Sunday , January 25 2026

अक्षरधाम मंदिर हमला मामले में तीन को बरी किए जाने को जमीअत ने न्याय की जीत बताया

नई दिल्ली : जमीअत उलमा-ए-हिंद की निरंतर कानूनी संघर्ष के परिणामस्वरूप अक्षरधाम मंदिर हमला मामले में उन तीन आरोपितों को भी बाइज्ज़त बरी कर दिया गया है, जिन्हें बाद में गिरफ्तार किया गया था। यह मुक़दमा अहमदाबाद की विशेष पोटा अदालत में चला, जहां सुनवाई के बाद पोटा अदालत के विशेष न्यायाधीश ने यह टिप्पणी करते हुए उन्हें बाइज्ज़त रिहा कर दिया कि इससे पहले उच्चतम न्यायालय भी अपर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर सज़ायाफ़्ता अभियुक्तों को निर्दोष ठहराते हुए रिहा कर चुका है। जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने पोटा अदालत के इस ताज़ा फैसले का स्वागत करते हुए इसे इंसाफ़ की जीत क़रार दिया।अपने एक बयान में उन्होंने कहा कि यह बात अत्यंत संतोषजनक है कि पोटा अदालत ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को नज़ीर के तौर पर अपने सामने रखा, जिससे निर्दोष लोगों की रिहाई संभव हो सकी। उन्होंने कहा कि यह लोग निर्दोष थे, क्योंकि जब अक्षरधाम मंदिर पर हमला हुआ था, उस समय यह वहां मौजूद ही नहीं थे, फिर भी उन्हें अभियुक्त बना दिया गया। उन्होंने इस बात पर गहरा दुःख व्यक्त किया कि निर्दोष होते हुए भी इन लोगों को इंसाफ़ पाने में छह वर्ष लग गए, जो हमारे न्यायिक तंत्र की कमज़ोरियों को उजागर करता है।जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि निराशाजनक पहलू यह है कि वर्तमान परिस्थितियों में एक विशेष समुदाय के लिए न्याय प्राप्त करना भले असंभव न हो लेकिन यह अत्यंत कठिन जरूर है। इस प्रक्रिया में निर्दोष लोगों की ज़िंदगी के बहुमूल्य दिन जेल की अंधेरी कोठरियों में नष्ट हो जाते हैं, लेकिन इसके लिए किसी की जवाबदेही तय नहीं की जाती। परिणामस्वरूप ऐसे कार्य करने वालों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं।मौलाना मदनी ने अंत में कहा कि हमारी नज़र में यह इंसाफ़ तब तक अधूरा है, जब तक जवाबदेही तय नहीं की जाती और निर्दोष लोगों की ज़िंदगी तबाह करने वालों को सज़ा नहीं दी जाती। जब तक ऐसा नहीं होगा, इस दुर्भाग्यपूर्ण सिलसिले का अंत संभव नहीं है। कानून की आड़ में इस तरह निर्दोष लोगों की ज़िंदगियों से खिलवाड़ होता रहेगा। निर्दोष मुसलमानों की ज़िंदगियों से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ और उनके चेहरों से नक़ाब उठाने के लिए जमीअत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में बरी किए गए अभियुक्तों की ओर से मुआवज़े और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए भी याचिका दायर की थी। इस पर विभिन्न चरणों में सुनवाई चल रही है।