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पंतनगर रामलीला : राम वन गमन और दशरथ विलाप ने दर्शकों को किया भावुक

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। पंतनगर सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित श्री रामलीला महोत्सव के द्वितीय दिवस राम वन गमन, केवट मिलन, सुमंत विलाप और राजा दशरथ के प्राण त्यागने के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावुक कर दिया। रामलीला के माध्यम से धर्म, त्याग, मर्यादा और कर्तव्य पालन का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि शंकरपुरवा तृतीय वार्ड के पार्षद उमेश चंद्र सनवाल और विशिष्ट अतिथि पूर्व पार्षद हेमा सनवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद मंच पूजन हुआ। बाल कलाकारों ने सुंदर आरती प्रस्तुत करने के साथ भगवान श्रीराम की स्तुति की। ‘श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन’ की भक्तिमय प्रस्तुति से पूरा वातावरण राममय हो गया। इस दौरान कॉलोनी के गणमान्य नागरिकों, समिति के संरक्षकों, पदाधिकारियों और सदस्यों की उपस्थिति रही।

रामलीला के दूसरे दिन अयोध्या के राजा दशरथ द्वारा भगवान श्रीराम को युवराज बनाने की घोषणा से कथा आगे बढ़ी। इसके बाद मंथरा द्वारा रानी कैकेयी को कुमंत्रणा देने, दशरथ-कैकेयी संवाद और कैकेयी के वरदान मांगने के प्रसंगों का मंचन किया गया। पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए भगवान श्रीराम के वन जाने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वन गमन के दौरान केवट मिलन के प्रसंग ने भक्ति, समर्पण और निष्काम सेवा की भावना को उजागर किया। वहीं, श्रीराम के वियोग में सुमंत के विलाप और राजा दशरथ के प्राण त्यागने के दृश्यों ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।

श्रीराम की भूमिका कु. इशाना जोशी, लक्ष्मण की भूमिका कार्तिक रौतेला, सीता की भूमिका कोमल पाण्डेय, राजा दशरथ की भूमिका भुवन चन्द्र पाण्डेय, कैकेयी की भूमिका कु. ऋचा उप्रेती, मंथरा की भूमिका कु. अंशिका रस्तोगी, सुमंत की भूमिका मानस नयाल और केवट की भूमिका पंकज गयाल ने निभाई।

इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष उमेश चन्द्र सनवाल ने कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा से परिचित कराने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि रामलीला जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ समाज में नैतिक मूल्यों और धार्मिक चेतना को भी मजबूत करते हैं।