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हायरार्की से एजाइल मॉडल तक: बदलते शहरों के साथ बदलता रियल एस्टेट संगठन

लेखिका : मेघा गोयल (CHRO, गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड)

रियल एस्टेट उद्योग में असली परिवर्तन तब शुरू होता है जब रणनीति और क्रियान्वयन एक-दूसरे से जुड़ते हैं, जब स्पष्ट सोच जमीन पर ठोस परिणामों में बदलने लगती है। आज भारत के शहर तेजी से बदल रहे हैं; वे पहले से कहीं अधिक गतिशील, जटिल और महत्वाकांक्षी हो चुके हैं। ऐसे समय में रियल एस्टेट कंपनियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपने संगठनात्मक ढांचे और कार्यशैली को भी उसी गति से बदलें। जो मॉडल कभी स्थिर और अनुमानित माहौल में प्रभावी थे, वे आज की तेज़, प्रतिस्पर्धी और बहु-स्तरीय वास्तविकता में उतने कारगर नहीं रह गए हैं।

लंबे समय तक इस क्षेत्र में संगठनात्मक संरचना स्थिरता और नियंत्रण पर आधारित रही। पदानुक्रमित व्यवस्था अनुशासन बनाए रखती थी, विभागीय विभाजन विशेषज्ञता की रक्षा करते थे और क्रमिक मंज़ूरी की प्रक्रिया नियंत्रण का साधन थी। यह व्यवस्था तब उपयुक्त थी, जब प्रोजेक्ट चक्र लंबे होते थे और विस्तार धीरे-धीरे होता था। लेकिन जैसे-जैसे कंपनियां कई शहरों में तेजी से विस्तार कर रही हैं और प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी तथा जवाबदेही बढ़ रही है, पारंपरिक ढांचे की सीमाएं भी स्पष्ट होती जा रही हैं।

आज नियंत्रण का अर्थ केवल अधिक परतें जोड़ना नहीं रह गया है। असली मजबूती तब आती है, जब क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति उस स्थान के करीब लाई जाए जहां वास्तविक मूल्य पैदा होता है यानी प्रोजेक्ट साइट पर। इसलिए भविष्य का रियल एस्टेट संगठन विभागों के आधार पर नहीं, बल्कि परिणामों और परियोजनाओं के आधार पर संगठित होगा।

इस नए मॉडल में क्रॉस-फंक्शनल टीमें अहम भूमिका निभाती हैं। डिज़ाइन, इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कमर्शियल और सेल्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक ही टीम में मिलकर किसी प्रोजेक्ट या क्षेत्र की पूरी जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज़ होती है, विभागीय टकराव कम होते हैं और संभावित जोखिम शुरुआती चरण में ही सामने आ जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि संबंधित टीम का ध्यान अपने-अपने विभाग की सफलता के बजाय पूरे प्रोजेक्ट की सफलता पर केंद्रित हो जाता है। जब स्वामित्व साझा होता है, तो जवाबदेही भी स्पष्ट होती है और सहयोग स्वाभाविक रूप से बढ़ता है।

हालांकि यह परिवर्तन नेतृत्व से भी नई अपेक्षाएं करता है।

तेज़ निर्णय, कड़े लागत नियंत्रण, गहरी तकनीकी समझ और मजबूत क्रियान्वयन अनुशासन- ये केवल प्रेरक शब्द नहीं रह सकते। इन्हें संगठनात्मक ढांचे और कार्यप्रणाली का वास्तविक हिस्सा बनाना होगा।

इस बदलाव का मूल सिद्धांत सरल है- रणनीति मुख्यालय में तैयार होती है, लेकिन उसका असली जीवन साइट पर होता है। आज हर प्रोजेक्ट एक छोटे उद्यम की तरह काम करता है, जहां ठेकेदारों का प्रबंधन, नियामकीय प्रक्रियाएं, डिज़ाइन में बदलाव, विक्रेता प्रदर्शन, ग्राहक प्रतिबद्धताएं और पूंजी दक्षता – सब कुछ एक साथ संतुलित करना पड़ता है। ऐसे माहौल में हर छोटी समस्या को ऊपर भेजना अक्सर उस गति को धीमा कर देता है जो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी होती है।

    यही कारण है कि आधुनिक और लचीली कार्यप्रणाली अपनाने वाले संगठन अलग तरीके से काम करते हैं। वे प्रतिभा और निर्णय-शक्ति को वहीं स्थापित करते हैं, जहां वास्तविक काम हो रहा होता है। वे कार्यों को पारंपरिक ऊर्ध्वाधर पदानुक्रम के बजाय क्षैतिज सहयोग और समन्वय के माध्यम से जोड़ते हैं। समस्याओं को शुरुआती स्तर पर ही सुलझाने पर जोर दिया जाता है, ताकि निर्णय और उसके प्रभाव के बीच की दूरी कम हो और परियोजनाएं अधिक गति और दक्षता के साथ आगे बढ़ सकें।

