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मन की शांति और भावनात्मक संतुलन से मिलेगी जीवन की चुनौतियों से मुक्ति


लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। आंतरिक शक्ति, सकारात्मक सोच और आत्मचिंतन ही जीवन की चुनौतियों से उबरने तथा बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का आधार हैं। जब व्यक्ति स्वयं के भीतर बदलाव लाता है, तभी उसके विचारों, व्यवहार और जीवन में वास्तविक परिवर्तन दिखाई देता है। आध्यात्मिक मार्गदर्शक एवं वक्ता सिस्टर बीके शिवानी ने ये विचार फिक्की फ्लो लखनऊ द्वारा आयोजित विशेष संवाद ‘राइज़ अबव: ए डायलॉग ऑन इनर स्ट्रेंथ’ में व्यक्त किए।

उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और भावनात्मक उपचार (इमोशनल हीलिंग) पर चर्चा की। साथ ही शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए ध्यान की व्यावहारिक तकनीकें भी साझा कीं। इस कार्यक्रम में 600 से अधिक लोगों ने भाग लिया। महिला उद्यमियों, फ्लो सदस्यों, पेशेवरों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और शहर के नागरिकों की व्यापक उपस्थिति ने आंतरिक सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को रेखांकित किया।

ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ीं राजयोग मेडिटेशन शिक्षिका एवं ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित सिस्टर बीके शिवानी ने दैनिक जीवन के दबावों, तनाव और भावनात्मक चुनौतियों से निपटने के व्यावहारिक उपाय साझा किए। उन्होंने आत्मचिंतन, मानसिक स्थिरता, स्पष्ट सोच और भावनात्मक संतुलन के महत्व को समझाते हुए प्रतिभागियों को अपने भीतर झांकने और परिस्थितियों के बजाय अपनी प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया। 

अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स, लखनऊ के एमडी एवं सीईओ डॉ. मयंक सोमानी तथा अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के ऑन्कोलॉजी नेटवर्क के सीईओ एवं क्लिनिकल हेड डॉ. हरित चतुर्वेदी ने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध पर चर्चा की। उन्होंने संतुलित जीवनशैली, स्वास्थ्य के प्रति सजगता और समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर फिक्की फ्लो लखनऊ की चेयरपर्सन सिमरन साहनी, फिक्की फ्लो की नेशनल एक्सपोर्ट हेड स्वाति वर्मा और पूर्व चेयरपर्सन विभा अग्रवाल की उपस्थिति रही। फ्लो लखनऊ की कार्यकारी समिति से सीनियर वाइस चेयर देवांशी सेठ, वाइस चेयर निवेदिता सिंह, सचिव प्रज्ञा अग्रवाल और संयुक्त कोषाध्यक्ष वसुधा जैन भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। संवाद का संचालन ज्योति दीवान ने किया।