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नोएडा श्रमिक हिंसा मामले में बिगुल मजदूर दस्ता के दो सदस्य गिरफ्तार

नोएडा : नोएडा में 13 अप्रैल को हुई श्रमिका हिंसा के मामले में पुलिस ने रविवार की देररात को दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनकी गिरफ्तारी इस घटना के मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद से हुई पूछताछ के बाद की गई है। दोनों बिगुल मजदूर दस्ता के सक्रिय सदस्य हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों 13 अप्रैल को नोएडा में मौजूद थे तथा मास्टरमाइंड से लगातार संपर्क में थे।पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के मीडिया प्रभारी विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि नोएडा पुलिस ने रविवार देर रात इस हिंसा के संदर्भ में हिमांशु ठाकुर पुत्र रामकुमार ठाकुर निवासी ग्राम नियर रुद्राक्ष गार्डन गढ़वाल जनपद उधम सिंह नगर हाल निवासी शालीमार गार्डन दिल्ली तथा सत्यम वर्मा पुत्र डॉ. लाल बहादुर वर्मा निवासी जनपद लखनऊ को थाना फेस-2 क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि दोनों बिगुल मजदूर दस्ता के सक्रिय सदस्य हैं। हिमांशु घटना के दिन नोएडा में मौजूद था और वह मास्टरमाइंड आदित्य आनंद के लगातार संपर्क में था। उन्होंने बताया कि दोनों को सोमवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार हिमांशु यू-ट्यूबर है।पुलिस ने इससे पूर्व आदित्य आनंद समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। अब इन दोनों की गिरफ्तारी को जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के बाद से पुलिस, एसटीएफ और खुफिया एजेंसियां लगातार मामले की तह तक जाने में जुटी हैं। पुलिस अधिकारियों को जांच में पता चला है कि हिमांशु ठाकुर एमए करने के बाद श्रमिकों की आर्थिक व अन्य समस्याओं को लेकर पीएचडी करने की तैयारी कर रहा था। वह इस संगठन से आकृति नाम की युवती के संपर्क में आने के बाद जुड़ा । आकृति को नोएडा पुलिस श्रमिक हिंसा मामले में पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।अधिकारियों के अनुसार, आकृति ने उसका संपर्क तमिलनाडु से गिरफ्तार हुए एक लाख के इनामी आदित्य आनंद से कराया था। आदित्य आनंद के साथ वह श्रमिकों के आंदोलन व जनसभा में आने जाने लगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार वह लगातार श्रमिकों के संपर्क में था, तथा वीडियो कॉल के माध्यम से भड़काने का काम कर रहा था। पुलिस सूत्र बताते हैं कि इस संगठन के लखनऊ स्थित कार्यालय पर भी नोएडा पुलिस ने छापेमारी की है। वही नोएडा श्रमिक हिंसा के मामले में शांति भंग की धारा में गिरफ्तार किए गए करीब 1000 श्रमिकों को पुलिस ने जेल से रिहा कर दिया है। रिहाई के दौरान शर्तें रखी गई है कि वे जेल से छूटने के बाद दोबारा कोई ऐसा अपराध ना करें, जिसे सार्वजनिक शांति भंग हो।