Tuesday , January 13 2026

यूपी में स्थापित होंगी 62 एआई व डेटा लैब्स, 2,000 करोड़ से AI मिशन को मिलेगी मजबूती


लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। दो दिवसीय ‘’क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026’’कापहला दिनजिम्मेदार एवं समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर राष्ट्रीय और वैश्विक विमर्श का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा। जहां नीति-निर्माताओं, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, उद्योग जगत के नेताओं और शोधकर्ताओं ने क्षेत्रीय एआई एवं स्वास्थ्य नवाचार शिखर सम्मेलन के साथ-साथ आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण हेतु एआई पर कार्यसमूह की चौथी बैठक में भाग लिया। यह आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा इण्डिया एआई के सहयोग से तथा उत्तर प्रदेश सरकार के समर्थन से, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के व्यापक ढांचे के अंतर्गत किया गया।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन की शुरुआत उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें सार्वजनिक सेवा वितरण, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर भारत और उत्तर प्रदेश के दृष्टिकोण को रेखांकित किया गया, साथ ही इसके नैतिक, सुरक्षित और समावेशी अपनाने पर भी बल दिया गया।

इस सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितिन प्रसाद, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक, सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह सहित वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया। 

इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव, एनआईसी के महानिदेशक एवं इण्डिया एआई के सीईओ अभिषेक सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फेडरेटेड गवर्नेंस और वैश्विक साझेदारियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। जो एआई आधारित आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण को सक्षम बनाती हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित होने वाला एआई इम्पैक्ट समिट 2026 एआई से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों को एक मंच पर लाने का लक्ष्य रखता है। इसका उद्देश्य आम जनता और राज्य सरकारों में, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र में, एआई के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और संवेदनशील राज्य में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान केवल समयबद्ध, तकनीक-आधारित और उत्तरदायी मॉडल के माध्यम से ही संभव है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए हम प्रारंभिक निदान, क्रिटिकल केयर और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को सशक्त बना रहे हैं। हमारा लक्ष्य उत्तर प्रदेश को एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का राष्ट्रीय मॉडल बनाना है।

उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा, उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवा वितरण में एक परिवर्तनकारी बदलाव देखा है। चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने और देश के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक के निर्माण तक, हम भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य प्रणाली की नींव रख रहे हैं। इस यात्रा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी, जो प्रारंभिक निदान को सुदृढ़ करने, क्रिटिकल केयर में सुधार और डेटा-आधारित नीति निर्णयों को सक्षम बनाएगी। उत्तर प्रदेश एआई आधारित स्वास्थ्य समाधानों के लिए राष्ट्रीय पायलट बनने और भारत व विश्व के लिए एक मानक स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस के आयोजन पर राज्य सरकार को बधाई देते हुए, केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा, भारत डिजिटल प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में निरंतर एक वैश्विक अग्रणी के रूप में उभर रहा है। उत्तर प्रदेश तेजी से एक प्रमुख प्रौद्योगिकी गंतव्य बन रहा है, जहां डिजिटल अवसंरचना सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, साथ ही साइबर सुरक्षा, डीपफेक और डिजिटल साक्षरता जैसी चुनौतियों का सक्रिय रूप से समाधान किया जाए। आगामी एआई इम्पैक्ट समिट भारत के लिए गर्व का विषय है और देश को वैश्विक एआई सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा, एआई और स्वास्थ्य के संगम से उत्तर प्रदेश में जनकल्याण के नए मार्ग खुल रहे हैं। इण्डिया एआई मिशन के मार्गदर्शन में राज्य एआई संचालित स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल हेल्थ और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें। यह सम्मेलन राज्य के लिए एक समावेशी, एआई-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पहले दिन की एक प्रमुख घोषणा ने एआई क्षमताओं के विकेंद्रीकरण और राज्य-स्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। इण्डिया एआई मिशन ने उत्तर प्रदेश में 62 एआई एवं डेटा लैब्स की स्थापना की घोषणा की, जिससे राज्य की एआई अनुसंधान, कौशल विकास और तैनाती क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से मजबूती मिलेगी।

इसके अतिरिक्त, संस्थागत क्षमता को और बढ़ावा देते हुए, इण्डिया एआई मिशन और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच उत्तर प्रदेश एआई मिशन की स्थापना हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। जिसे 2,000 करोड़ के बजटीय प्रावधान का समर्थन प्राप्त है। यह राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप एक सशक्त, राज्य-नेतृत्व वाले एआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव, इण्डिया एआई मिशन के सीईओ और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों जैसे विशेषज्ञ देखभाल तक पहुंच, समय पर निदान और बड़े पैमाने पर सेवा वितरण के समाधान में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है। इण्डिया एआई मिशन के माध्यम से हम कंप्यूट क्षमता, स्वदेशी मॉडल, गवर्नेंस फ्रेमवर्क और पारिस्थितिकी तंत्र समर्थन की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं, ताकि विश्वसनीय एआई समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके। इस यात्रा में राज्य महत्वपूर्ण भागीदार हैं और उत्तर प्रदेश का नेतृत्व यह दिखा सकता है कि एआई-सक्षम स्वास्थ्य नवाचार भारत और ग्लोबल साउथ के लिए वास्तविक प्रभाव कैसे उत्पन्न कर सकते हैं।

क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य प्रणालियों में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और उभरते उपयोग मामलों पर विचार-विमर्श किया। जिनमें एआई आधारित निदान, स्वास्थ्य डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कार्यबल सशक्तिकरण, टेलीमेडिसिन और राज्य-स्तरीय तैयारी शामिल हैं। चर्चाओं में इस बात पर बल दिया गया कि कैसे भारत और उसके राज्य स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और उद्योग के नेतृत्व वाले नवाचार के साथ नीतिगत ढांचे को संरेखित कर, कम लागत और बड़े पैमाने पर एआई नवाचार में वैश्विक अग्रणी बन सकते हैं। 

कार्यसमूह सत्रों के दौरान सार्वजनिक सत्रों में उच्च-स्तरीय सिद्धांतों को व्यावहारिक कार्यान्वयन में बदलने के मार्गों पर चर्चा की गई। विशेष रूप से ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। पैनलों में प्रस्तावित ग्लोबल एआई इम्पैक्ट अवार्ड्स के डिजाइन पर भी चर्चा हुई, जिसे जिम्मेदार, संदर्भ-संगत और स्केलेबल एआई नवाचार को प्रोत्साहित करने के एक तंत्र के रूप में देखा गया।

इसके बाद आमंत्रित देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी के साथ एक बंद-द्वार कार्यसमूह सत्र आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने सुझावों को समेकित किया और इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 तक के अगले चरण के कार्यों पर सहमति बनाई। उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 और कार्यसमूह बैठक के पहले दिन के इन आयोजनों ने विश्वास, समावेशन और मापनीय प्रभाव पर आधारित वैश्विक एआई एजेंडा को आकार देने में भारत की बढ़ती नेतृत्व भूमिका को सुदृढ़ किया।