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भारतीय परंपरा में स्त्री ‘पूरक शक्ति’ हैं : प्रो. कुमुद शर्मा

नई दिल्ली : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने सोमवार को कहा कि भारतीय परंपरा में स्त्री को केवल ‘संख्या'(आधी आबादी) नहीं बल्कि ‘पूरक शक्ति’ माना गया है।कुमुद शर्मा ने यह बात नई दिल्ली स्थित इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के कलानिधि विभाग और वाणी प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में “दूरदर्शन: आधी आबादी की सशक्त गाथा” पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर कही। इस पुस्तक की लेखिका संगीता अग्रवाल हैं।मुख्यातिथि के रूप में उन्होंने कहा, “नारी के विमर्श में केवल उनके संघर्ष की चर्चा ही पर्याप्त नहीं बल्कि उनकी उपलब्धियों का उल्लेख भी अनिवार्य है।”कुमुद ने कहा कि आज मीडिया में जो स्त्रियां हैं, वो पुरुष के चैतन्य को कसौटी पर कस रही हैं। अब वे नीति-निर्माताओं में शामिल हैं। पूरे परिदृश्य में उनकी दृश्यता बहुत सशक्त है।आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि किसी भी चुनौतीपूर्ण और जोखिमपूर्ण विषय पर पुस्तक का प्रकाशन लेखक से कहीं अधिक साहस का कार्य होता है, क्योंकि आज समाज में पढ़ने वालों और विशेषकर पुस्तकें खरीदकर पढ़ने वालों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ जोशी ने की।इस मौके पर उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ आदिश सी अग्रवाल, आईजीएनसीए के विभागाध्यक्ष (कलानिधि) एवं डीन प्रो. (डॉ.) रमेश चन्द्र गौड़, वाणी प्रकाशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदिति माहेश्वरी, उप-निदेशक, आकाशवाणी की उप निदेशक प्रज्ञा देवड़ा और डीडी न्यूज लेखिका एवं हिंदी समाचार संपादक संगीता अग्रवाल मौजूद रहे।वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक ‘दूरदर्शन’ के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण और मीडिया में उनके योगदान की गौरवशाली यात्रा को रेखांकित करती है। यह न केवल दूरदर्शन के इतिहास को संजोती है बल्कि “आधी आबादी” के संघर्ष और सफलता की कहानियों को भी प्रमुखता से सामने लाती है।————-