंडेशन के साथ साझेदारी कर रहा है। इस सहयोग का उद्देश्य डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोगों के लिए जागरूकता और सहायता को और मजबूत बनाना है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य डिस्लेक्सिया को किसी कमी के रूप में देखने की सोच को बदलना और इसे सीखने के एक अलग तरीके के रूप में समझने को बढ़ावा देना है, जिसे सही सहयोग और प्रोत्साहन के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है। अगले 5 वर्षों में विभिन्न अभियानों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से 10 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
इस पहल के बारे में डॉ. राघवपत सिंघानिया (प्रबंध निदेशक, जे.के. सीमेंट लिमिटेड और संस्थापक, ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक) ने कहा, “हर बच्चा अलग तरीके से सीखता है, लेकिन कई बार हम सीखने के अलग तरीके को क्षमता या मेहनत की कमी समझ लेते हैं। जब किसी बच्चे को शुरुआत में समझा नहीं जाता, तो वह अपनी क्षमताओं को पहचानने से पहले ही खुद पर भरोसा खो सकता है। इसी सोच के साथ हमने यह पहल शुरू की है। हमारा प्रयास रहा है कि लोगों को अपनी क्षमता पहचानने और उसे आगे बढ़ाने के अवसर मिलें। ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
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