समाज को संस्कार और राष्ट्रीय चेतना से भी जोड़ती हैं पुस्तकें : योगेंद्र उपाध्याय
लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। पुस्तकें मित्र, मार्गदर्शक और गुरु सरीखी हैं। इस पुस्तक मेले में सभी महाविद्यालयों के विद्यार्थी आएं। विभागीय निर्देश देने के साथ यह आह्वान उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने लखनऊ पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुए किया। रवीन्द्रालय चारबाग मुख्य लान में शुक्रवार से 10 दिवसीय लखनऊ पुस्तक मेला प्रारंभ हो गया। मेले में हर किताब पर न्यूनतम 10 प्रतिशत छूट मिलेगी।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री ने पुस्तक मेले में लगे विभिन्न प्रकाशकों के स्टॉलों का अवलोकन किया तथा विविध विषयों से संबंधित पुस्तकों को देखा। उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान के संचित भंडार का प्रतिनिधित्व करती हैं और समाज को संस्कार, विचार और दिशा प्रदान करती हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि साहित्य किसी भी भाषा और समाज के सम्मान का आधार होता है। विद्वानों और चिंतकों द्वारा लिखे गए विचार जब पुस्तकों के रूप में संकलित होते हैं तो वे आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का अमूल्य स्रोत बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले का आयोजन इस दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ही स्थान पर विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध होने से पाठकों को व्यापक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय विषय विशेष की शिक्षा प्रदान करते हैं, किंतु सर्वांगीण ज्ञान का विस्तार पुस्तकों के अध्ययन से ही संभव है। इसलिए पुस्तकों को मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र, मार्गदर्शक और गुरु कहा गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं पुस्तक मेले में आकर विभिन्न विषयों की पुस्तकों का अध्ययन करें और अपने ज्ञान का विस्तार करें।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज के समय में तकनीक और मोबाइल का उपयोग बढ़ा है, किंतु इसके साथ-साथ पुस्तकों के अध्ययन की परंपरा को भी जीवित रखना आवश्यक है। भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों को समझने के लिए साहित्य और पुस्तकों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। पुस्तकें न केवल ज्ञान देती हैं बल्कि समाज को संस्कार और राष्ट्रीय चेतना से भी जोड़ती हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति “वसुधैव कुटुंबकम्” के सिद्धांत पर आधारित है और साहित्य इस विचार को समाज में जीवंत बनाए रखने का कार्य करता है। पुस्तक मेले जैसे आयोजन समाज में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं और नई पीढ़ी को सकारात्मक विचारों की ओर प्रेरित करते हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री ने मैकाले की शिक्षा पद्धति की आलोचना करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति का ज्ञान जरूरी है। इस मेले में ज्ञान विज्ञान का संचय है और एक ही जगह हर विषय की किताबें हैं। संरक्षक मुरलीधर आहूजा ने कहा कि हर घर में किताबों का संग्रह होना चाहिए। संरक्षक टीपी हवेलिया ने कहा पुस्तकें विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
नवीन शुक्ल के संचालन में चले उद्घाटन समारोह में सभी का आभार व्यक्त करते हुए संयोजक मनोज सिंह चंदेल ने बताया कि उच्च शिक्षा मंत्री के निवेदन पर इस वर्ष आगरा में पुस्तक मेला लगाएंगे। मेला निदेशक आकर्ष चंदेल व यूपी त्रिपाठी ने भी विचार व्यक्त किये।

विजन-2047 के अंतर्गत विकसित भारत विकसित प्रदेश धीम और मुफ़्त प्रवेश वाले किताबों के इस मेले में नई टेक्नालॉजी से छपी पुस्तकों के साथ मेले में डिजिटल टेक्नालॉजी से जुड़े प्रकाशन उत्पाद हैं। साथ ही स्टेशनरी, शिक्षकों, स्कूलों के लिए उपयोगी सामग्री के स्टाल हैं। मेले के लगभग 60 स्टालों में में बहुत से नये भागीदार शामिल हैं।
प्रमुख भागीदारों में नेशनल बुक ट्रस्ट, हिन्द युग्म, शुभी पब्लिकेशंस गुरुग्राम, उपकार प्रकाशन, निखिल पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स आगरा, भारतीय कला प्रकाशन, रितेश बुक, अदित्रि बुक सेंटर, बेस्ट बुक्स, त्रिदेव बुक्स, आर्यन बुक, उर्दू के विलायत पब्लिकेशंस नई दिल्ली, ग्रीन पाम दिल्ली, लखनऊ के दिव्यांश पब्लिकेशंस, बोधरस प्रकाशन, रामकृष्ण मठ, बीइंग बुकिश, देवेंद्र बुक्स, नमन प्रकाशन, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान आदि शामिल हैं।

मेले में दिनकर पुस्तकालय भागलपुर के स्टाल पर पेंगुइन, हार्पर, वेस्टलैंड, राजकमल, वाणी, राजपाल, प्रभाकर प्रभात, पंक्ति व अन्य प्रकाशकों की बेस्ट सेलर्स किताबें भी उपलब्ध होंगी। साथ ही एंजल बुक हाउस रायपुर, शर्मा बुक प्रयागराज, श्रीजी बुक व एनके बुक जयपुर, द बुक ग्लोब सोहना और वैष्णवी बुक्स कानपुर के स्टाल भी हैं।
मेले में कवि सम्मेलन- मुशायरे का आनन्द लेने के साथ लोगों को लेखकों-कवियों के साथ बात करने के मौके मिलेंगे ही साथ ही पुस्तक प्रेमियों के लिए स्थानीय लेखकों की पुस्तकों के लिए भी एक स्टाल है।

फोर्स वन बुक्स के साथ यूपीएमआरसी, बिग एफएम, रायल कैफे, ओरिजिंस, विजय स्टूडियो, ज्वाइन हैण्ड्स फाउण्डेशन, लोकआंगन, विश्वम फाउंडेशन, समग्र एंटरप्राइज़ेज, किरन फाउंडेशन, सिटी एसेंस, ट्रेड मित्र बीरस्पार्क आदि के सहयोग से हो रहे मेले में अवधी व्यंजनों का उत्सव भी खास होगा।
वंदे मातरम् के डेढ़ सौ वर्षों के उपलक्ष्य में युवा कलाकार 15 फीट कैनवस पर चित्र बनाएंगे। नयी पीढ़ी में पुस्तकों के प्रति लगाव पैदा करने के मकसद से मेले में स्कूल- कालेजों के विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है। यहां उनके विभिन्न कार्यक्रमों के संग प्रतियोगिताओं का आयोजन भी होगा। मेले में पार्किंग की समुचित व्यवस्था है।
14 मार्च के कार्यक्रम
- पूर्वाह्न 11:00 बजे – पुस्तक लोकार्पण- नवसृजन प्रकाशन
- अपराह्न 3:30 बजे – डा.शिप्रा की किताब पर चर्चा
- शाम 5: 00 बजे – कार्यक्रम आर्थर्स अड्डा
- शाम 5:30 बजे : पुस्तक लोकार्पण -अवध के मंदिर
- शाम 7:30 बजे : काव्य गोष्ठी – साहित्य साधक
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