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‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नया शुल्क ढांचा तय होने के बाद ही होंगे’

नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर अमेरिका के नए वैश्विक शुल्क ढांचा तैयार होने के बाद ही किए जाएंगे। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि अमेरिका की नई वैश्विक टैरिफ संरचना लागू होने के बाद भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।अधिकारी ने कहा, ” अंततः हर देश एक पैकेज के हिस्से के रूप में ऐसा समझौता करता है, जिसमें उसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले तुलनात्मक लाभ मिलता है।’’अमेरिका के साथ प्रस्तावित अंतरिक व्यापार समझौते पर अधिकारी ने कहा, “जब भी हम तैयार होंगे, अमेरिकी पक्ष नए टैरिफ आर्किटेक्चर के साथ तैयार होगा। वह इस समझौते सौदे पर हस्ताक्षर करने का उपयुक्त समय होगा।”आधिकारिक सूत्र ने बताया कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर किए जाने थे, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के कारण अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) टैरिफ अब अस्तित्व में नहीं है। अनुच्छेद 122 के तहत 10 फीसदी टैरिफ अब वैश्विक स्तर पर मौजूद हैं।आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत जिस भी समझौते पर हस्ताक्षर करेगा, वह टैरिफ संरचना के खिलाफ हस्ताक्षरित किया जाएगा। अमेरिका वैश्विक स्तर पर एक टैरिफ आर्किटेक्चर को फिर से बनाने की कोशिश कर रहा है। एक बार जब अमेरिका इसे बना लेगा, तो उस पर हस्ताक्षर करना बेहतर होगा। वास्तविक हस्ताक्षर तब किए जाएंगे जब विश्व स्तर पर टैरिफ की नई संरचना अमेरिका द्वारा की जाएगी।”अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, “हम रूसी तेल खरीद रहे हैं। रूस से कच्चे तेल की खरीदारी में और बढ़ोतरी हुई है।” कनाडा के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर दोनों पक्ष पहले से ही वर्चुअली चर्चा कर रहे हैं, जो इस महीने भी होने जा रहे हैं।उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक ढांचे को अंतिम रूप देने की घोषणा पिछले महीने की थी। इस ढांचे के तहत अमेरिका ने भारत पर शुल्क 18 फीसदी तक कम करने पर सहमति जताई थी, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक शुल्क को निरस्त करने के बाद ट्रंप ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर फिलहाल 10 फीसदी शुल्क लागू कर दिया है।