लेकिन संगठनात्मक चुस्ती तभी संभव है, जब संस्थान अपने लोगों को वास्तविक सशक्तिकरण दें। सशक्तिकरण का अर्थ केवल जिम्मेदारी सौंपना नहीं है, बल्कि स्पष्ट सीमाओं और नियमों के भीतर निर्णय लेने का अधिकार देना है। जब साइट या प्रोजेक्ट नेतृत्व को तय दायरे में निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है, तभी काम की गति बढ़ती है और जवाबदेही भी मजबूत होती है। इसलिए प्रोजेक्ट या साइट नेतृत्व के पास- 

तय सीमा के भीतर वित्तीय निर्णय लेने का अधिकार

जोखिम नीति के अनुरूप अनुबंध करने की लचीलापन

रियल-टाइम डेटा और जानकारी तक सीधी पहुंच

और संगठन के अटल नियमों (नॉन-नेगोशिएबल्स) की स्पष्ट समझ

जब लोगों को यह स्पष्ट होता है कि उनकी जिम्मेदारी क्या है और उन्हें किस सीमा तक निर्णय लेने का अधिकार है, तो वे तेज़ी से प्रतिक्रिया देते हैं और स्वाभाविक रूप से जवाबदेही लेते हैं।

इस मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना आवश्यक है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन निर्णय लेगा, कौन सुझाव देगा और कौन उसे लागू करेगा। साझा डेटा प्लेटफॉर्म और डिजिटल सिस्टम विभिन्न शहरों और प्रोजेक्ट्स के बीच पारदर्शिता और समन्वय बढ़ाते हैं। इस तरह प्रशासनिक ढांचा बाधा बनने के बजाय प्रगति को तेज़ करने वाला माध्यम बन जाता है।

उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि हम प्रदर्शन को किस तरह मापते हैं। रियल एस्टेट संगठनों को अलग-अलग गतिविधियों की निगरानी से आगे बढ़कर समग्र परिणामों पर ध्यान देना होगा। जैसे समय पर प्रोजेक्ट पूरा होना, लागत की पूर्वानुमेयता, निर्माण की गुणवत्ता, ग्राहक अनुभव और जोखिम प्रबंधन। लंबे समय तक चलने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए दूरदर्शी सोच जरूरी है। इसलिए प्रदर्शन प्रणालियों को केवल संकट के बाद समाधान निकालने के बजाय पहले से योजना बनाने और जोखिम पहचानने की क्षमता को भी महत्व देना चाहिए।

डिजिटल तकनीक इस परिवर्तन को और मजबूत बनाती है। बीआईएम आधारित समन्वय, एकीकृत योजना प्लेटफॉर्म और लाइव डैशबोर्ड पारंपरिक रिपोर्टिंग पर निर्भरता को कम करते हैं। जब जानकारी सभी के लिए उपलब्ध होती है, तो निर्णय अधिक आत्मविश्वास के साथ विकेंद्रीकृत किए जा सकते हैं। तकनीक मानव निर्णय-क्षमता की जगह नहीं लेती, बल्कि उसे और प्रभावी बनाती है।

महिला दिवस के अवसर पर यह बदलाव केवल प्रबंधन की रणनीति नहीं, बल्कि एक मानवीय दृष्टिकोण भी बन जाता है। विविध नेतृत्व संगठन को अधिक संतुलित, संवेदनशील और प्रभावी बनाता है। आज महिलाएं डिज़ाइन नवाचार, ग्राहक अनुभव, प्रशासन और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में परिवर्तन की अग्रणी बन रही हैं। लचीले और एजाइल संगठनात्मक ढांचे महिलाओं को साइट नेतृत्व संभालने, वित्तीय जिम्मेदारी लेने और प्रोजेक्ट के शुरुआती चरणों में निर्णायक भूमिका निभाने के अधिक अवसर देते हैं।

दरअसल, नेतृत्व की असली जिम्मेदारी टीमों और निर्णयों के बीच, विशेषज्ञता और क्रियान्वयन के बीच, तथा उद्देश्य और परिणामों के बीच की दूरी को कम करना है। एजाइल संगठनात्मक मॉडल यही काम करता है। और जब अधिक महिलाएँ निर्णय-मंच और प्रोजेक्ट साइट दोनों पर नेतृत्व करती हैं, तो संगठन अधिक समावेशी सोच और व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते हैं। 

यह सिर्फ काम करने का नया तरीका नहीं, बल्कि वह भविष्य है, जिसे हमें दूरदृष्टि, साहस और स्पष्ट उद्देश्य के साथ आज ही गढ़ना होगा।

(लेखिका मेघा गोयल गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड CHRO हैं और ये उनके निजी विचार हैं)