तारकेश्वर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंग दिवस समारोह में कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सफलता पूर्वी भारत के विकास पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘मिशन पूर्वोदय’ के तहत पूर्वी राज्यों के विकास को प्राथमिकता दे रही है और इसमें पश्चिम बंगाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर में आयोजित पश्चिम बंग दिवस समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बाबा तारकनाथ के आशीर्वाद वाली इस पवित्र भूमि पर आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि चुनाव और शपथ ग्रहण के बाद जनता के बीच आने का यह उनका पहला अवसर है और उन्हें बंगाल में बदलाव की नई ऊर्जा और नई उम्मीद दिखाई दे रही है।प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंग दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि बंगाल के संघर्ष, त्याग, विरासत और अस्मिता का स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद बंगाल के उज्ज्वल भविष्य का जो सपना देखा गया था, अब पहली बार वह साकार होता दिखाई दे रहा है और राज्य एक नए इतिहास की ओर बढ़ रहा है।इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने रेलवे, कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्रों से जुड़ी अनेक विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 23वीं किस्त जारी करते हुए देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से राशि हस्तांतरित की।प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस की सरकारों के कारण पश्चिम बंगाल विकास की दौड़ में पीछे चला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सरकारों ने राज्य की प्रगति की राह में बाधाएं खड़ी कीं, जबकि अब डबल इंजन सरकार तेजी से विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि रेल, सड़क, कृषि और मत्स्य पालन से जुड़ी नई परियोजनाएं राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाएंगी।मोदी ने कहा कि औपनिवेशिक शासन और विभाजन के दौरान बंगाल ने अत्यंत कठिन दौर देखा। वर्ष 1946 के कोलकाता हिंसा और नोआखाली दंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य ने भारी पीड़ा और बलिदान झेले, लेकिन अपनी सांस्कृतिक पहचान और अस्मिता को बचाए रखा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल का गठन उन प्रयासों का परिणाम था, जिनके कारण पूरे बंगाल को भारत से अलग करने की साजिश सफल नहीं हो सकी।प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर विभाजन के समय बंगाल की उपेक्षा करने का आरोप लगाया और कहा कि बाद के वर्षों में तुष्टिकरण की राजनीति ने राज्य को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को भी राजनीतिक कारणों से पर्याप्त सम्मान नहीं दिया गया।उन्होंने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और ईश्वरचंद्र विद्यासागर जैसी महान विभूतियों की धरती पर दशकों तक ऐसी नीतियां लागू की गईं, जिन्होंने राज्य की मूल पहचान को कमजोर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य को अवैध घुसपैठियों का अड्डा बनने दिया गया, जिससे संसाधनों और अवसरों पर दबाव बढ़ा।प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्षों के कुशासन के कारण बड़े उद्योगों का पलायन हुआ, छोटे उद्योग बंद होते गए और युवाओं के रोजगार के अवसर कम हुए। उन्होंने कहा कि कभी अवसरों की भूमि माना जाने वाला पश्चिम बंगाल पलायन का केंद्र बन गया था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। भाजपा सरकार बनने के बाद जनता को उनके अधिकारों का लाभ सीधे मिलना शुरू हुआ है।उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया रोक रखी थी, जिसे अब आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि जिन लोगों ने जनता का पैसा लूटा था, वे अब उसे वापस कर रहे हैं और भ्रष्टाचार में शामिल बड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।किसानों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘खेत बचाओ अभियान’ की चर्चा की और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी।अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि वह स्वयं इस बार पश्चिम बंगाल में योग दिवस कार्यक्रम में भाग लेंगे। उन्होंने देश और दुनिया के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में योग दिवस आयोजनों में शामिल होने की अपील की।
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