लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में रविवार को 26वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान छात्रों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर स्थापना दिवस को यादगार बना दिया।
इस मौके पर कुलपति प्रो0 जेपी पाण्डेय ने विश्वविद्यालय की 26 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपने आप में संबद्धता प्रदान करने वाला विशिष्ट यह विश्वविद्यालय अपने शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के अथक प्रयासों से आज इस मुकाम पर है। हालांकि उन्होंने भविष्य की चुनौतियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय सिर्फ संबद्धता देने वाला नहीं होना चाहिए। बल्कि शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ाना होगा। शोध, अनुसंधान और नवाचार पर कार्य करना होगा। यही विश्वविद्यालय की पहचान बनेगी।

कुलपति ने कहा कि इस मामले में एकेटीयू कई योजनाओं पर कार्य कर रहा है। भविष्य की जरूरतों के मुताबिक पाठ्यक्रम में बदलावा किये जा रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने में योगदान के लिए पूर्व के सभी कुलपतियों और अधिकारियों और कर्मचारियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय से मेरा जुड़ाव शुरू से रहा है। यह एक भावनात्मक करने वाला दिन है।
कार्यक्रम की रूपरेखा रखते हुए कुलसचिव रीना सिंह ने विश्वविद्यालय की 26 वर्षों की यात्रा और उसके विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह विश्वविद्यालय 50 संबद्ध संस्थानों से शुरू हुआ, जो आज साढ़े सात सौ काॅलेजों से ज्यादा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को भी गिनाया। उन्होंने बताया कि यहां न केवल डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है बल्कि नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम में बदलाव किये गये हैं।

वित्त अधिकारी केशव सिंह ने कहा कि किसी भी मजबूत इमारत में नींव का पत्थर बेहद महत्वपूर्ण होता है। कहा कि विश्वविद्यालय के गौरव को बढ़ाने के लिए हमस ब को मिलकर नये प्रतिमान बनाने होंगे। छात्रों को सिर्फ तकनीकी शिक्षा देना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक भी बनाना होगा। उन्हें सही दिशा देनी होगी।
आईईटी एवं कैस के निदेशक प्रो0 वीरेंद्र पाठक ने कहा कि 26 सालों की इस यात्रा में विश्वविद्यालय ने अनेक उपलब्धियां हासिल की। प्रदेश के युवाओं को काबिल बनाने में अहम योगदान दिया। नवाचार और अनुसंधान में महत्पपूर्ण कार्य किये।
जीवंत हुआ भगवान राम के समुद्र पार करने वाला प्रसंग
इस दौरान विश्वविद्यालय के 26 वर्षों पर आधारित डाॅक्यूमेंट्री फिल्म भी चलायी गयी। साथ ही छात्रों ने डाॅक्यूमेंट्री के माध्यम से विश्वविद्यालय के अतीत की यादों को ताजा किया। इसके अलावा बीटेक छात्रों ने समूह गान किया। साथ ही छात्रों ने कविता के माध्यम से डाॅ0 एपीजे अब्दुल कलाम को याद किया।

छात्राओं ने सांस्कृतिक नृत्य से सभी का मन मोह लिया। जबकि नाट्य मंचन के माध्यम से डाॅ0 कलाम की पूरी जीवनी दिखायी गयी। वहीं कार्यक्रम में सबसे खास रहा छात्रों द्वारा भगवान राम के समुद्र पार करने वाले प्रसंग का मंचन बेहद मनमोहक एवं सधे अंदाज में हुआ। जिसमें भगवान राम का समुद्र के प्रति क्रोध और मर्यादा रखने को दर्शाया गया।
कार्यक्रम का संचालन उप परीक्षा नियंत्रक नेहा श्रीवास्तव एवं डाॅ0 वर्षा शुक्ला ने किया। जबकि धन्यवाद ज्ञापन उपकुलसचिव डाॅ0 आयुष श्रीवास्तव ने दिया। इस मौके पर कुलपति की धर्मपत्नी सरोज पाण्डेय, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो0 ओपी सिंह, डीन ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट प्रो0 अरूणिमा वर्मा, एसो0 डीन इनोवेशन डाॅ0 अनुज कुमार शर्मा, उपकुलसचिव डीपी सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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