11 साल की उम्र, बड़े सपने : बोमन ईरानी ने सुनाया अपने सफर का भावुक किस्सा

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। वेटरन एक्टर और किस्सागो बोमन ईरानी ने हाल ही में सप्यारल बाउंड की कामयाबी का जश्न मनाया। ये उनका शुरू किया हुआ एक ऐसा इनिशिएटिव है जो राइटर्स को पंख देता है और कहानियों को अपनी आवाज़। आज ये सिर्फ प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक ऐसी कम्युनिटी बन चुका है जहां लोग खुद को एक्सप्रेस करना, कॉन्फिडेंस बनाना और स्टोरीटेलिंग के जरिए जुड़ना सीखते हैं।

इस खास शाम पर माहौल तब और इमोशनल हो गया जब बोमन ने अपनी जर्नी की जड़ें शेयर कीं। एक ऐसी शुरुआत, जो बहुत सिंपल थी… लेकिन बेहद गहरी, और जिसकी असली हीरो थीं उनकी मां।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे 11 साल की उम्र में ही फिल्मों के बारे में वो सब पता था जो शायद उस उम्र में नहीं पता होना चाहिए! मेरी मां एक दुकानदार थीं, विधवा थीं… दिनभर दुकान में मेहनत करती थीं… लेकिन फिर भी ये पक्का करती थीं कि मैं फिल्में देख रहा हूं।”

अपने पिता की यादों को फिल्मों से जोड़ते हुए उन्होंने बताया, “वो मुझे पापा की फेवरेट फिल्मों की कहानियां सुनाती थीं। ‘ये तुम्हारे पापा की पसंदीदा फिल्म थी… ये Rear Window है… जाओ देखो, पूरी फिल्म एक ही नजरिए से है।’ मुझे नहीं पता उन्हें ये सब कैसे पता था… लेकिन पता था!”

अपने बचपन की तस्वीर खींचते हुए उन्होंने कहा, “ग्रांट रोड पर एक नॉवेल्टी सिनेमा था… वहां हमने बहुत शानदार फिल्में देखीं। मैं तो अपनी दुकान की दीवार से कान लगाकर भी फिल्में सुनता था, क्योंकि थिएटर उससे जुड़ा हुआ था! और 11 साल की उम्र में, मैं एक 70 साल के अंकल को El Cid दिखाने ले गया… फिल्म चल रही थी और मैं उनके पास बैठकर हर सीन, हर मोमेंट उन्हें समझा रहा था… क्योंकि फारूद अंकल देख नहीं सकते थे।”

यही पल उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया।

“मेरी मां को ये बिल्कुल सही लगा कि 11 साल का बच्चा एक ब्लाइंड इंसान को फिल्म दिखाने ले जाए। उस दिन उन्होंने मुझे ताकत दी… और मैंने समझ लिया कि ये शर्मीला बच्चा अब शर्मीला नहीं रहेगा। एक दिन ये कहानियां सुनाएगा।”

उनकी ये बातें वहां मौजूद हर इंसान के दिल में उतर गईं। ये याद दिलाते हुए कि स्टोरीटेलिंग सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि जुड़ने, महसूस करने और यादों को जिंदा रखने का जरिया है। सप्यारल बाउंड के जरिए बोमन ईरानी आज भी उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। एक ऐसी जगह बनाकर जहां कहानियां सिर्फ लिखी नहीं जातीं… बल्कि जी जाती हैं।