भुवनेश्वर (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बिरला ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया के सहयोग से “ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ हायर एजुकेशन इन द एज ऑफ एआई” विषय पर एक लीडरशिप कॉन्क्लेव का आयोजन किया। इस कॉन्क्लेव में ओडिशा के 26 यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य यह समझना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) किस तरह छात्रों के सीखने के तरीकों और शिक्षण पद्धतियों को बदल रहा है।
कॉन्क्लेव के दौरान प्रारंभिक शिक्षा में मौजूद कमियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण ज्ञान देने के तरीकों में आ रहे बदलावों पर चर्चा की गई। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि शिक्षा में एआई का उपयोग निष्पक्षता, जिम्मेदारी, बहु-विषयक सोच और सहयोगात्मक शिक्षा के साथ होना चाहिए।
चर्चा के दौरान एक महत्वपूर्ण अवधारणा ओडिशा यूनिवर्सिटी कॉम्पैक्ट सामने आई। यह एक सहयोगात्मक मॉडल है, जिसमें अलग-अलग यूनिवर्सिटियों ने अपनी स्वतंत्रता बनाए रखते हुए आपस में मिलकर काम कर सकते हैं। इस मॉडल के तहत यूनिवर्सिटी की सुविधाएँ को साझा कर सकते हैं, फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम चला सकते हैं और बहु-विषयक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग शैक्षणिक समूह बना सकते हैं। इसके माध्यम से छात्रों को साझेदार विश्वविद्यालयों से अलग-अलग पाठ्यक्रम चुनने की सुविधा भी मिलेगी, जिससे उच्च शिक्षा और अधिक लचीली बनेगी।
ओडिशा यूनिवर्सिटी कॉम्पैक्ट की अवधारणा एकलव्य मॉडल के अनुरूप है। यह मॉडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग और पोर्टफोलियो आधारित लर्निंग जैसे नवाचारपूर्ण शिक्षण तरीकों के साथ जोड़ता है। साथ ही यह छात्रों को छोटे-छोटे लर्निंग मॉड्यूल और शैक्षणिक कार्यों के माध्यम से क्रेडिट अर्जित करने का अवसर देता है, जिससे माइक्रो लर्निंग उपलब्धियों को भी मान्यता मिलती है।
इन पहलों का उद्देश्य पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाना है, जिसमें सहयोगात्मक शिक्षा, कौशल आधारित शिक्षा और एआई युग के अनुरूप अकादमिक विकास को बढ़ावा दिया जाए।
कॉन्क्लेव में शोध, शिक्षा और उद्योग जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। डॉ. मनोहर स्वामीनाथन (सीनियर प्रिंसिपल रिसर्चर, माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया) ने प्लुरिवर्सिटी कॉम्पैक्ट पर तकनीकी कार्यशालाएँ आयोजित कीं और प्रतिभागियों को उन्नत एजेंटिक एआई तकनीकों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि ये तकनीकें भविष्य में पाठ्यक्रम और एडैप्टिव लर्निंग वातावरण को प्रभावित कर सकती हैं।
दीवाकर गुप्ता (केपीएमजी इंडिया) ने शिक्षा और रोजगार क्षेत्रों में एआई से जुड़े नियामक वातावरण पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर प्रोफेसर रंगिन पी. त्रिपाठी (रजिस्ट्रार, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ओडिशा), प्रोफेसर श्रीदेवी गुडा (प्रो-वाइस चांसलर, सेंटूरियन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट) और डॉ. संजय कुआनर (डीन, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, बिरला ग्लोबल यूनिवर्सिटी) कई शिक्षाविद उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए। पुष्पक पात्रो (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डायनेमिकवेब, सिंगापुर) और डॉ. साई प्रसन्ना बेहरा (सीआरओ फार्मा ट्रेंड्ज) ने उद्योग में आवश्यक कौशलों के बदलते स्वरूप पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण “एजेंट्स फॉर एकेडेमिया” हैकाथॉन का पुरस्कार समारोह रहा। इस हैकाथॉन में छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अभिनव उपयोग से जुड़े कई नए विचार प्रस्तुत किए।
कॉन्क्लेव के अंत में एक सहयोगात्मक समूह के गठन की घोषणा की गई, जो शिक्षा प्रणाली में आवश्यक बदलाव लाने के लिए मिलकर काम करेगा। इस पहल का उद्देश्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करना और बिरला ग्लोबल यूनिवर्सिटी को एक अनुसंधान आधारित, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणाली विकसित करने में सहयोग देना है।
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