लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश को फार्मास्यूटिकल और हेल्थकेयर विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के विजन के साथ मंगलवार को लखनऊ में ‘फार्मा कॉन्क्लेव 1.0’ का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस भव्य समारोह का उद्घाटन करते हुए देश-विदेश से आए निवेशकों को आश्वस्त किया कि उत्तर प्रदेश अब ‘बिजनेस-फ्रेंडली’ और ‘इन्वेस्टमेंट-रेडी’ राज्य के रूप में पूरी तरह रूपांतरित हो चुका है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रदेश अब केवल एक विशाल बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक विनिर्माण की एक बड़ी शक्ति बन गया है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, वरिष्ठ मंत्रियों और फार्मा जगत के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति में, उन्होंने वैश्विक एवं घरेलू फार्मा कंपनियों के साथ दीर्घकालिक व सतत साझेदारी के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और औद्योगिक प्रगति के प्रति राज्य सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।
कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने जटिल प्रक्रियाओं से आगे बढ़ते हुए दक्षता और पारदर्शिता आधारित शासन मॉडल को निर्णायक रूप से अपनाया है। इस परिवर्तन को संक्षेप में व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में अब रेड टेप नहीं, केवल निवेशकों के लिए रेड कार्पेट है। उन्होंने सड़क, रेल, हवाई मार्ग और डिजिटल नेटवर्क में हुए बड़े सुधारों की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) अब उद्योगों को बढ़ावा देने वाली सबसे बड़ी ताकत बन गया है।
प्रमुख पहलों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने ललितपुर बल्क ड्रग फार्मा पार्क तथा आगामी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट मेडिकल डिवाइस पार्क का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं राज्य में एक मजबूत, एंड-टू-एंड फार्मास्यूटिकल इकोसिस्टम के निर्माण के सरकार के स्पष्ट संकल्प को दर्शाती हैं। इन पहलों से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी, आयात पर निर्भरता घटेगी और फार्मा क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के महत्व पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने आईआईटी कानपुर, एसजीपीजीआई, सीबीआरआई और एनबीआरआई जैसे प्रमुख संस्थानों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये संस्थान उन्नत अनुसंधान और उद्योग–अकादमिक सहयोग को सशक्त समर्थन प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने पर्यावरणीय प्रगति, विशेष रूप से वन क्षेत्र में वृद्धि का भी उल्लेख किया। साथ ही, क्षेत्र-विशिष्ट प्रगतिशील नीतियों, निवेश मित्र सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम, व्यापक औद्योगिक लैंड बैंक, प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं और समयबद्ध प्रोत्साहनों को भी रेखांकित किया।
राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त व्यवस्था और सुदृढ़ कानून-व्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए सीएम योगी ने कहा कि इन सुधारों के कारण उत्तर प्रदेश ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हुआ है। उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र के तीव्र विकास, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) पहल, बढ़ते एफडीआई प्रवाह, दूरदर्शी फार्मा नीतियों, स्टार्टअप और कौशल विकास कार्यक्रमों तथा स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग पर भी प्रकाश डाला।
कॉन्क्लेव का एक प्रमुख आकर्षण फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में लगभग ₹10,000 करोड़ के निवेश से जुड़े समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर सहमती रही। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में कुल 11 एमओयू का आदान-प्रदान किया गया, जो उत्तर प्रदेश में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। प्रमुख निवेश प्रतिबद्धताओं में अर्ना फार्मा और बायोजेंटा लाइफसाइंसेज़ प्राइवेट लिमिटेड से ₹1,250 करोड़ प्रत्येक, शुक्रा फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड से ₹737 करोड़, वाल्टर बुशनेल एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड से ₹590 करोड़ तथा झानविका लैब्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹553 करोड़ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कोरो हेल्थ जीसीसी और मार्क लैबोरेट्रीज़ लिमिटेड द्वारा भी निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इन निवेशों से राज्य में रोजगार सृजन, नवाचार और हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री के साथ एक उच्चस्तरीय राउंड टेबल बैठक का भी आयोजन किया गया, जिससे वरिष्ठ फार्मास्यूटिकल उद्योग प्रतिनिधियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद संभव हो सका।
