नई दिल्ली : देश में जलमार्गों के विकास को नई दिशा देने के लिए अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी) की तीसरी बैठक 23 जनवरी को कोच्चि, केरल में होगी। इस बैठक में अब तक की उपलब्धियों पर चर्चा की जाएगी और आने वाले समय की योजना तय की जाएगी।केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि बैठक की अध्यक्षता मंत्री सर्बानंद सोनोवाल करेंगे। इस बैठक में उनके साथ राज्य मंत्री शंतनु ठाकुर और कई राज्यों के मंत्री भी शामिल होंगे। इस दौरान नई पहल शुरू की जाएगी और केंद्र तथा राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते किए जाएंगे।बैठक में शहरी जल परिवहन को मजबूत बनाने, माल ढुलाई को आसान करने, पर्यावरण अनुकूल जहाजों को बढ़ावा देने, नदी पर्यटन को आगे बढ़ाने और डिजिटल तरीकों को अपनाने पर चर्चा की जाएगी। साथ ही नियमों की समीक्षा और राज्यों की चिंताओं पर भी विचार किया जाएगा।सरकार ने 2025 से 2030 के बीच उत्तर पूर्व में जलमार्ग विकास के लिए 5000 करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है। 1152 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पहले से चल रहे हैं। कोच्चि बैठक में डिब्रूगढ़ में उत्कृष्टता केंद्र, पांडु में जहाज मरम्मत सुविधा और हरित जहाजों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही बोगीबील नदी बंदरगाह तक पहुंच मार्ग और उजान बाजार घाट पर पर्यटक जेट्टी की घोषणा भी हो सकती है।उल्लेखनीय है कि देश में जलमार्गों का बड़ा नेटवर्क है, जहां हर साल 145 मिलियन टन से ज्यादा माल ढोया जाता है। यह तरीका रेल और सड़क से सस्ता और पर्यावरण के लिए बेहतर है। अभी 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 32 पर माल और यात्री परिवहन हो रहा है। पिछले 10 सालों में जलमार्गों पर माल ढुलाई 18 मिलियन टन से बढ़कर 145.84 मिलियन टन हो गई है। यात्री संख्या भी 7.64 करोड़ तक पहुंच गई है। ‘जलवाहक’ और ‘जल समृद्धि’ जैसी योजनाओं ने इस क्षेत्र को और तेज गति दी है। असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने राष्ट्रीय जलमार्ग 2 ने उत्तर पूर्व में परिवहन का नया मॉडल पेश किया है। यहां पांडु, जोगीघोपा, धुबरी और बोगीबील जैसे टर्मिनल काम कर रहे हैं। असम का 98 प्रतिशत माल इसी मार्ग से जाता है।—————
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