Surat : सूरत में 2017 में हुई एक छोटी-सी एटीएम गड़बड़ी ने बैंक ऑफ बड़ौदा को नौ साल बाद भारी आर्थिक हानि और कानूनी दंड का सामना कराना पड़ा है। स्थानीय ग्राहक के खाते से 10,000 रुपये न निकलने पर भी उसके खाते से पैसा कट गया था, जिसके चलते लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बैंक को लगभग 3.5 लाख रुपये का मुआवजा देना का आदेश सुनाया गया है। यह मामला उस समय की छोटी सी तकनीकी खामी का परिणाम था, लेकिन अब इसकी कीमत बैंक को करोड़ों के बराबर पहुंच गई है।फरवरी 2017 में सूरत के उधना इलाके में एक ग्राहक ने बैंक ऑफ बड़ौदा के अपने खाते से जुड़ी एसबीआई के एटीएम से मात्र 10,000 रुपये निकालने का प्रयास किया। परंतु, उस समय मशीन ने पैसे तो नहीं निकाले, न ही रसीद दी। इसके बावजूद, ग्राहक को एसएमएस के माध्यम से पता चला कि उसका खाता से 10,000 रुपये कट गए हैं। इस घटना के बाद ग्राहक ने तुरंत 21 फरवरी को बैंक की डुम्भल ब्रांच में लिखित शिकायत दी। इसके बाद, मार्च से मई 2017 तक उसने कई ईमेल भेजे, आरबीआई और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, और सीसीटीवी फुटेज के लिए आरटीआई भी दाखिल की। बावजूद इसके, कोई ठोस समाधान नहीं निकला।अंततः, 20 दिसंबर 2017 को ग्राहक ने कंज्यूमर फोरम में केस दर्ज कर दिया।सुनवाई के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा ने तर्क दिया कि चूंकि यह ट्रांजेक्शन एसबीआई का एटीएम था और उनके रिकॉर्ड में यह सफल दिख रहा है, इसलिए उनकी जिम्मेदारी नहीं बनती। लेकिन कंज्यूमर कमीशन ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कमीशन ने स्पष्ट किया कि बैंक को ट्रांजेक्शन का ठोस सबूत देना चाहिए था, और आरबीआई के नियम के मुताबिक, पैसे 5 दिनों के भीतर वापस करने चाहिए थे। लेकिन बैंक ने यह नहीं किया।कमीशन ने अपने अंतिम फैसले में बैंक को निर्देश दिया कि वह मूल 10,000 रुपये को 9% सालाना ब्याज दर से लौटाए। साथ ही, 5 दिनों के अंदर रिफंड न करने के कारण हुई देरी के लिए प्रति दिन 100 रुपये का मुआवजा भी देना होगा। कुल मिलाकर, 3,288 दिनों की देरी के कारण बैंक को 3,28,800 रुपये का हर्जाना चुकाने का आदेश दिया गया।साथ ही, मानसिक प्रताड़ना के लिए 3,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 2,000 रुपये अलग से दिए जाने का भी निर्देश दिया गया। इस तरह, बैंक को कुल मिलाकर लगभग 3.5 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ेगा।
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