क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास रोडमैप को आकार देने के लिए विभिन्न इंटरैक्टिव और थीमैटिक सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय फार्मा संघों, निर्माताओं और उद्योग भागीदारों के साथ सार्थक संवाद हुआ, जबकि वन-टू-वन बैठकों ने नीति समर्थन, निवेश सुविधा, नवाचार और भविष्य की विस्तार रणनीतियों पर केंद्रित चर्चाओं को संभव बनाया।
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के तीव्र औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश देश की सबसे प्रतिस्पर्धी नीतियों और प्रोत्साहनों में से कुछ प्रदान कर रहा है, जिन्हें मजबूत कानून-व्यवस्था का समर्थन प्राप्त है, जिससे निवेशकों का विश्वास उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। उन्होंने दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स को उम्मीद और विश्वास का प्रतीक बताते हुए चिकित्सकों को जीवनरक्षक बताया तथा प्रभावी क्रियान्वयन के साथ समावेशी और सुव्यवस्थित औद्योगिक विकास पर जोर दिया।
उन्होंने निवेशक हैंडहोल्डिंग तंत्र, एफडीआई-अनुकूल नीतियों, बुंदेलखंड के केंद्रित विकास और ललितपुर बल्क ड्रग पार्क के रणनीतिक महत्व को भी रेखांकित किया। उत्तर प्रदेश के फार्मा हब के रूप में उभरने की पुनः पुष्टि करते हुए उन्होंने निवेशकों को सुरक्षित, संरक्षित और सहयोगी निवेश वातावरण का आश्वासन दिया।
कॉन्क्लेव में अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक विकास एवं एमएसएमई आलोक कुमार ने “डेस्टिनेशन उत्तर प्रदेश” पर प्रस्तुति दी। उन्होंने निर्यात, एमएसएमई, ओडीओपी, बिजली उपलब्धता, जीएसडीपी वृद्धि, जनसांख्यिकीय लाभांश, लैंड बैंक और उत्कृष्ट कनेक्टिविटी सहित राज्य की आर्थिक मजबूती को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को 6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के विज़न को प्रस्तुत किया, जिसे सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर और बिज़नेस-फ्रेंडली शासन का समर्थन प्राप्त है।
फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 में भारत की प्रमुख फार्मास्यूटिकल कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्व की भागीदारी रही। जिनमें सन फार्मा के चेयरमैन पद्म श्री दिलीप सांघवी, ज़ायडस लाइफसाइंसेज़ के चेयरमैन पद्म भूषण पंकज आर. पटेल, मैनकाइंड फार्मा के चेयरमैन रमेश जुनेजा, डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेट्रीज़ के चेयरमैन डॉ. सतीश रेड्डी, टोरेंट ग्रुप के वाइस चेयरमैन जिनल मेहता तथा रामकी ग्रुप के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। इन उद्योग अग्रणियों ने उत्तर प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग विस्तार, नवाचार-आधारित विकास, नियामक सुविधा और उभरते निवेश अवसरों पर केंद्रित चर्चाओं में भाग लिया, जो राज्य की फार्मा क्षमता में उद्योग के मजबूत विश्वास को दर्शाता है।
“प्रतिस्पर्धी फार्मा इकोसिस्टम – इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और विनियमन” तथा “फार्मा, मेडिकल डिवाइस और जीसीसी सेक्टर: अनुसंधान और नवाचार” विषयों पर आयोजित सत्रों में उद्योग विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों की सक्रिय भागीदारी रही। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश परिवर्तन का उत्प्रेरक बनकर उभरा है और उसने नवाचार, मैन्युफैक्चरिंग तथा निवेश को समर्थन देने वाला एक परिवर्तित इकोसिस्टम तैयार किया है।
चर्चाओं के दौरान यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के सीईओ राकेश सिंह ने डिवाइस पार्क की खूबियाँ व् उसके महत्व बताये तथा इन्वेस्ट यूपी व यूपीसीडा (UPSIDA) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद ने राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और औद्योगिक भूमि की प्रचुर उपलब्धता पर विस्तार से प्रकाश डाला। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की सचिव रोशन जैकब ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर खाद्य सुरक्षा, औषधि प्रशासन एवं आयुष मंत्री दया शंकर मिश्रा ‘दयालु’ की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। विचार-विमर्श के सत्र का समापन करते हुए मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जी.एन. सिंह ने उत्तर प्रदेश की विशाल फार्मा बाजार क्षमता, प्रगतिशील नीतियों और उभरते अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने राज्य को फार्मास्यूटिकल और हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया।
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