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हिन्दी रंगमंच के पुरोधा शरद नागर की स्मृतियों को किया नमन, बनेगी डॉक्यूमेंट्री

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। हिंदी रंगमंच, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. शरद नागर की 89वीं जयंती पर रविवार को यूपी प्रेस क्लब में आयोजित शरद स्मृति संध्या में साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े लोगों ने उन्हें याद किया और उनसे जुड़ी अपनी स्मृतियां साझा कीं। लोक संस्कृति शोध संस्थान के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने शरद नागर को हिंदी रंगमंच का पुरोधा बताते हुए उनके सांस्कृतिक अवदान को रेखांकित किया। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने की घोषणा भी की गई।

कलाविद् अशोक बनर्जी ने कहा कि हिंदी रंगमंच दिवस की खोज और उसकी व्यापक स्थापना शरद नागर के महत्वपूर्ण योगदानों में शामिल है। उनके प्रयासों से ही प्रतिवर्ष तीन अप्रैल को हिंदी रंगमंच दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। अमरेन्द्र सहाय ने शरद नागर से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए बताया कि अस्सी के दशक में भारतेंदु नाट्य अकादमी (बीएनए) में प्रवेश लेने के बाद उनका उनसे संपर्क हुआ। शरद नागर ने उन्हें शाहजहांपुर भेजा, जहां उन्होंने कोणार्क नाटक की कार्यशाला आयोजित की।

छायानट के पूर्व संपादक डॉ. एसके गोपाल ने कहा कि शरद नागर ने हिंदी रंगमंच के विकास के साथ साहित्यिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमृतलाल नागर के साहित्य के संग्रहण, संपादन और प्रकाशन के माध्यम से उन्होंने साहित्य जगत को समृद्ध विरासत सौंपी। शरद नागर की पुत्री और संचित स्मृति न्यास की सलाहकार डा. ऋचा नागर ने अपने पिता से जुड़ी स्मृतियां साझा करते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और रचनाधर्मिता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में नाट्य निर्देशक ललित सिंह पोखरिया, चित्रा मोहन, मुनालश्री विक्रम बिष्ट, कला समीक्षक राजवीर रतन, छायांकन कलाविद राकेश सिन्हा, सुभाष मिश्र, कठपुतली कलाकार प्रदीप त्रिपाठी, संगीतज्ञ आशा श्रीवास्तव, लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी, जादूगर सुरेश कुमार, मनु राय, डॉ. अनिल गुप्ता, अखिलेश द्विवेदी, सुशील चन्द्र श्रीवास्तव, तरुण कुमार, राजेन्द्र वर्मा, मिलन यादव, नरेन्द्र पंजवानी, नरेन्द्र वर्मा, डॉ. अपूर्वा अवस्थी और सोनल ठाकुर सहित साहित्य, कला एवं संस्कृति से जुड़े अनेक लोगों ने शरद नागर के साथ अपने अनुभव और स्मृतियां साझा कीं तथा उनके योगदान को याद किया।