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सीएम को भेजा गाज़ियाबाद में सार्वजनिक स्मारक मंदिर स्थापित करने का प्रस्ताव

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। समाजसेवी तथा “एक देश, एक नाम भारत के याचिकाकर्ता NAMAHA ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रत्यावेदन प्रेषित कर गाजियाबाद में प्रधानमंत्री को समर्पित एक सार्वजनिक स्मारक मंदिर एवं सामाजिक सेवा केंद्र की स्थापना हेतु उपयुक्त भूमि के आवंटन तथा अपेक्षित वैधानिक अनुमतियों का निवेदन किया है।

यह प्रस्ताव बिहार राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड द्वारा दिनांक 29 जुलाई 2026 को पटना में अपनी प्रथम बैठक में पारित उस प्रस्ताव के अनुरूप है, जिसमें बोर्ड ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री को समर्पित मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया था।

प्रत्यावेदन में चार निवेदन किए गए हैं। प्रकरण उत्तर प्रदेश राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड को उसके विचार एवं संस्तुति हेतु संदर्भित किया जाए। गाज़ियाबाद में उपयुक्त भूमि का चिन्हांकन एवं आवंटन, गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण से ले-आउट एवं भवन-मानचित्र की स्वीकृति तथा अपेक्षित अनापत्ति प्रमाण-पत्र और एक पंजीकृत सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास के गठन की अनुमति, जिसके न्यासियों में कम से कम एक-तिहाई स्थान ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों हेतु सुरक्षित रहेंगे।

प्रत्यावेदन में स्पष्ट किया गया है कि निर्माण किसी सार्वजनिक मार्ग, पार्क, फुटपाथ अथवा अतिक्रमित सरकारी भूमि पर प्रस्तावित नहीं है। कार्य समस्त वैधानिक अनुमतियाँ प्राप्त होने के उपरांत ही आरम्भ होगा। राज्य कोष से कोई अनुदान, सब्सिडी अथवा भूमि मूल्य में छूट नहीं माँगी गई है और परिसर जाति, पंथ, लिंग अथवा समुदाय के भेदभाव के बिना समस्त नागरिकों के लिए खुला रहेगा। परिसर में ट्रांसजेंडर समुदाय एवं जनपद के बंचित युवाओं हेतु एक वाचनालय एवं कौशल-विकास केंद्र भी प्रस्तावित है। जिसमें प्रवेश एवं प्रशिक्षण में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

NAMAHA के मुताबिक “यह प्रस्ताव किसी की ओर से बोलने का प्रयास नहीं है। इसीलिए पहला निवेदन ही यह किया गया है कि प्रकरण उत्तर प्रदेश राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड को भेजा जाए। बोर्ड जो भी मत अथवा संस्तुति देगा, वह शिरोधार्य होगा।”

प्रत्यावेदन में यह भी अंकित है कि यह आवेदक की व्यक्तिगत हैसियत से प्रस्तुत है तथा इसमें किसी संस्था, संगठन अथवा समुदाय की ओर से बोलने अथवा उसका प्रतिनिधित्व करने का कोई दावा नहीं है, और यदि सक्षम प्राधिकारी इसे विधिक, नीतिगत अथवा प्रशासनिक दृष्टि से उपयुक्त न पाए तो आवेदक उस निर्णय का पूर्ण सम्मान करेगा।

प्रत्यावेदन की प्रतिलिपियाँ राज्यपाल, धर्मार्थ कार्य विभाग, समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड, मंडलायुक्त मेरठ, जिलाधिकारी गाज़ियाबाद, गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण, नगर निगम गाज़ियाबाद, पुलिस आयुक्त गाज़ियाबाद तथा प्रधानमंत्री कार्यालय को भी प्रेषित की गई हैं।