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मृगनयनी मध्य प्रदेश प्रदर्शनी-2026 : हस्तशिल्प और परंपरा का अनूठा संगम

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। रंग-बिरंगी कारीगरी, हाथों की बारीक नक्काशी और परंपरा की सुगंध से सजी ‘मृगनयनी मध्य प्रदेश प्रदर्शनी-2026’ इन दिनों शहरवासियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। “एक जिला एक उत्पाद” थीम पर आधारित इस हस्तशिल्प एवं हथकरघा मेले में प्रदेशभर से आए नामचीन शिल्पकार अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।

निरालानगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के माधव सभागार में आयोजित इस प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ गुरुवार को मुख्य अतिथि ऋतु सुहास (आईएएस, निदेशक, स्थानीय निकाय) ने किया। उद्घाटन अवसर पर कला एवं संस्कृति जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रिचा तिवारी के निर्देशन में ध्वनि फाउंडेशन के बच्चों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं। दक्षिता कपूर ने गणेश वंदना, दिव्या तिवारी ने “आज राधा को श्याम याद आ गया…” पर एकल नृत्य की धमाकेदार प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। वहीं ओशनिक, अंकिता, अद्विति ने कृष्ण भजन “भजे बृजके मण्डनम्…”, शिव स्तुति “शंकर अति…”, गढ़वाली लोकगीत “धना धना…” पर समूह नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया।

3 अप्रैल तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में लगभग 35 से 40 बुनकर और शिल्पकार अपनी स्वनिर्मित कलाकृतियों का प्रदर्शन और बिक्री कर रहे हैं। प्रदर्शनी प्रभारी अरविंद शर्मा ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य लखनऊवासियों को उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पाद उपलब्ध कराना तथा बुनकरों को व्यापार और रोजगार का सशक्त मंच प्रदान करना है।

पारंपरिक शिल्प की अनोखी झलक

मेला परिसर में मध्य प्रदेश की समृद्ध पारंपरिक कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। यहां 1930 के दशक की रेशम, किनार, चंदेरी, मलमल और कॉटन साड़ियां विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। महेश्वर की प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियां भी प्रदर्शनी में दर्शकों को खूब लुभा रही हैं।

इसके अलावा बाग प्रिंट की विशेष साड़ियां, पंचधातु एवं बेल मेटल की मूर्तियां, शिफॉन, मलबरी, क्रेप और कोसा सिल्क की साड़ियां, इंडिगो प्रिंट, हथकरघा की चादरें, जरी-जरदोजी, लकड़ी के खिलौने तथा ‘एक जिला एक उत्पाद’ के अंतर्गत चंदेरी वस्त्र भी यहां उपलब्ध हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी रहेगी धूम

प्रदर्शनी के दौरान बुनकर चौपाल, कार्यशालाएं, जरी-जरदोजी पर व्याख्यान, शहनाई वादन और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार यह प्रदर्शनी न केवल कला प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है, बल्कि स्थानीय लोगों को पारंपरिक हस्तशिल्प से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान कर रही है।