Monday , September 7 2026

भाषा विश्वविद्यालय के पहले पीएचडी शोधार्थी डॉ. विनय कुमार बने सहायक प्रोफेसर

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रथम पीएचडी शोधार्थी डॉ. विनय कुमार का चयन कानपुर विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर हुआ है। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से शोध पर्यवेक्षक डॉ. रुचिता सुजॉय चौधरी के मार्गदर्शन में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। विभाग से पीएचडी उपाधि हासिल करने वाले प्रथम शोधार्थी के रूप में उनका अब उच्च शिक्षण संस्थान में सहायक प्रोफेसर के रूप में चयन होना विभाग की अकादमिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

डॉ. विनय कुमार की सफलता पर उनकी शोध पर्यवेक्षक डॉ. रुचिता सुजॉय चौधरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि शोधार्थी को शोध के क्षेत्र से आगे बढ़कर उच्च शिक्षा में शिक्षक के रूप में स्थापित होते देखना अत्यंत संतोष और गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. विनय कुमार अपनी शोध क्षमता, विषयगत विशेषज्ञता और अकादमिक प्रतिबद्धता के माध्यम से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने के साथ उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देंगे।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने डॉ. विनय कुमार को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के शोधार्थी का उच्च शिक्षण संस्थान में सहायक प्रोफेसर के रूप में चयन पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गौरव की बात है। ऐसी उपलब्धियां विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बेहतर अकादमिक भविष्य के लिए प्रेरित करती हैं।

कुलसचिव विकास ने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों की सफलता संस्थान की अकादमिक प्रगति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के शिक्षक डॉ. शचीन्द्र शेखर ने डॉ. विनय कुमार की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग के पहले पीएच.डी. शोधार्थी का सहायक प्रोफेसर पद पर चयन विभाग के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विभाग में विकसित हो रहे शोधपरक एवं अकादमिक वातावरण का सकारात्मक परिणाम है और वर्तमान शोधार्थियों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण भी है।

अपनी सफलता पर डॉ. विनय कुमार ने अपने शोध पर्यवेक्षक डॉ. रुचिता सुजॉय चौधरी, विभागीय शिक्षकों तथा विश्वविद्यालय से मिले शैक्षणिक सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भाषा विश्वविद्यालय में प्राप्त अकादमिक मार्गदर्शन और शोध अनुभव उनके शैक्षणिक जीवन की महत्वपूर्ण पूंजी है।